Saturday, 28 February 2026

तू रोशनी भर ही तो थी

॥ मेरा दिल तेरा हो गया ॥



[Female voice:]मेरा दिल तो कब का सजना तेरा हो गया,
मैं कल रात को सो न पाई, तेरी यादों में सवेरा हो गया।
[Male voice:]तुझसे मिलने की चाहत में जागा, मैं तेरी ओर भागा,
मेरे सनम ये दिल मेरा, ना जाने कब से तेरा हो गया।
​[अंतरा १]
 [Female voice:]बिन तेरे मुझको करार नहीं आता,तू है हरजाई, तू कभी नहीं आता।तुझे जाने अब क्या हो गया...

 [Male voice:] तेरी चाहत मुझे जाने दे, तभी तो मैं आऊँगा,

ओ सनम मेरा तो तेरी राहों में बसेरा हो गया।
​[अंतरा २]
 [Female voice:] 

 तुझे परवाह है कहां मेरी 

तूने निंदिया चुराई है मेरी 

जीना तूने मुश्किल किया है

मेरे दिल में आग लगाई

बेदर्दी तुमने कैसा दर्द दिया है 

मेरा दिल जल के अंगारा हो गया

​[अंतरा ३]
 [Male voice:]  तूने समझा है मुझको भंवरा कली कली पे मडराता है

तू मुझको दीवाना कहती है,

समझती है सजना तेरा

अब आवारा हो गया.......

​​[अंतरा ४]


 [Female voice:] ओ सजना ये कैसी मजबरी

बढी है तुझसे दूरी

तुझे पाने की जिद में

बुरा हाल ये मेरा हो गया... 

 [Male voice:] तू दीवाना समझ या आवारा

मुझे  है सब गवारा 

रहूंगा बिन तेरे कुवारा

सनम मैं हूं तेरा ये दिल मेरा

अब तेरा हो गया.......








सन्नाटा

मेरे मन के एक कोने का एकांत

मेरे मन के दूसरे कोने में बैठे 
कोलाहल से कर रहा था 
वार्तालाप बड़ी तलीनता से 
समझा रहा था कोलाहल को 
अरे भाई क्यों अशांति फैलाते हो 
हम दोनों का एक ही घर है 
कृपया यहां रहो शालीनता से 
मनका कोलाहल खिन्नता से 
झुंझलाता हुआ बोला
मिस्टर  एकांत तुमने ही तो 
मेरी महफिल में जहर भोला घोला
तुम खामोशहो किंतु 
बड़बड़ाते हो 
क्यों मुझे इतना
 त्रस्त करते हो
भाई तुम भी अगर मेरी तरह बन जाओ 
ये मन उल्लास से भर जाएगा 
मानोगे मेरी बात 
तुम्हें भी बड़ा मजा आएगा 
मेरे मन के एकांत ने 
एक तिरछी नजर से 
कोलाहल को देखा 
बोला क्या तुमने नहींअच्छी 
मेरी भाग्य रेखा 
उसमें लिखा है 
मैं और तुम 
दोनों स्वभाव से भिन्न हैं 
एक चहल पहल से 
दूसरा खामोशीसे खिन्न है 
इसलिए इस मन को भी 
दो भागों में बाटा है 
तुम्हारे कोने में चहल पहल है
मेरे कोने में सन्नाटा है

इस जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है

मतला:
इस जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है,
दिल भूल से भी मुस्कुराना भूल जाता है।
​शेर 1:
ये जिंदगी भी एक खामोश समुन्दर है,
यहाँ दरिया भी आकर बहना भूल जाता है।
​शेर 2:
वह जिसने बसाया था कभी सांसों में अपनी,
मोहब्बत में किया हर वादा अपना भूल जाता है।
​शेर 3:
बेवजह किस्मत पर इल्जाम लोग लगाते हैं,
तराशे हैं खुद ने ये हालात, बस इंसान भूल जाता है।
​शेर 4:
कोई भी दर्द मोहब्बत से बड़ा नहीं होता,
ये खुद की आजमाई हुई बात है, क्यों भूल जाता है।
​शेर 5:
दिल अपनी उलझन भी सुलझा न सका कभी,
बदल गए कितने हालात, अक्सर दिल भूल जाता है।
​शेर 6:
रास्ता तो एक ही होता है हकीकत में सदा,
जो दो राहे पे खड़ा हो, बस वही भूल जाता है।
​मकता:
सुकून दिल और दिमाग में बना कर रख 'प्रभात',
हर मसला सुलझ जाता है, तू क्यों भूल जाता है।

जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,

जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,

इन अनजानों में कभी ना कभी अपने भी मिलते हैं।

​मंजिलें ऐसी भी होती हैं जिनके कोई रास्ते नहीं होते,

फिर भी तन्हा मुसाफिर उनका दम भरते हैं।

​बात हौसलों की हो हर शय भी हमराह होती है,

परिंदे तो  आसमानोंंं के पार भी उड़ान भरते हैं।

​जिंदगी केेे लिए सिर्फ खुशियां ही जरूरी तो नहीं,

फिर क्यों इन गमों को अपने से दूर करते हैं।

​इस दुनिया को छोड़िए ये तो तन्हा छोड़ देती है,

हम फिर क्यों किसी कारवां का इंतजार करते हैं।

​सफर तो सफर है थक कर रुकना क्योंंं है ,

मंजिलें भी कदम चूमती हैै उनके जो कदम चार चलते हैं।

​वक्त है अभी अपनी सफर की तैयारी है,

अपनी तो फितरत है आसमां पर पांव रखते हैं।

​जो छोड़कर चले गए मुड़कर भी ना देखा  'प्रभात' हमको

क्यों उनसे मोहब्बत है उनका इंतज़ार करते हैं 

Friday, 27 February 2026

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

ढाँचा एक हड्डी का थे वह,

आदर्शों पर रहता था काबू,

सत्य अहिंसा अस्त्र थे उनके, 

विश्व पुकारे कह कर बापू।

सत्य का साधक ऐसा, 

जो अन्यत्र कहीं ना मिल पाए,

एक युग बीते तभी तो, 

एक युग पुरुष धरा पर आए।

​सच्ची मानवता का अनुराग, 

सदैव हृदय में उनके समाता था,

सुख-दुख पर था निर्वाद राज, 

पर पीड़ा पीना आता था।

साधन कैसा हो साध्य का, 

बापू को नित्य ध्यान रहा,

बैरी का भी हृदय में उनके 

सदा बसा सम्मान रहा।

​त्याग व परमार्थ के पथ पर

 वह अग्रज बन बढ़ते जाते थे,

शस्त्र सुसज्जित दल भी उनको 

निहत्था देख घबराते थे।

नेतृत्व ऐसा था बापू का, 

जब जेल में बंद हो जाते थे,

बापू का लेकर नाम नागरिक, 

आज़ादी के पथ बढ़ते जाते थे।

​ब्रिटिश राज्य का दंभ तोड़ा था 

मेरे बापू ने, एक राष्ट्र दिया, 

एक दी आवाज़ जनता को मेरे बापू ने।

संगठित समाज का सपना वो, 

अधूरा अधूरा सा है अपना वो, 

जिसमें भारती मात्र भारती है।

कैसे पूरी हो कल्पना वो

​जिस पथ का बापू ने ज्ञान दिया है, 

हमने न उसका ध्यान किया।

उच्च वर्ण और मद दौलत का, 

तब पग पग पर अभिमान किया।

क्षुद्र मनोरथ के कारण 

भ्रष्टाचार खुला हम करते हैं,

ना राष्ट्र और ना राष्ट्रहित, बस अपनी तिजोरी भरते हैं।

​संदेश आज राष्ट्र को,

 नेतृत्व भी ऐसा देता है,

खुलेआम पैसे को 

वह खुदा के जैसा कहता है,

संगठित भाव सरकार का यह,

 अपनी ढपली अपना राग।

दिव्य चक्षु से देखो अपने ,

संसद में जूते चलते आज,

प्रतिनिधि बनके जो आते हैं, 

चुनाव में पैसा पानी सा बहाते हैं,

अल्पमत की सरकार में वो 

करोड़ों में बिक जाते हैं, 

धन जन की नित क्षति होती है,

 सरकारें आती जाती हैं,

अरबों रुपयों में बनी सरकार

 तेरह दिन में गिर जाती है।

महंगाई की मार से जनता है

 त्रस्त, न घबराती है।

एक चुनाव गया दूसरा आया,

 फिर उसमें लग जाती है।

 रामराज की कल्पना 

कहीं खो गई और रोटी है।

 निर्धनता पल-पल बढ़ती है।

 भूखे के पास न रोटी है।

बापू ने जो राज दिया, 

वह प्रजातंत्र कहलाता है।

 ऐसे प्रजातंत्र को करो विदा,

 जिससे बापू का ना कोई नाता।

सपनों की पालकी

सपनों की पालकी मे
कब तू  सनम
बन के दुल्हनिया आएगी 
प्यार में पहली बार 
तूने किया था वादा
तू अपना वादा कब निभाऐगी

