[Chorus]
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा
याद में आंसू भी आते हैं तो क्यों आते हैं
लोग वफा जो निभाते हैं क्यों निभाते है
(Smoking word)
[Verse 1]
हर रात तन्हाई ने पुराने किस्से दोहराए थे
दर्द से रिश्ता था, इस लिए हम मुस्कुराए पाए थे।
ज़ख़्मों से दोस्ती थी, वो जख्म ही लाये थे
सिया रातों में अधेरा इतना घना था,
वो पास ही था हम उन्हें देख ना पाए थे
[Bridge - Gazal ke Asrar]
अपना यह साथ जो छूटा तो क्यों छूटा
वक्त के साथ साथ चलते चलते
हम कहां से कहां तक आ पहुंचे
अब हौसला अब हौसला टूटा तो क्यों टूटा
(Smoking word)
[Verse 2]
वह हसीन खयालों में बिन बलाए
आया करते थे
मुझको अपना महबूब बताया करते थे
है
हाय वो क्यों अब रूठ गया है हमसे
जिससे अपना हाले दिल सुनाया करते थे
[Outro]
उसका जाना भी एक बहाना था
इस दर्द से पीछा जो छूटा तो क्यों छूटा
अब जबकि मंजिल प्रभात सामने थी मेरे
मेरा हौसला टूटा तो क्यों टूटा
[Chorus]
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा
याद में आंसू भी आते हैं तो क्यों आते हैं
लोग वफा जो निभाते हैं क्यों निभाते है
याद में आंसू भी आते हैं तो क्यों आते हैं
लोग वफा जो निभाते हैं क्यों निभाते है
[Verse 1]
हर रात तन्हाई ने पुराने किस्से दोहराए थे
दर्द से रिश्ता था, इस लिए हम मुस्कुराए थे।
हर रात तन्हाई ने पुराने किस्से दोहराए थे
दर्द से रिश्ता था, इस लिए हम मुस्कुराए थे।
[Pre-Chorus]
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा
[Verse 2]
ज़ख़्मों से दोस्ती थी, वो जख्म ही लाये थे
सिया रातों में अधेरा इतना घना था,
वो पास ही था हम उन्हें देख ना पाए थे
ज़ख़्मों से दोस्ती थी, वो जख्म ही लाये थे
सिया रातों में अधेरा इतना घना था,
वो पास ही था हम उन्हें देख ना पाए थे
[Bridge]
(Gazal ke Asrar)
अपना यह साथ जो छूटा तो क्यों छूटा
वक्त के साथ साथ चलते चलते
हम कहां से कहां तक आ पहुंचे
अपना यह साथ जो छूटा तो क्यों छूटा
वक्त के साथ साथ चलते चलते
हम कहां से कहां तक आ पहुंचे
अब हौसला अब हौसला टूटा तो क्यों टूटा
अब हौसला अब हौसला टूटा तो क्यों टूटा
[Verse 3]
वह हसीन खयालों में बिन बुलाए आया करते थे
मुझको अपना महबूब बताया करते थे
वह हसीन खयालों में बिन बुलाए आया करते थे
मुझको अपना महबूब बताया करते थे
हाय वो क्यों अब रूठ गया है हमसे
जिससे अपना हाले दिल सुनाया करते थे
हाय वो क्यों अब रूठ गया है हमसे
जिससे अपना हाले दिल सुनाया करते थे
[Outro]
(Gazal ke Asrar)
उसका जाना भी एक बहाना था
इस दर्द से पीछा जो छूटा तो क्यों छूटा
उसका जाना भी एक बहाना था
इस दर्द से पीछा जो छूटा तो क्यों छूटा
अब जबकि मंजिल प्रभात सामने थी मेरे
मेरा हौसला टूटा तो क्यों टूटा
अब जबकि मंजिल प्रभात सामने थी मेरे
मेरा हौसला टूटा तो क्यों टूटा
[End]
किसी का दिल अगर टूटा तो क्यों टूटा
कोई अपना अगर रूठा तो क्यों रुठा