Sunday, 23 December 2018

पहाडों का गांधी इन्द्रमणी बडोनी

जखोली ब्लाक के अखोली की।
यादे बडी सलोनी है|
जन जन मानस मे वसा जो
वो इन्द्रमणी बडोनी है||

संकल्पो और आर्दशो के रंगो ने जिसे सजाया है|
वो सपूत पहाडो का उत्तराखण्ड जिसने बनाया है||

24 दिस० 1924 ने उपहार दिया एक टहरी को|सुरेशानन्द के आंगन मे  जन्म मिला पहाड के पहरी को||

जो नित्य चला सत्य अहिंसा के पथ पर|
पहाडो का गांधी कहलाये|
राजभोग और राजयोग इस आघोडी को ना भाये||
वो सन्यासी और साधु सा पैदल ही चलता जाता था|
जन चेतना को जगा जगा|
लोकसंस्कृति का अलख जगाता था|
जिसके केदार नृत्य पर पंडित नेहरु भी झूमे थे|
किया राज्य निर्माण हेतु आन्दोलन जब|
सत्ता के शासक भी घूमे थे||

चक्करा गया था सिर शासको का तब|
खटीमा मंसूरी लोम हर्षक हत्याकाण्ड किया|
इस महान जन सैनानी को जोगीवाला से गिरफ्तार किया|

विकास की राह के रोडो को|
अपनी ठोकर से जिसने हटाया था|
वन अधिनियम का विरोध किया|
राह के पेडो को कटवाया था|
यह कृत्य उनके अदम्य साहस का |
एक सुन्दर उदाहरण है
इसलिये वो गांधी के सदृश हुए|
ये नमक कानून सा उदृहरण है|

निज चिन्तन मे था बसा जिसके|
विकास मात्र पहाडो का |
उत्तराखण्ड है प्रतिफल उसकी
सिंह सदृश कृकश दहाडो का|
72 वर्ष की जर्जर काया थी|
कहर बन बीमारी भी  आई|
थी पहर 18 अगस्त 1999 की |
तब काल सवारी भी आई||
यह अदभ्य साहसी सैनानी तब भी
जन जन के चिन्तन मे डूबा था|
कुछ इस तरह से प्यारे बच्चों|
उततराखणड का सूरज डूबा था

आओ हम सब ये प्रण करे
उनके ही सद मार्ग पर कदम बढायेगे|
अपने उत्तराखण्ड को हम सब भी
आर्दशों के रंगो से सजायेगे|
इस देवभूमि का आंगन तब
देवालय बन जायेगा
इस महापुरुष इन्र्दमणी बडोनी का
जीवन स्वप्न तब सत्य सार्थक हो जायेगा|

Thursday, 16 August 2018

जावाज जिन्दगी का सिपाही खो गया

जावाज जिन्दगी का सिपाई खो गया|
वो वतन परस्त हम सफर खो गया|
जो लिखता था कलम से मूकद्दर की दास्ता
उसका मुकद्दर सो गया या वो सो गया|

अब वो ख्याल बन कर दिलो में रहेगा |
वो उसका था नही मेरा ना कोई कहेगा|
वो अब सबकी आंखो का तारा हो गया|

जिसके अटल फैसलो से बना मुल्क है
लाखो काटे हटाये बन गया शक्तिपुंज
नजरे उठा सके नही हौसला दुश्मनो मे
वो सिल्पी अटल था ये काम हो गया|

उसके पद चिन्हो  की धमक देख लो
अब वतन उसके संग संग चल रहा
कह रहे है सभी वो सबका ही था
दिलो पर करके राज जुदा हो गया|

जावाज जिन्दगी का सिपाही खो गया
वो वतन परस्त हम सफर खो गया
           (माननीय अटल जी को समर्पित)

Thursday, 2 August 2018

सपना

[Spoken Word]
[Verse 1]
कैसे कहू तुझसे पवन
दिल मे मेरे क्या है

मौका है
एक सपना है
मेरा सजना है
मुझे सजना है

आखों में जो निंदिया थी

नही सोई मैं मेने खोई|

[Verse 2]

शीशे से पूछूं, मैं बार-बार,

कब तक करूँगी, उसका इंतज़ार।

कंगन खनके, और बिंदिया चमके,

सांसें रुकी हैं, बस उसके नाम पे।

[Pre-Chorus]

ये दीये की लौ भी, अब तो सताए,

परछाई में भी, वो नज़र आए।