अपने मिलन की रात अधूरी है
ऐसी भी क्या सनम  मजबूरी है 
पास हो उतना जितनी ये सांसे
फिर भी क्यों  इतनी दूरी है 
याद तेरी जब आएगी 
तन मन में आग लगाएगी 
सपनों की पालकी में 
कब तू  सनम 
बनके दुल्हनिया  आएगी
ऐसी भी क्या सनम मजबूरी है
बिन तेरे जीना भी है
एक मजबूरी है
सांसों का ये आना जाना
सिर्फ एक है बहाना 
ये सांसे भी कब तक आएगी
सपनों की पालकी
कब तू  सनम 
बन के दुल्हनिया आएगी
सुन के पुकार तेरी
आई है दुल्हनिया तेरी
वादा वो अपना निभाएगी
जब तक चलेगी सांसे
तुझको अपना बना के 
पिया अंगना तेरा सजाएगी 
कई जन्मों से 
मैं हूं प्यासी 
प्रेम की साजन तेरे
मैंने भी हर जन्म
मिलने को तुझसे
लगाये जाने कितने फेरे
इस जन्म में 
तेरी दुल्हनिया 
तेरा साथ निभाएगी
अपने मिलन की 
रात ये पूरी होगी
नहीं सनम कोई 
अब मजबूरी होगी 
बीच में तेरे मेरे 
नहीं कोई दूरी होगी 
गीत की प्यार का 
ये बहारे गाएगी
चांदनी रात मे
तेरे मेरे साथ में 
तारो की बारात सज जाएगी
जन्मो की प्यास मिट जाएगी
अपने मिलन की 
रात ये पूरी होगी
नहीं सनम कोई 
अब मजबूरी होगी 
बीच में तेरे मेरे 
नहीं कोई दूरी होगी 
जन्मो की प्यास मिट जाएगी



:"तू दिल के करीब है

तू  दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
मेरी आंखों का सपना है 
सनम तू मेरा अपना है
तेरी  आरजू मेरे दिल में है 
ये जानी पहचानी लगती है
ओ सनम..... मेरे सनम ओ सनम...... तेरे हैं हम

जन्म जन्म से हर जन्म में मुझे  ऐसा लगता है तू सनम सपना लगताहै जैसे दर्पण मे तुझे देखा है हर जन्म में मेरे  हाथो की रेखा है  
 तू दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
मेरी आंखों का सपना है 
सनम तू मेरा अपना है
तेरी  आरजू मेरे दिल में है 
ये जानी पहचानी लगती है

 ओ सनम..... मेरे सनम ओ सनम...... तेरे हैं हम

तू जान है मेरी सांसों में
मेहमान है मेरे इस दिल में
 तू चैन है मेरी आंखों का 
पहचान है मेरे इस दिल की 
ओ सनम..... मेरे सनम ओ सनम...... तेरे है हम
 तू दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
मेरी आंखों का सपना है 
सनम तू मेरा अपना है
तेरी  आरजू मेरे दिल में है 
ये जानी पहचानी लगती है

तू सौदागर है बहारों का
तू नूर है  इन नजारों का 
तू हंसी है मेरे होठों की 
तू चमन है मेरी बहारों का 
तू दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
मेरी आंखों का सपना है 
सनम तू मेरा अपना है
तेरी  आरजू मेरे दिल में है 
ये जानी पहचानी लगती है
ओ सनम..... मेरे सनम ओ सनम...... तेरे है हम

है आरजू तुझको पाने की 
तू ख्वाहिश है दीवाने की 
हद से आगे की चाहत है
सनम तुझे अपना बनाने की
 दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
मेरी आंखों का सपना है 
सनम तू मेरा अपना है
तेरी  आरजू मेरे दिल में है 
ये जानी पहचानी लगती है
तू  दिल के करीब है इतना तेरे दिल की धड़कन मुझे अपनी लगती है
ओ सनम..... मेरे सनम ओ सनम...... तेरे है हम

Thursday, 26 February 2026

अपनों ने ला कर छोड़ा बिन बदनाम गलियों में

Intro]

(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)

(Soft strokes of Tabla and Sarangi)

​[Verse 1]

अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में

लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में

सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका

खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में

​[Chorus]

संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है

सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है

टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं

इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं

​[Verse 2]

कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा

मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा

रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली

अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली

​[Bridge]

(Sad Violins and slow Cello buildup)

सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...

जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...

​[Outro/Makta]

मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है

खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में

उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो

वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...

​[End]

(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)




Intro]

(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)

(Soft strokes of Tabla and Sarangi)

​[Verse 1]

अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में

लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में

सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका

खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में

​[Chorus]

संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है

सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है

टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं

इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं

​[Verse 2]

कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा

मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा

रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली

अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली

​[Bridge]

(Sad Violins and slow Cello buildup)

सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...

जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...

​[Outro/Makta]

मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है

खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में

उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो

वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...

​[End]

(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)




अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में 
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा 
मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा 
तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में 
संग भी ना परछाई रहती 
सब कुछ इतना काला है 
सब कुछ मिलता है  इन गलियों में 
नहीं मलता उजाला है 
टूटती चूड़ी बहते आंसू 
संग हमारे रहते हैं इन बदनाम गलियों में 
कोई पकड़ता हाथ यहां पर 
कोई दामन से खेल रहा 
मासूम दिल तन्हाई में रोता
कोई सहारा नहीं  मिलता इन बदनाम गलियों में में
रोज लगाई जाती है बोली 
रोज सजाई जाती डोली 
अपनी हर शाम दिवाली 
अपनी सुबह होती है होली 
सपने टूटते इन आंखों के 
इन बदनाम गलियों में

Intro]

(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)

(Soft strokes of Tabla and Sarangi)

​[Verse 1]

अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में

लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में

सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका

खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में

​[Chorus]

संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है

सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है

टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं

इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं

​[Verse 2]

कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा

मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा

रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली

अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली

​[Bridge]

(Sad Violins and slow Cello buildup)

सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...

जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...

​[Outro/Makta]

मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है

खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में

उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो

वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...






​[End]

(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)

Wednesday, 25 February 2026

जिंदगी का एक सफर

जिंदगी का एक सफर मुस्कुरा कर गुजर गया,
एक भागते दौड़ते तन्हा कहीं गुजर गया।
​अब जिस हालात से गुजर रहे हैं देखिए होगा क्या,
वह मुकाम होगा कहां जहां यह सफर भी रुक जाएगा।
​वक्त तो वक्त है अच्छा बुरा होता नहीं,
आदमी ही बुरा है वक्त बुरा होता नहीं।
​जज्बातों से बंधा जाने क्या कर जाएगा,
सोचने वाला तो सिर्फ सोचता रह जाएगा।
​ढूंढ ले तू कहीं पर कोई आसरा होगा यहीं पर,
नियत पर अपनी शक ना कर मेजबान भी मिल जाएगा।
​सफर छोटा हो जाता है अगर हमसफर साथ हो,
इक नजर भर के देखिए हर नजारा हमसफर बन जाएगा।
​बिखरी पड़ी है हर तरफ खूबसूरती फिजाओं में,
गीत सुनाता है पवन ये तेरे साथ साथ हो जाएगा।
​रास्ता लंबा सही जो चल पड़ा वो चल पड़ा,
अगर चला रहा तो जान एक दिन मंजिल भी पा जाएगा।
​रास्ते मंजिलों का पता खुद ही बताते हैं,
हमसफर भी ना मिले तब रास्ता जरिया बन जाएगा।
​कई बार दो राहों पर हम किसी का इंतजार करते हैं,
सोचते हैं कि कोई हमसफ़र बन जाएगा।
​हैसियत किसकी कितनी है जानकर होगा क्या 'प्रभात',
मंजिल तो एक है हर रास्ता और मुसाफिर वहीं जाएगा।

Tuesday, 24 February 2026

भगवान गौतम का सन्मार्ग।

दूसरों के हित में जो

 अपना लुटाते हैं सब कुछ,

 देके उनको अपनी खुशियाँ

 ले लेते हैं उनके दुख।

​पथ के भ्रमित जाल में 

जो ना फँसते हैं कभी,

 रोते हैं पल के लिए 

फिर हँसते हैं वही

कर्म ही उनकी पूजा होती 

कर्म ही होता सेवा का आधार

उनके ज्ञान के आलोक से 

प्रकाशित हो जाता ये संसार 

 जो नित्य निरंतर हर पलआगे बढ़ते हैं शाश्वत सत्य के अनुगामी होते 

वह सत्य के संग साथ -साथ चलते हैं

दूसरों के हित में जो.........

उनकी वाणी से 

मानवता का सृजन होता

उत्कृष्ट आदर्श रचे जाते 

पवित्र पावन दर्शन होता 

सब तत्व समरूप हो जाते 

उनके पग रज लेने को

 समाज के सब नर नारी  आतुर रहते हैं

वे तत्व दृष्टा अग्रज बन सबसे आगे रहते हैं 

दूसरों के हित में जो......

