मै वो नही जो तुफानो से डरता हो
मै रहा अडिग तेज पवन के झोको मे
मै नही वो जो संकटो से डर जाते है
मै तो रहा सदा संकटो की गोदी मे
मै नही रहा भाग्य का अनुगामी बन कर
मै स्वम् अपने भाग्य का बना रचिता हूँ
विजय उपहार दिया मुझे मेरे भाग्य ने
मैने हर क्षण का हर क्षण किया संहार है
स्वमं हर क्षण ने मेरे पथ का श्रृंगार किया है
हर क्षण ने मुझसे प्यार किया है और्
हर क्षण ने नया एक उपहार दिया है
क्यों ना हो जाऊं मैं मौन तमाशा बनके
देखना फिर भी हर हालात में रहूंगा तन के