Sunday, 26 April 2020

अन्तहीन संवेदना

मन की संवेदना कोई अन्त नही
प्रभाव शेष है इसका अन्तहीन अन्त तक
सांत्वना कौन किसे कब तक देता रहेगा
अंधेरे छाता है दृश्य भी अदृश्य हो जाता है
सगे से सगा भी अपनो से दूर छिटक जाता है
सम्बन्धो की डोर हाथो से छूट जाती है
पिता की चिता को मुखाअग्नि देने से 
पुत्र अपने चिर परिचित कर्त्वय से मुकर जाता है
एक पुत्री अपने पिता की प्रतिक्षा करती है
समझती है करने गये है
चिकित्सा बीमार ईश्वर की 
आप जाते है देख कर आपको
मासुस मुस्कराती है और 
यही आपको बताती है
कलुसित‌ ह्रदय मनुज नही जानते 
जिनके प्रति उनके मन मे क्रूरता का वास है
वही ईश्वर है जो उनकी जिन्दगी को
बचाते है सजाते है संवारते है और
छोड जाते है अपने मासुमों को
नितान्त अकेला इस इस जंगलरुपी समाज में
अपनो के बीच रहकर अपनो से वंचित
मात्र अन्तहीन संवेदनाओ के साथ|




Wednesday, 22 April 2020

कोरोना कोरोना ये तो गन्दा बडा

कोरोना कोरोना ये तो गन्दा बडा
लाशो का करता है ये तो धन्धा बडा
रुक गयी जिन्दगी ये तो गन्दा बडा
भूख लाचारी में हर बन्दा है खडा

फर्ज इंसानियत का जो निभाते रहे
उनकी आँखो से आँसू हम बहाते रहे
वो कहाँ पर खडे‌  और हम कहाँ पर खडे
वो बचाने पर है अडे और हम मिटाने पर अडे
बचाता है जो या जो मिटाता है 
बोलो इनमें है कौन गन्दा बडा
कोरोना कोरोना  ये तो अन्धा बडा::::::::::१
वेखौफ आँधी है ये वरवादी भरी
मिटाने को जिन्दगी ये तो जिद्द पे अडी
खौफ किसी को कहाँ  किसको किसकी पडी
अपनो को देने मौत  भीड सडको पे है खडी
घर में रहते तो होता नुकसान मन्दा बडा
कोरोना कोरोना  ये तो अन्धा बडा
लाशो का करता है  ये तो धन्धा बडा::::::::::२
ईमान इन्सानियत पे लाये तो जरा
कमवख्त कोरोना को‌ मिलकर हराये तो जरा
एहसान इन्सानो पे कीजिए तो जरा
जहाँ है रहे वहाँ तो होगा चन्दा बडा
सौदागर मौत का है ये तो गन्दा 
लाशो का करता है ये तो धन्धा बडा
कोरोना कोरोना  ये तो अन्धा बडा::::::::३