वह संभालते मनुष्य तेरा

बनते बिगड़ते कल हो आज

जीवन में प्रभु दर्श की

 हो थोड़ी सी आस, 

आ जाते दर्शन देने वाले 

दर्शन अभिलाषी के पास।

​है अमीरी सुख का साधन

 और गरीबी मोक्ष है, 

गौतम बुद्ध ने बताया है

 यह सन्मार्ग। 

यह धरा मौन उपवास करेगी

यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक? तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक? तू अल्प ज्ञान ये ज्ञान स्रोत, तू दीपक ज्योत ये महा ज्योत।। ये निर्मल है तो कटु परिधान, ये मौन रहे तू करे व्याख्यान।
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक 
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
सृष्टि का पालक तो तू है इसका संहारक भी तू है। तू प्रभावमान तू शक्तिमान, 
जो सत्य है वह तू है
पर नहीं संबंध इतना सा। सृष्टि भी तेरी पालक है, 
यदि तू संहारक है इसका, यह भी तेरी संहारक है।
युग युग की महिमा का ज्ञान 
करना भी नहीं इतनाआसान 
सत्य की खोज का पथिक हूं मैं
की निरंतर सत्य की खोज में निकलता हूं मैं 
कैसे खोजु कैसे जानू शाश्वत सत्य है क्या इस महान प्रकृति की गोद में मेरा अस्तित्व है क्या 
एक तृण मात्र अस्तित्व मेरा 
प्रभु चरणों में  नित्य वास मेरा 
फिर क्या जाना और क्यों आना 
जब उद्गम स्रोत ही है वह मेरा 
मैं खुद को सर्वशक्ति समझता हूं
यह भ्रम मात्र ही है मेरा 
ब्रह्म में निवास है मेरा 
जगपति के चरणों से मेरा उद्गम 
मैं कब पृथक हूं  उससे 
वह महा ज्योत है और मैं हूं ज्योत
पर कुछ तो निश्चित मुझ में है उसका 
विज्ञान भले ही बिसरा दे उसको 
यह ज्ञान विज्ञान सब है उसका
सब ज्ञानो का वही स्रोत है
वही सब नाच नचाता है
वही करण वही करता है 
वह हर क्षण रूप बदलता है
मैं मनुष्य को ईश्वर बोल पाया 
मैं शब्द अपने तोल  पाया 
क्या अब भी  भ्रमित  हू
अपने शब्दों से क्या भेद पाया
 निसंदेह  तर्क विचित्र सा है
अहंकार में मानव दानव है 
फिर क्यों ईश्वर मैं बोलता हूं
एक नूतन दर्शन गूंथता हूं
परमब्रह्म की ही छाया में
परमब्रह्म को ही ढूढता हूं
पूर्ण माया के साथ 
मनुज काया में 
ईश्वर अंश समाया है
 ईश्वर  की जो महिमा है
जिसे गीता ने भी गाया है
आत्मा इस नश्वर काया में ही रहती है
जब तक दया करना प्रेम भाव में बहती है 
तब तक मनुजता से उसका नाता है 
और जब तक मनुज में मनुजता है 
वह इस जगत का शाश्वत विधाता है 
जो विकारों के वशीभूत है वह दानव है 
जो विकारों से रहित है वह मानव है
जब तक सामूहिकता है समाज है 
मानव विधाता कल भी था आज  है
सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च कष्ट है प्रकृति 
जिसकी मात्रा मानव है एक कृति 








ए सनम तू अजनबी तो नहीं,

Instrumental Intro]

(Soft flute and acoustic guitar melody)

​[Chorus]

ए सनम तू अजनबी तो नहीं,

तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।

तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,

बस तुझे पाने का ही अरमान है।

​[Instrumental Interlude]

​[Verse 1]

दिल मेरा अब मेरे बस में नहीं,

तू जो संग है तो जीवन मेहरबान है।

तेरे बिन ये जहाँ लगता अपना नहीं,

मेरी बेबसी ही मेरा इम्तिहान है।

​[Chorus]

ए सनम तू अजनबी तो नहीं,

तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।

तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,

बस तुझे पाने का ही अरमान है।

​[Instrumental Interlude]

​[Verse 2]

हर जनम में हमारी मुलाक़ात हो,

हम मिलें और बस प्यार की बात हो।

ऐसी कोई सुबह ना हो ज़िंदगी में,

जब मेरे हाथों में ना तेरा हाथ हो।

मैं तेरी जान हूँ, तू मेरी जान है।

​[Chorus]

ए सनम तू अजनबी तो नहीं,

तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।

तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,

बस तुझे पाने का ही अरमान है।

​[Instrumental Solo]

(Emotional flute solo mixed with strings)

​[Verse 3]

ये पवन भी सुनेगी अपनी प्रेम कहानी,

मैं तेरा दीवाना, तू मेरी दीवानी।

ये नदियाँ भी गाएंगी अपने फसाने,

हम जनम-जनम के हैं एक-दूजे के दीवाने।

हमारे प्रेम से ये उपवन भी ना अनजान है।

​[Chorus]

ए सनम तू अजनबी तो नहीं,

तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।

तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,

बस तुझे पाने का ही अरमान है।

​[Outro]

ए सनम... तू अजनबी तो नहीं...

(Music fading out slowly)

राधा कृष्ण की होली

[मुखड़ा (Chorus)]

सात रंगे इस होली के सतरंगा त्यौहार है।

आओ यारों रंग लगाओ आया होली का त्यौहार है।

​[क्रॉस लाइन (Bridge)]

ब्रज में धूम है होली की

ब्रज में गूंज होली की

ढोल नगाड़े बजते चारों ओर

मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग

यह कैसी धुम है होली की।

​[अंतरा 1 (Verse 1)]

गुलाबी गालों पर मोहन श्याम रंग लगाए

गोप गोपिया होली खेले कृष्णा रास रचाये

राधा के हुए सांवरे राधा सांवरे की होली

ब्रज का हर वासी बोला होली होली होली

राधा कृष्ण की होली, राधा कृष्ण की होली।

ब्रज में धूम है होली की

ब्रज में गूंज होली की

ढोल नगाड़े बजते चारों ओर

मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग

यह कैसी धुम है होली की।

​[अंतरा 2 (Verse 2)]

नंदलाल का लाल कृष्णा रंग लाल लेकर आया

राधा को तो कृष्ण का श्याम रंग ही भाया

पिचकारी से कृष्ण ने जब भिगोई राधा की चोली

सखिया बोली सुनो सखी राधा है भोली

ब्रज का हर बासी बोला होली होली होली

राधा कृष्ण की होली, राधा कृष्ण की होली।

ब्रज में धूम है होली की

ब्रज में गूंज होली की

ढोल नगाड़े बजते चारों ओर

मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग

यह कैसी धुम है होली की।

[ग्रुप गायन जोश और उत्साह से हाई टेपो में]

सात रंग की होली होली 

सात रंग की होली सतरंगी ये होली 

सतरंगी ये होली सात रंग की होली 

राधा कृष्ण की होली राधा कृष्ण की होली

Monday, 23 February 2026

Meri shayari

1-मुझे वक़्त से समझौता करना नहीं आता,
वह भी बड़ा बेदर्द है, मेरे बुरे वक़्त पर नहीं आता।
मैं हर रोज़ उसे अपने सामने से गुज़रते देखता हूँ,
वह भी ज़िद्दी है, कभी रुककर मेरे पास नहीं आता।
2-वो जब भी मेरे जहन में ख्याल बनकर आई है 
एक खामोशी से भरा सवाल बन के आई है 
अगरचे वो चाहती तू तमाम खुशियां दे सकती थी 
मगर वह मेरे लिए सिर्फ यादो में लिपटे गम लई है

3-अब वो सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं मिलता,बस एक कसक है जो यादों के लिबास में लिपटी है।"(ai)

4-हंस मत रुक जा जरा सुन तो ले 
हसमत रुक जा जरा सुन तो ले 
हंसने वालों से दुनिया खफा हो जाती है 
क्या-क्या कसीदे पढ़ते है जमाने वाले
अनजाने में ही  हंसना बड़ी खता हो जाती
 

हंस मत, रुक जा, ज़रा सुन तो ले,

हसमत रुक जा, ज़रा सुन तो ले।

​हंसने वालों से दुनिया खफा हो जाती है,

क्या-क्या कसीदे पढ़ते हैं ज़माने वाले,

अनजाने में ही हंसना, बड़ी खता हो जाती है।



दुनिया की बंदिशों से ज़रा लम्हे उधार लेता हूँ,
अपनी तन्हाई में बैठ कर, मैं खुद को संवार लेता हूँ।"
हमने तो काँच की मानिंद, खुद को आईना बनाया था,
हमें क्या खबर थी कि सामने पत्थर का साया था।"
"चेहरे की मासूमियत पर, सदके ज़माना हुआ,
भीतर जो पत्थर छुपा था, वो सिर्फ हमारा हुआ।"


 है

हया का चाँद

(Shayari)

सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
​(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
​(Gaayan)
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।

ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
​(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।

ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

​(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
​(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।

ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
​(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।

ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
​(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।

​ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

(Shayari)

सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
​(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।

ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
​(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
​(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।

​ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
​(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
​(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।

​(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।


​(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
​(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।

​ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
​(Shayari)

अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
​(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।

​ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
​(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
​(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।

​ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।







​"ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, 

हमें तड़पाना छोड़ दे,

 या तू खुद कह दे हमसे 

कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।

​सितारे भी ठहर गए हैं उस नकाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को

 शर्मो हया का पर्दा

 क्यों तूने किया है, 

बेदर्दी सनम तूने 

जीना मुश्किल किया है, 

अब ये भी कह दे

 कि मुस्कुराना छोड़ दे। 

​अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।

नज़रों ही नज़रों में 

इशारे खूब करता है, 

इशारों में कहता है

 कि हम पर मरता है, 

ए महबूब मेरे मुझको 

आजमाना छोड़ दे

​अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा,  जब वह जलवाा फिरोज होंगे

इज़हार-ए-मोहब्बत

 सनम तू क्यों नहीं करता है 

क्या मेरी मोहब्बत से

तुझे डर सा लगता है

अगर यही सही है तो

यह बहाना छोड़ दे

ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।

​घूँघट में चाँद जब शर्माए,
दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए

वक्त भी नहीं है अब 

आने जाने का यह सिलसिला छोड़ दे


बड़ी भोली थी वो सोने की चिड़ियां

[Intro piano and Guitar slow fusion]
बड़ी भोली थी वो सोने की चिड़ियां
जिसे कैद किया था पिंजरे में 
पर नोचे जितने नोच सका 
व्यवसायी बन फिरंगी ने 
[व्यंग पूर्ण वाणी में स्पष्टता के साथ]
बड़ी तिरछी थी उनकी चालें 
हम भी थे बड़े भोले भाले 
कुछ सस्ता था जो  मिलता था 
सब उद्योग हमने डुबो डाले 

