Tuesday, 22 January 2019

मै वो नही

मै वो नही जो  तुफानो से डरता हो
मै रहा अडिग तेज पवन के झोको मे
मै नही वो जो संकटो से डर जाते है
मै तो रहा सदा संकटो की गोदी मे

मै नही रहा भाग्य का अनुगामी बन कर
मै स्वम् अपने भाग्य का बना रचिता हूँ
विजय उपहार दिया मुझे मेरे भाग्य ने

मैने हर क्षण का हर क्षण किया संहार है
स्वमं हर क्षण ने मेरे पथ का श्रृंगार किया  है
हर क्षण ने मुझसे प्यार किया है और्
हर क्षण ने नया एक उपहार दिया है

क्यों ना हो जाऊं मैं मौन तमाशा बनके

देखना फिर भी हर हालात में रहूंगा तन के