अपने घर में ही बेगाने थे 
पड़े अपमान उठाने थे 
यह बात  कल की ही है 
नहीं वो पुराने जमाने थे 
रक्त तन से हमारे निचोड़ा था 
तब ही फिरंगी ने छोड़ा था 
राष्ट्रभक्ति ह्रदय में बसती थी 
जीवन साधन बहुत थोड़ा था 
[गर्व पूर्ण वाणी में बोले]
दृढ इच्छा शक्ति के कारण ही 
उच्च शिखरों तक हम आए हैं 
जहां सुई भी विदेशी थी 
मिसाइल हमने बनाए हैं 
[चेतावनी पूर्ण शब्दों में दो बार बोले]
कोई आंख उठा के ना देखें 
वो साधन आज हमारे हैं 
परमाणु पर विजय हमारी है 
अंतरिक्ष भी आज हमारे हैं 
[विश्वास और जोश के साथ]
प्रगति के पथ पर चलते चलते
पग में भी छाले पड़ते रहे
फिर भी ना रुके हम इस पथ में 
बस आगे ही आगे  बढ़ते रहे 
परिपक्व भौतिकता का जादू 
आज फिर  से लगा है छाने
सावन के मेघ फिर आए हैं 
अब लगे नोट हैं बरसाने 
[ पूर्ण जोश क साथ]
ज्ञान बड़ा और विज्ञान बड़ा 
राष्ट्र का  अब सम्मान बड़ा 
चरम शिखर पर हम पहुंचे हैं 
विश्व नेतृत्व की और हाथ बड़ा 
[ग्रुप ग्रुप में आवाज के साथ ]
मिलकर अब हम सब को अपने 
अधिकारों का लुफ्त उठाना है 
संगठित अभिव्यक्ति हो इच्छा की 
सोपान अभी वह भी आना है 
[पहले दो लाइन पुरुषकी आवाज में चाचा बात की दो लइनमहिला की आवाज में]
 एक हित में निहित हो सबका हित 
 विस्मित ना हो हमें  परहित 

सदा सचेत्त रहे सदा याद रहे 
हमें राष्ट्र और हमारा राष्ट्रहित 

हम साधक हो आराधक हो 
मानवता के मुखर उपासक हो 

प्रयत्न हमारे उन्हें दूर करें 
प्रगति पथ के जो बाधक हो 
विश्व शांति ध्येय हमारा हो 
सारा जग हमको प्यार हो 

अंधेरा ना रहे धरा पर शेष कहीं 
घर-घर में ज्योति का उजियारा हो 
[स्त्री और पुरुष साथ-साथ गाएंगे]
 नवयुवक बने सच्चे सेवक 
जीवन आधार उन्हें दे दो 
ऐसी शिक्षा जो विचारों की 
रोजगार अपार उन्हें दे दो 
जग जान चुका पहचान चुका 
विश्व ताज बनेगा मेरा भारत 
अध्यात्म और भौतिक धरातल पर 
नित आगे बढ़ेगा मेरा भारत





[

बादल

बादल 
बादल मेरे गांव में आया 
देखा तो रंग काला था 
श्याम व्यंजना घोर गर्जना 
राक्षसा मतवाला था 
बादल मेरे गांव में आया 
देखा तो रंग काला था 
भंवर झंझावत नदियों से मांगे 
उदड़ता पवनों से चुराई 
हिमराज हिमालय सा रूप बनाया 
समुद्रों सी अटहास लगाई 
उसकी सांसों में से उद्गम था 
प्रलय काल ज्वाला का 
बादल मेरे गांव में आया देखा तो रंग कालाथा 
भोला अब आपके बरसुंगा ऐसे 
वसुंधरा में पानी को तरसे 
मैं आऊंगा मैं जाऊंगा 
त्राहिमाम तुझसे कहलाऊगा
ग्रीष्म में जब मेरा होगा आना 
खेतों में उपजेगा न कोई दाना
शरद ऋतु में जब आऊंगा 
शीतलता का एहसास कराऊंगा 
वर्षा ऋतु में जलमग्न धरा करके 
शंकर संहारक सा कहलाऊंगा 
तूने ही तो हो अज्ञानी 
दिया विश्व का प्याला था 
बादल मेरे गांव में आया देखा तो रंग काला था 
 संगी सहचर सब ऋतुए मेरी
क्रुध वो‌ भौ‌ है निर्ममता पर तेरी।
शीत का अनुबंध ग्रीष्म ऋतु से 
 ग्रीष्म काल में वो आएंगी
तुझे हाथ तपवायेगी आएंगे
वर्षा का अनुबंध हुआ जिस्म से 
वो भी ग्रीष्म ना अब आऐगी 
पानी की बूंद-बूंद को 
भीषण गर्मी में तरसाएंगी 
इन ऋतुओ की अपने गले में 
पहने वो वरमाला था 
बादल मेरे गांव में आया देखा तो रंग काला था 
वीर पुरुषो के जैसी 
सामर्थ्यता थी उसमें 
शस्त्र सासों का था 
अनुराग समाया
प्रलय  कारी रूद्र रूप बनाकर
अबकी बार जब गांव में आया अपने प्रचंड   वाणो से उसने 
मेरे गांव को झील बनाया
बादल मेरे गांव में आया देखा रंग काला था

शीर्षक-कवि हृदय से उद्घोष

[Spoken word]
शीर्षक-कवि हृदय से उद्घोष
संदेश मानवता का सुनाने
मैं लेकर आया भाव 
सहृदय मुझे खेद है 
यदि हो संभाव्य अभाव 
हो संभाव्य अभाव हृदय से हूं क्षमा प्रार्थी 
काव्य की प्रथम पाठशाला का ‌ मैं हूं विद्यार्थी 
छंदों और मात्राओं का भी नहीं ज्ञान जरा सा 
किंतु मन में है असीम
कवि बनने कीअभिलाषा 
उत्सुख हूं कवि बनने को संग है मेरी कल्पना 
नित्य सजाता जिन्हे
वे लौकिक अल्पना 
जो मैंने सजाई मात्र मानव की कल्पना है 
अभिव्यक्ति आदर्शो और मानव की वंदना है 
ध्येय मेरा है प्रेषण संदेश प्रेम का 
मैं पुतला हूं एकमात्र बन्ना राष्ट्र प्रेम 
उद्घोष विश्व शांति का 
मेरी कल्पना का है सार 
वसुधैव कुटुंबकम से निर्मित 
संसार मेरा और मेरा आचार 
 आस्तिक हूं ना फिर भी 
ईश्वर में ध्यान लगाता 
मेरा ईश्वर है मनुज
सबको मैं यही बताता 
मैं नमन करता और कर रहा 
आपके यश का गान 
मात्र मुझे चाहिए आपसे 
आपके इसने का वरदान
इस कविता के लिए स्पोकन वर्ड में रिकॉर्ड करने के लिए एक prompt provide karaen

Sunday, 22 February 2026

​तमन्ना अगर कोई दिल मचलने की करता है,


​तमन्ना अगर कोई दिल मचलने की करता है,
किसी से  किसी मक़ा पर मिलने की करता है।
​हकीकत है ये उस दिल की, 

बनाकर खुद को परवाना,

 चाह जलने की करता है

मोहब्बत में कहा दिल को,

 कभी आराम आया है

मोहब्बत गीत है ऐसा, क

भी हंस के कभी रोके, 

दिल ने गाया है

नादान दिल मोहब्बत का,

 क्यों एतबार करता है 

​तमन्ना अगर कोई दिल 

मचलने की करता है,
किसी से  किसी मक़ा पर

 मिलने की करता है....
मोहब्बत का कभी कहां,

 वो मुकाम  आता है,

गीत मोहब्बत का, 

कहाँ दिल को रास आता है

हकीकत जानकर भी,

मुकरने की कोशिश करता है।

​तमन्ना अगर कोई दिल 
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
 मिलने की करता है।

दिल से बार-बार पूछा

 उसकी 'ख्वाहिश' क्या है?

बेवफा ने मुस्कुरा के कहा

आज़माइश क्या है?
​मोहब्बत की है,

 कोई गुनाह तो नहीं किया मैंने,
मुझे नादान कहता है

 खुद ही नदानी करता है 

मैंने इसे रोकना चाहा 

आंखें मुझको दिखाता है 

इसे दिलरुबा के ख्वाब

देखने में मजा आता है 

ये सौदागर है 

सौदे का 

इजहार करता है

तेरी चाहत इसको, 

ये तेरा इंतजार करता है 

 हसरत है इसे

 कभी तो तुम इसे 

बुलाओगी

बड़ा ज़िद्दी है ये दिल, 

बड़ी-बडी हसरते करता है।

यह चाहत में अपना 

वक्त बर्बाद करता है

तमन्ना जब भी कोई दिल

 मचलने की करता है,

किसी से किसी मक़ा पर

 मिलने की करता है।

 यूँही तो कोई आरज़ू

 दिल में पैदा नहीं होती,

किसी को पाने की चाह

 कभी रुसवा नहीं होती।

जब ये चाह बन जाती है 

 अरमान एक दिल का 

 नादान दिल हर हद से

 गुज़रने की ज़िद करता है।
​तमन्ना जब भी कोई 

दिल मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर

 मिलने की करता है।

देख कर दिल को लगा

 बड़ा मायूस है ये,
हकीकत से फिर भी,

मुकरने की कोशिश करता है।

​तमन्ना जब कोई दिल 

मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर 

मिलने की करता है।

हकीकत है यह उसे दल की

बनाकर खद को परवाना 

चाह जलने की करता है



"प्रेम की गंगा: मेरा गाँव"

एक गांव है मेरे सपनों का 

नित लगता मेला अपनों का 

कुछ भूले बिसरे मिल जाते हैं 

जिन्हें देखकर हम हर्षाते हैं 

 एक गांव है मेरे सपनों का.....

इस मेले में एक उपवन है 

जिसमें फूल लगे हैं शांखो पर 

कुछ भवरे उन पर गुंजार रहे 

कुछ तितलियां में मडराती उन पर 

एक गांव है मेरे सपनों का 

मेरे मेले में एक नदियां है 

जो दूर कहीं तक जाती है 

कुछ अनकही बातें ऐसी हैं 

जो मुझे सुनाती जाती है 

एक गांव है मेरे सपनों का 

मेरे मेले में ना कोई अकेला है 

सब साथ साथ ही रहते हैं 

सब दुख सुख के साथी हैं 

अब अपना मुझको कहते हैं 

एक गांव है मेरे सपनों का 

नित्य नूतन किरणों से चमकता है 

अवर्णित है यह बातों में 

यह गांव बसा मेरी आंखों में 

 कुछ है न्यारा ये लाखों में

एक गांव है मेरेसपनों का

जहां मानवता का वास है जहां हर ओर सिर्फ प्रसन्नता है,
जहाँ स्वार्थ नहीं फलते के फूलते, सिर्फ बहती  प्रेम की गंगा है
एक गांव है मेरे सपनों का

Saturday, 21 February 2026

शान‌ इंसान की

शान इंसां की अल्लाह ने रखी, 
दौलते ग़म जहां में बख़्शा,
दिले मोहब्बत जहां में बख़्सी।
एक नेक इंसान ने खुदा से यह पूछा, 
ऐ खुदा मुझको इतना बता दे, 
इस जहां में और क्या क्या होगा
 कब मिटेगी यह दुनियादारी, 
दिन कयामत का कौन सा होगा।"
खुदा कहने लगा,
 "फ़क्र है मुझको ऐ बंदे तुझ पे, 
तूने पूछा है जो सवाल मुझसे, 
अब जवाब तू अपना सुन ले,
 दिन कयामत का तू याद कर ले।
दरो- दीवार से आवाज आए 
लड़कियां आबरू अपनी मिटाए
बिके गया  और सच्चाई
समझा मेरे बंदे तुझपे कयामत आई 
फरमान सुनाया अल्लाह ने 
इंसान की रक्खी अल्लाह ने 
इंसान ने पूछा मलिक क्या,
 तेरी यह दुनिया यूंही तबाह होगी 
क्या तेरी इस दुनिया पर इनायत नहीं होगी 
तू अगर चाहे तो समुंदर को भी सुखा
सकता है
तू अगर चाहेतो मेरे मौला पानी में आग लगा सकता है 
फिर तेरा नेक बंदा बेवजह इस आग में झुलसेगा
क्या करम  अपने बंदों पर मालिक नहीं करेगा 
खुदा ने फरमाया मैंने तुझे मोहब्बत के लिए बनाया है 
तूने तो नफरत को गले लगाया है 
फिर क्या हक है तुझे कि तू आज में कयामत की न जले 
और यह दुनिया यूं ही चलती चले 
मलिक सभी बंदे तो तेरे शैतान है नहीं कुछ भटक गए हैं वह नादान है इंसान है 
उन पर भी तुझे रहम फरमाना होगा 
अपने बंदों को सही राह पर लाना होगा 
  खुदा ने कहा जब वह मेरे सजदे में सर अपना झुका लेंगे 
है हकीकत यही हम उन्हें अपना बना लेंगे 
अगर वह नेकी  के रास्ते पर न चले 
कयामत को तो आना ही है
जो देख बंदे हैं उन्हें जन्नत अदा की जाएगी 
जो शैतान है उन्हें दोजक की आग में जलन होगा
ए खुदा बंदे हैं तेरे तेरी इनायत चाहते हैं 
हम तेरे सजदे में हैं तेरी रहमत चाहते हैं 
तू हमें अपना बना हम तेरी राह चले 
हमारी नेकी और तेरी रहमत से 
तेरी मौला यह कयामत त तले
 मेरे मौला यह कयामत टले
सजदे में सर झुकाया इंसा ने
तौबा की उसने हर गुनाह से 
इंसान से  मोहब्बत बांदा किया
यु रमजान का महीना उसने पूरा किया 
आई ईद तो मिले एक दूसरे से गले 
काश यह कयामत इसी तरह से टले
जकात और नवाज का पैगाम न गया जाएगा 
चले नेक की राह पर अगर हम 
तो दिन कभी कयामत का नहीं आएगा 
मां भी बेटे को लोरी मोहब्बत की सुनाएगी 
दुनिया में यूं ही मोहब्बत बढ़ती जाएगी


शान इंसा की अल्लाह ने रखी

शीर्षक: मोहब्बत और कयामत (एक रूहानी संवाद)

​[प्रारंभ: धीमी और गूँजती हुई आवाज]

​शान-ए-इंसां की खुदा ने, क्या खूब रखी है,

दौलत-ए-ग़म भी बख़्शी, और मोहब्बत भी दी है।

​[धैर्य और भावुकता के साथ]

​इक नेक बंदे ने, मालिक से ये सवाल किया,

"ऐ खुदा! इस जहाँ का, क्या अंजाम होगा भला?

कब मिटेगी दुनियादारी? कब ये मंज़र बदलेगा?

कौन सा वो दिन होगा, जब कयामत का सूरज ढलेगा?"

​[जवाब में खुदा की आवाज़ - गूँज और गहराई के साथ]

​रब ने फ़रमाया: "बंदे! फ़क्र है तुझपे मुझे,

सुन ले अब जवाब मेरा, जो पूछा है तूने मुझसे।

याद कर ले वो निशानियाँ, जब बुराई आम होगी,

हया मिटेगी आँखों से, और रुसवा शाम होगी।

​जब बिकने लगेगी सच्चाई, और ईमान खो जाएगा,

समझ लेना मेरे बंदे, तब कयामत का वक्त आएगा।"

​[इंसान की पुरज़ोर विनती - तड़प भरी आवाज़]

​बंदा बोला: "ऐ मौला! क्या दुनिया तबाह होगी?

क्या तेरी इस मख़लूक पर, कोई इनायत नहीं होगी?

तू चाहे तो दरिया सुखा दे, पत्थर में आग लगा दे,

तू चाहे तो अपने बंदों की, बिगड़ी तकदीर बना दे।

​क्या तेरा नेक बंदा भी, इस आग में झुलसेगा?

क्या तू अपने बंदों पर, अब रहम नहीं करेगा?"

​[खुदा का पैगाम - शांत और प्रभावशाली]

​खुदा ने कहा: "बंदे! मैंने तुझे मोहब्बत के लिए बनाया,

पर तूने तो नफ़रत को, अपना रहबर बनाया।

फिर क्यों न जले ये दुनिया, जब दिल ही काले हैं,

नफ़रत की इस आग के, सब खुद ही हवाले हैं।"

​[तौबा का मंज़र - धीमी और रुआँसी आवाज़]

​बंदा रोकर पुकारा: "सब तो शैतान नहीं हैं,

कुछ भटक गए हैं रास्तों से, वो नादान इंसान हैं।

रहम फरमा उन पर भी, उन्हें सही राह पे लाना,

भटके हुए बंदों को, फिर अपने गले लगाना।"

​[उम्मीद की किरण - बुलंद आवाज़]

​"जब वो मेरे सजदे में, अपना सर झुका लेंगे,

सच तो यही है बंदे, हम उन्हें अपना बना लेंगे।

जो नेक राह पे चलेंगे, उन्हें जन्नत अता होगी,

जो नफ़रत को पालेंगे, उन्हें दोज़ख़ की सज़ा होगी।"

​[उपसंहार: ईद और मोहब्बत का संदेश]

​झुक गया सजदे में इंसान, तौबा की हर गुनाह से,

वादा किया मोहब्बत का, हटा हाथ गुनाह से।

रमज़ान की बरकत से, जब दिल साफ़ हुए सबके,

गले मिले जब ईद पे, तो साए छँटे नफ़रत के।

​नवाज़ और ज़कात का पैगाम, जब तक घर-घर जाएगा,

चलेंगे नेकी की राह पे, तो कयामत का दिन नहीं आएगा।

माँ बेटे को मोहब्बत की, वो लोरी सुनाएगी,

और इस जहाँ में बस, खुदा की मोहब्बत बढ़ जाएगी।

मां में ही वह रुह बनाई थी मैने

जिसमें अपनी जन्नत भी समाई थी

मैने

आज वही मां शर्मसार होती है

जब उसका लाडला इंसानों का खून बहता है

वो मां तो  हर एक में बेटा देखती हैं

क्योंकि वह चश्म भी मैंने उसे अदा की है

इस जहां में एक सूरज एक चांद एक धरती बनाई मैंने

और उसमें अपनी खुदाई भी समायी मैंने।

मगर अफसोस हर रोज लहू लुहान यह धरती होती है 

सभी मजहबों की रुह तो यही धरती होती है 

अमन और सुकून से सभी को साथ लेना है

बड़ी जालिम फितरत निकली इंसान की

उसे तू जहांन लेना था

इसी फितरत से आज इसमें कम पर पहुंचा है 

अमन और सुकून का मेरा पैगाम उसे रास नहीं आया है 

वह दिन दूर नहीं जबअब कयामत होगी

मगर जब तक जिंदा है मां की मोहब्बत इनायत होगी











"

मेघा मेरी अटरिया आना

[Intro: Haunting Sitar alap with distant rain and thunder sounds]

[Chorus: Emotional & Slow]

मेघा मेरी अटरिया आना

मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना

मेघा मेरी अटरिया आना...

[Verse 1: Low-pitched, Melancholic]

छूट गई मोरी सखियां सारी

राह तकते बीती रैना सारी

सूख गया नैनो का पानी

कुछ तो आस बंधाना...

मेघा मेरी अटरिया आना

[Instrumental Break: Soulful Sarangi Solo]

[Verse 2]

प्यासी धरती, प्यासे नैना,

बाट जोहते बीते रैना,

टूट गए हैं आस के मोती

सुखद स्वप्न दिखलाना...

मेघा मेरी अटरिया आना

[Chorus: Slightly Intense]

मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना

मेघा मेरी अटरिया आना...

[Verse 3: Deep Emotion]

अंगारे सी तपती धरती,

पिया बिन मैं हर पल मरती,

शीतल अपनी बूंदे बरसा कर

अगन मेरी मिटाना...

[Bridge: High-pitched Alap, Building Intensity]

बिन सजना बैरन ये रातें

मोहे सपने सजना के आते

हर रात नींद से उठाते

आग तन मन में लगाते...

[Verse 4: Soft & Breathu]

सपनों में साजन के खोई

बिन आंसू के आंखें रोई

क्यों लगती सुखद दुख की पीड़ा

टूटत तार बजत है वीणा...

[Outro: Climax with Vocal Alap]

तू प्रेम मल्हार सुनाना...

मेघा मेरी अटरिया आना

मुझे बिरहन का जीवन पतझड़...

[Fading Sitar solo, rain sounds dying out]

[End]




मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...

 छूट गई मोरी सखियां सारी
 राह तकते बीती रैना सारी 

सूख गया नैनो का पानी

 कुछ तो आस बंधाना

मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...

 प्यासी धरती, प्यासे नैना,
बाट जोहते बीते रैना,
 टूट गए हैं आस के  मोती
सुखद स्वप्न दिखलाना

मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...


अंगारे सी  तपती धरती,
पिया बिन मैं हर पल मरती,
शीतल अपनी बूंदे बरसा कर
अगन मेरी  मिटाना

मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...


बिन सजना बैरन ये रातें

मोहे सपने सजना के आते

हर रात  नींद से उठाते

 आग तन मन में  लगाते

मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...

सपनों में साजन के खोई

बिन आंसू के आंखें रोई

क्यों लगती सुखद दुख की पीड़ा

टूटत तार बजत है वीणा

 तू प्रेम मल्हार सनाना

मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...


Friday, 20 February 2026

नित नई उड़ानें भरने को

नित नई उड़ानें भरने को

 आतुर जो हृदय रहता था,

 वह कहता है बस और नहीं। 

नहीं गंतव्य भाया मुझे,

 मैं थक कर अब चूर हूँ। 

क्या कहूँ कि अब मजबूर हूँ,

 हर पथ एक सा लगता है, 

सब कुछ अनजाना लगता है

 किस ओर बढ़ूँ और क्यों कर मैं, 

जब छाया भी अपनी धुंधली सी लगती है, कुछ नयापन नहीं लगता है,

 सब साथ रहे, सब साथ में हैं, 

कोई साथ नहीं यह भूला ना लगता है,

 मन के उल्लास को खोकर भी

 क्या जीवन हर्षित होता है।

ना फसल बोई, ना लहराई, 

ऐसा भी क्या कभी होता है। 

किंचित नहीं दोष इसमें मेरा कोई,

यह माया है सब इस जग की।

जिसमें हर अपना बेगाना खोता है

बस कुछ पल दिल रोता है

आओ कुछ और बात करें 

हम सपनों में फिर एक रात करें 

फिर भर में जब हम जागेगे 

कल पुर्जो से इधर-उधर भागेंगे 

कोई नहीं नया एहसास होगा 

यह प्रभात भी नहीं नया होगा 

व्यथा  की गाथा गुथ जाएगी 

बस यूं ही उम्र ढलती जाएगी 

अतीत की कहानी नई नहीं होगी

अपना गंतव्य पहचाना सा है 

जिसे अपना मैंने समझा था 

वो सब तो अंजाना सा है 

एक नई रहा एक नया बसेरा

जाने कहां अब होगा मेरा

उपवन में जब फूल खिलते हैं 

कुछ साखों पर ही मुरझा जाते हैं 

उनका अपना प्रारब्ध यही 

बस उपवन को महकाते हैं 

मैं उपवन नहीं एक पुष्प ही हूं 

जो इसी अर्थ यहां पर आया है 

नहीं पाने की अभिलाषा कोई 

अपना सर्वस मैंने लुटाया है।

फिर भी हृदय में संतुष्टि है 

यह हृदय भी मुस्कुराता है 

है सुगंध बसी इसमें मानवता की 

इसी मानवता को वह चाहता भी है 

मानवता के पथ पर चलते चलते 

थक कर कहीं रुक जाऊंगा 

उत्साह उल्लास  जगेगा जब-जब

मैं गीत  मानवता के ही गाऊंगा

कैसा है और है कहां

कैसा है और है कहां हमने ना देखा प्यार को।
जो हमारे दिल में रहता ढूंढते दिलदार को। 
लिखने वाले ने नसीब लिख दिया कुछ इस तरहा। 
कोई खुशी ना रह सकी पहलू में दिन चार को। 
उसकी बेरुखी से हम इस कदर मायूस थे
 देखते रहे धूल में मिलते हुए अपने हर अरमान को
ये जाल किस्मत ने बिछाया इल्जाम क्यों तुझको दूं 
 बेहतर होता अगर तू समझता मेरे जज्बात को 
धड़कने थमने को है अब मरे और तब मरे। 
देखने भी ना आ सका अपने गमे बीमार को 
पतझड़ों के बाद फिर आऐगी बहारे एक बार। 
इसलिए भुला नहीं हूं कातिल अपने यार को।





Thursday, 19 February 2026

आज फिर आग फिज़ाओं से बरसती है,

आज फिर आग फिज़ाओं से  बरसती है,

उम्मीद दो बूँद पानी की, क्यों कर है।

मेरे वतन की मिट्टी है पसीना भी मैंने बहाया है

फिर रोटी की अपनी अपनी यह मनमानी क्यों कर है

जब दौर ही नफ़रतों का है  हमसाया,

बात मासूम जिंदगानी की क्यों कर है।

मछलियाँ समझ न सकीं  इतना,

दरिया का रुख तूफ़ानी क्यों कर है।

ये जहाँ मेरा है, तेरा है, हम सबका है,

अकेले इसे पाने की तुझे दीवानगी क्यों कर है।

ज़माना भी यही था, वो भी यहीं था पर अब नहीं,

मेरी कौम अब तक इस तरह चुप क्यों कर है।

मज़हब की बेड़ियों में ही जब बँधकर रहना है,

ज़हन में आज़ादी की ये दीवानगी क्यों कर है।

मेरी ज़िंदगी खरीद कर तुम ख्वाब दिखाते हो,

फिर चंद साँसों की मुझे मोहलत क्यों कर है।

हाथों में खंजर और लव पर तुम्हारे दुआएं है 

इंसान  मैं भी हूं मुझ पर इतनी मेहरबानी क्यों कर है?

धूप का सफर है मंजिल है, पर साया साथ नहीं

मेरे और उसके बीच में इतना फासला क्यों कर है

परिंदों की चहक बता रही है वो लौट आए हैं

मगर इन घरों में अब तक बिरानगी क्यों कर है

अपनी हरकतों से ,वो शैतान के सानी हैं,

उनके धड़ पर चेहरा इंसानी क्यों कर है।

अज़ाब तुझ पर है मासूमों का खून वहाया तूने

उसने तुझे जन्नत का ख्वाब दिखाया क्यो कर है



















 

Wednesday, 18 February 2026

युगजयी तर्कश

[Intro - धीमा और गंभीर संगीत, बाँसुरी की धुन]

​[Verse 1]
उन्नति के चरम शिखर से, मनुज धरा पर आता है।
पतन और उत्थान से, सदियों से उसका नाता है।
विश्व धरा पर मानव का उद्गम, नहीं कोई चमत्कारी माया है।
मानव होगा तब मानव है, वह नहीं अंतरिक्ष से आया है।

​[Verse 2]
अपने ही करों से उसने, विश्व धरा कश्रृंगार किया।
मानव को कालजयी बनाया, सृजनता का उपहार दिया।
उसके सृजन की गाथा को, हर युग का सम्मान मिला,
उसके सृजन की गाथा को, हर युग का सम्मान मिला,
किंतु प्रतीत हुआ यह, वह मानवता से अनभिज्ञ मिला।
किंतु प्रतीत हुआ यह, वह मानवता से अनभिज्ञ मिला।
​है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
उत्कृष्ट ये गुण प्रकृति का, स्वयं अभी तो है अलग-थलग।

परिवर्तन चक्र न रुकने पाता, निर्वात गति बहता जाता,
जहाँ धीर गंभीर गहरे सागर हों, पर्वतराज हिमालय बन जाता।

​[Verse 3]
अपने सहज गुणों से प्रकृति, नित नई सीख सिखाती है।
निष्कपट, निर्मल, निश्चल, उमंग उल्लास आनंद बढ़ाती है।


यह प्रकृति काल रूप है, यह देवों का प्रतिरूप है।
नित्य निरंतर चिरंजीवी है, सुख-दुख विरक्त एक स्वरूप है।
[Bridge - तनावपूर्ण और चेतावनी भरा संगीत]
मनुष्य में भी वास इसी का, वह रहा सदा दास इसी का।
स्वामी बनने की अभिलाषा में, सदा करता उपहास इसी का।


जब विचार शून्य मस्तिष्क होते, तब मानवता अश्रु बहाती,
जब विचार शून्य मस्तिष्क होते, तब मानवता अश्रु बहाती,
प्रलय रूपी अंधियारा छा जाता, मनुज तेरी सृजनता खो जाती।
प्रलय रूपी अंधियारा छा जाता, मनुज तेरी सृजनता खो जाती।
​[Chorus Repeat - उच्च ऊर्जा के साथ]
है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
उत्कृष्ट ये गुण प्रकृति का, स्वयं अभी तो है अलग-थलग।


परिवर्तन चक्र न रुकने पाता, निर्वात गति बहता जाता,

जहाँ धीर गंभीर गहरे सागर हों, पर्वतराज हिमालय बन जाता।
​[Outro - तीव्र और गंभीर चेतावनी]
धरा पर अब तक उसने पीयूष स्रोत बरसाया है,
धरा पर अब तक उसने पीयूष स्रोत बरसाया है,
दुर्बुद्धि मनुज तुझे ना वह रास आया है।
दुर्बुद्धि मनुज तुझे ना वह रास आया है।
सावधान! संधान संहारक वाणों का,
सावधान! संधान संहारक वाणों का,
काल देव के मन में आया है... काल देव के मन में आया है।
काल देव के मन में आया है... काल देव के मन में आया है।



वो गरीबों की मलिन बस्ती

[spoken word]
जहाँ मैं खड़ा था, वह गरीबों की बस्ती थी।
 मैंने देखा एक तरफ तंग परस्ती
 को, 
दूसरी तरफ बेख्याली सी मस्ती थी।
 वो गौर वर्ण का बालक जो मेरे सामने खड़ा था, 
मासूम भोला बड़ा था।
 कुछ काले गड्ढे उसकी आँखों के,
 नीचे थे पड़े। 
 लगता था जैसे हफ्ते में चार फाके हो पड़े। 
मैंने जेब से चॉकलेट निकाली
 और उसकी ओर बढ़ाई। 
वह नहीं समझा कि,
 यह थी बच्चों की प्रिय चीज। 
वास्तव में यह तंग परिस्थिति भी है अजीब 
 इसका शिकार एक वृद्ध दूसरी ओर बैठा हुआ रहा था खास, 
अटक अटक के चल रही थी,
 उसकी साँस।
मैंने पूछा बाबा कोई दवाई ली 
वह बोला कहां से लाऊं दवाई 
चार वक्त से रोटी नहीं खाई 
मैंने जेब से पर्स निकाला,
 सौ का नोट उसे बढ़ाया। 
वह बोला भीख नहीं चाहिए,
 घर में जवान बेटा है, 
कोई नौकरी दिलाइए।
 इतने में उसका जवान बेटा,
 बाहर से कहीं से आया।
मुझे खड़ा देखा तो सकपकाया। 
उसके हाथ में थोड़ा सा आटा था।
 सारी बस्ती में मौत का सन्नाटा था। 
उस मलिन बस्ती में इच्छाएँ मौन थीं, 
कोई नहीं जानता था खुशियाँ कौन थीं।
 वह जानते थे वोट को, 
पहचानते थे सौ के नोट को। 
इससे वर्ष में 500 की आय उन्हें होती है
 जो उनकी दो माह की रोटी है।
 कुछ सस्ता गल्ला सरकार उन्हें देती है।
 नेता आते हैं और आश्वासन देते हैं, गरीबी हटाएँगे।
नेता आते हैं आश्वासन देते हैं
गरीबी हटाएंगे। 
न जाने इस तंगपरस्ती और मस्ती की बस्ती,
कौन से शहर में ले जाकर बसाऐगे।

मनुज भेष में छुपाया दानव

मानवता का रक्त बहाता,
 शिशुओं को अनाथ बनाता। 
मनुज भेष में छिपा यह दानव,
  मनुज का हत्यारा है, 
कोई नहीं है ईश्वर इसका
सना रक्त से मुख है इसका।
भय आतंक के परिधान में लिपटा,
इसे दर्शन प्यारा है।
 शवों का व्यापार चलाता, 
दुकान कफ़न की इसने खोली।
 एक ही भाषा बोल रहा ये
 चला चला बंदूक की गोली।
 अब तक की इसने अपने मन की, 
खेली होली में रक्त की होली। 
रक्त पिपासु इस नरपिशाच को,
 रंग लाल ही प्यारा है। 
कठिन परिश्रम से घर हम जो बनाएँ, उनमें है यह आग लगाये।
 झुलस रहे हैं गात हमारे, 
बनकर वैद्य मरहम ये लगाए।
 जानो इसकी माया है कैसी,
 काला मन सूरत भी वैसी।
 दिखे न जिसमें निज कर भी अपने,
 यह वह अंधियारा है। 
भ्रमित हृदय, भ्रमित मस्तिष्क इसका, सगा नहीं कोई मनुज है इसका। 
छीन के रोटी और लंगोटी, 
उदर भरा है हर दिन इसका। 
मनुज कर्म कैसा करते हैं, 
घृणा अबोध हृदय में भरते हैं।
 आतंक के इन दानव का, 
अंत नहीं क्यों अब करते हैं। 
हम हैं मनुज और ये 
घोर शत्रु हमारा है। 

जाग सत्ता के चौकीदार

जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग,
जल रही है चिताए फिर भी नहीं चिंताए 
अब तो जाग।
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग। 
सड़कों पर भूख से बच्चे रोते 
रोज ही अपनी जान है खोते
यौन शोषण शिशुओं का होता 
 देश का नेता फिर भी सोता 
सड़कों पर भूख से बच्चे रोते 
रोज ही अपनी जान है खोते
यौन शोषण शिशुओं का होता 
 देश का नेता फिर भी सोता 
मां भारती के भाल को लगता दाग 
मां भारती के भाल को लगता दाग 
अब तो जाग 
जाग सकता की चौकीदार अब तो जाग। 

भाई भाई से करे लड़ाई 
सत्ता ने ऐसी आग लगाई 
वोटों का खेल है ये सारा 
राज से राज करे लड़ाई 
भाई भाई से करे लड़ाई 
सत्ता ने ऐसी आग लगाई 
वोटों का खेल है ये सारा 
राज्य से राज करे लड़ाई 
बिखर रहा बट रहा ये समाज 
अब तो जाग
बिखर रहा बट रहा ये समाज 
अब तो जाग
जाग सता के चौकीदार अब तो जाग
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग,
जल रही है चिताए फिर भी नहीं चिंताए 
अब तो जाग।
मजहवो  में खेल है होता
राष्ट्र में  मजहब को सिर पे ढोता
कैसी इसने  फसल उगाई 
जनता में बीज नफरतो के बोता
मजहवो  में खेल है होता
राष्ट्र में  मजहब को सिर पे ढोता
कैसी इसने  फसल उगाई 
जनता में बीज नफरतो के बोता
हो रही है इंसानियत आज अब तो जाग 
हो रही है इंसानियत आज अब तो जाग 
जाग सत्ता की चौकीदार अब तो जाग 
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग। 
अब तो जाग 
हर तरफ उठते आग के शोले 
मुंह से अपने कोई कुछ तो बोले 
कौन है जिसने यह आग लगाई 
आतंक का यह भेज कोई खोलें
हर तरफ उठते आग के शोले 
मुंह से अपने कोई कुछ तो बोले 
कौन है जिसने यह आग लगाई 
आतंक का यह भेज कोई खोलें
आतंक की नजर पर चढ़ा विकास 
अब तो जाग 
आतंक की नजर पर चढ़ा विकास 
अब तो जाग 
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग। 
अब तो जाग 
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग 
कैसा ये लव जेहाद  का झगड़ा 
सत्ता का कोई खेल है तगड़ा 
हम दो और हमारे चौबीस कहते 
वदहाली और तगहाली में रहते 
कैसा ये लव जेहाद  का झगड़ा 
सत्ता का कोई खेल है तगड़ा 
हम दो और हमारे चौबीस कहते 
वदहाली और तगहाली में रहते 
भीख मंगा बना समाज अब तो जाग
भीख मंगा बना समाज अब तो जाग
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग,
जल रही है चिताए फिर भी नहीं चिंताए 
अब तो जाग।
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग। 
अब तो जाग 
बनती मूर्ख जनता ठगी रह जाती 
सांसद जी की सूरत  ना देख पाती 
पांच साल बाद फिर सांसद जी आते
पांच साल के लिए फिर जनता को ठग जाते
एक ही रहता जनता का कल और आज 
अब तो जाग
जाग सत्ता के चौकीदार अब तो जाग। 
अब तो जाग 
संसद में देश का पैसा पानी सा बहता 
सांसद हमारा खड़ा सड़कों पर रहता
जनसंख्या पर कानून बनाओ 
कोई नहीं है जो ऐसा कहता 
जो जनसंख्या पर सवाल उठाते
चुनकर कहां द्वारा आते
बेरोजगारी का देश ने पहना ताज 
अब तो जाग 
जागसत्ता के चौकीदार अब तो जाग
जल रही है चिताएं फिर भी नहीं चिंताएं अब तो जाग



Tuesday, 17 February 2026

॥ वह एक हसीं हसीना थी ॥

[Chorus]

वो एक हसीं हसीना थी,

वो एक हसीन हसीना जी।

दिल उसने मुझसे छीना जी,

मुझे कोई निशानी दी ना जी...

मैं क्या करूँ?

मेरा मुश्किल हो गया जीना जी।

[Verse 1]

जब मेरी गली में आई थी,

वो दुल्हन सी शर्माई थी।

उसने नज़र नहीं उठाई,

वो एक हसीं हसीना जी।

जब मेरी गली में आई थी,

वो दुल्हन सी शर्माई थी।

उसने नज़र नहीं उठाई,

वो एक हसीं हसीना जी।

[Chorus]

दिल उसने मुझसे छीना जी...

[Verse 2]

जब बाग में थी वो मुझे मिली,

मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।

उसकी बातें मिश्री की डली,

वो एक हसीं हसीना थी।

जब बाग में थी वो मुझे मिली,

मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।

उसकी बातें मिश्री की डली,

वो एक हसीं हसीना थी।

[Chorus]

दिल उसने मुझसे छीना जी...

[Verse 3]

जब मेरे पास से आई थी,

गुलाबो की महक समाई थी।

उसकी महक बसी थी सांसों में,

वो थी एक हसीना लाखों में।

जब मेरे पास से आई थी,

गुलाबो की महक समाई थी।

उसकी महक बसी थी सांसों में,

वो थी एक हसीना लाखों में।

[Chorus]

वो एक हसीं हसीना जी...

[Verse 4]

वो जादू की एक गुड़िया थी,

ये गीत  उसे सुनाया था।

 मन को उसके भी भाया था,

मेरे दिल पर मेरा काबू था,

उसकी चाल में भी एक जादू था।

वो जादू की एक गुड़िया थी,

ये गीत  उसे सुनाया था।

 मन को उसके भी भाया था,

मेरे दिल पर मेरा काबू था,

उसकी चाल में भी एक जादू था।


[Outro: Fast Instrumental Fade Out]

वो एक हसीं हसीना जी...

दिल उसने मुझसे छीना जी...






वह एक हसीं हसीना थी,
वह एक हसीन हसीना जी।
दिल उसने मुझसे छीना जी,
मुझे कोई निशानी दी ना जी...
मैं क्या करूँ?
मेरा मुश्किल हो गया जीना जी।
​अंतरा 1:
जब मेरी गली में आई थी,
वो दुल्हन सी शर्माई थी।
उसने नज़र नहीं उठाई,
वह एक हसीं हसीना जी।
दिल उसने मुझसे छीना जी...
​अंतरा 2:
जब बाग में थी वो मुझे मिली,
मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।
उसकी बातें मिश्री की डली,
वह एक हसीं हसीना थी।
दिल उसने मुझसे छीना जी...



जब मेरे पास से  आई थी
गुलाबो की महक समाई थी 
उसकी महक बसी थी ‌ 
सांसों में। 
वो थी एक हसीनालाखों में 
वो एक हसीन हसीना जी
दिल उसने मुझसे........
वह जादू की एक गुड़िया थी
यह गीत मैंने उसे सुनाया था 
उसके मन को भी यह भाया था
मेरे दिल पर मेरा काबू था 
उसकी चाल में भी एक जादू था
वो एक हसीन हसीना जी
दिल उसने मुझसे .............




Monday, 16 February 2026

आसमा की बुलंदशियों पर छा रहा तिरंगा

​[Intro: Heavy Dhol and Trumpet Fanfare]

​[Chorus]

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

​[Verse 1]

देश के दुश्मन गला अपना घोटने लगे हैं,

ललकार से तिरंगे की कांपने लगे हैं।

कहर उन पर अपना अब ढा रहा तिरंगा,

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।

(Repeat)

देश के दुश्मन गला अपना घोटने लगे हैं,

ललकार से तिरंगे की कांपने लगे हैं।

कहर उन पर अपना अब ढा रहा तिरंगा,

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।

​[Verse 2: Rising Intensity]

नाज है उन्हें उनके एटम बमों पर,

लश्कर के बनाए हुए मानव बमों पर।

बाप एटम का अब बना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

(Repeat)

नाज है उन्हें उनके एटम बमों पर,

लश्कर के बनाए हुए मानव बमों पर।

बाप एटम का अब बना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

​[Verse 3]

जख्म मुंबई के वो काम कर गए हैं,

हिंदुस्तानी दिलों में जुनून भर गए हैं।

राख आतंक को अब बना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

(Repeat)

जख्म मुंबई के वो काम कर गए हैं,

हिंदुस्तानी दिलों में जुनून भर गए हैं।

राख आतंक को अब बना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

​[Bridge: Hard Percussion & Aggressive Tone]

भूल मत करना आतंकी ठेकेदारों,

इल्म मुल्क और अपनी कौम के गद्दारों।

हिदायत गीता कुरान की सुना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

(Repeat)

भूल मत करना आतंकी ठेकेदारों,

इल्म मुल्क और अपनी कौम के गद्दारों।

हिदायत गीता कुरान की सुना रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

​[Verse 4]

जुल्म बहुत सह चुके अब और ना सहेंगे,

बदले अब तुमसे गिन गिन के हम लेंगे।

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।

(Repeat)

जुल्म बहुत सह चुके अब और ना सहेंगे,

बदले अब तुमसे गिन गिन के हम लेंगे।

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।

​[Verse 5]

जनता का राज है ना कोई राज अब चाहिए,

विश्व का जो ताज है वो ताज हमें चाहिए।

एक नया सपना आज दिखा रहा तिरंगा,

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।

(Repeat)

जनता का राज है ना कोई राज अब चाहिए,

विश्व का जो ताज है वो ताज हमें चाहिए।

एक नया सपना आज दिखा रहा तिरंगा,

आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।

​[Verse 6: High Octave Energy]

नयी हुंकार आज भर रहा है तिरंगा,

केसरिया आभा से दमक रहा है तिरंगा।

तिरंगे के कदमों को कोई रोक ना सकेगा,

इतिहास नूतन हर दिन बना रहा है तिरंगा।

(Repeat)

नयी हुंकार आज भर रहा है तिरंगा,

केसरिया आभा से दमक रहा है तिरंगा।

तिरंगे के कदमों को कोई रोक ना सकेगा,

इतिहास नूतन हर दिन बना रहा है तिरंगा।

​[Outro: Grand Finale]

भारत माता का गौरव बढ़ा रहा है मेरा तिरंगा,

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

(Repeat)

भारत माता का गौरव बढ़ा रहा है मेरा तिरंगा,

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।

गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,

अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।

हिंसक शिकारी

[Structure: Repetitive Folk Style]

[Vocal Instruction: Do not sing headings or bracketed text]

[Mood: Dark, Somber, Reflective]


(Verse 1)

खून को खून नहीं पहचाने, कैसी मति गई मारी रे।

खून को खून नहीं पहचाने, कैसी मति गई मारी रे।

एक दूजे की खून की प्यासी, लगती दुनिया सारी रे।

एक दूजे की खून की प्यासी, लगती दुनिया सारी रे।


(Verse 2)

कैसी अनोखी रीत बनाई, जो है सबसे न्यारी रे।

कैसी अनोखी रीत बनाई, जो है सबसे न्यारी रे।

आपा धापी लूट खसोट की, देखो चली बयारी रे।

आपा धापी लूट खसोट की, देखो चली बयारी रे।


(Verse 3)

जिन छप्पर पे फूस नहीं था, उनमें आग लगाई रे।

जिन छप्पर पे फूस नहीं था, उनमें आग लगाई रे।

शैतानों का राज हुआ है, देता मनुज ना दिखाई रे।

शैतानों का राज हुआ है, देता मनुज ना दिखाई रे।


(Verse 4)

स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े, दया से ना कोई नाता रे।

स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े, दया से ना कोई नाता रे।

जिन हृदय में भाव नहीं है, उनका कौन विधाता रे?

जिन हृदय में भाव नहीं है, उनका कौन विधाता रे?


(Verse 5)

खाने को रोटी नहीं है, फिर भी खरीद के गोली लाता रे।

खाने को रोटी नहीं है, फिर भी खरीद के गोली लाता रे।

कितना साहस भरा हृदय में, खून से ना घबराता रे।

कितना साहस भरा हृदय में, खून से ना घबराता रे।


(Verse 6)

लाशों के अंबार लगे हैं, कफन अपने पास ना रे।

लाशों के अंबार लगे हैं, कफन अपने पास ना रे।

साँसें छोटी होती हैं जाती, जीवन की कोई आस ना रे।

साँसें छोटी होती हैं जाती, जीवन की कोई आस ना रे।


(Outro)

प्रेम दया ना पास हमारे, बन गए आज भिखारी रे।

प्रेम दया ना पास हमारे, बन गए आज भिखारी रे।

समाज बना है जंगल आज, हम हैं हिंसक शिकारी रे।

समाज बना है जंगल आज, हम हैं हिंसक शिकारी रे।




खून को खून नहीं पहचाने

 कैसी मति गई मारी रे, 

एक दूजे की खून की प्यासी

 लगती दुनिया सारी रे।

 कैसी अनोखी रीत बनाई

 जो है सबसे न्यारी रे,

 आपधापी लूट खसोट की

 देखो चली बयारी रे।

 जिन छप्पर पे फूस नहीं था

 उनमें आग लगाई है,

 शैतानों का राज हुआ है

 देता मनुज ना दिखाई रे।

 स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े, 

दया से ना कोई नाता रे, 

जिन हृदय में भाव नहीं है

 उनका कौन विधाता रे? 

खाने को रोटी नहीं है फिर भी 

खरीद के गोली लाता रे, 

कितना साहस भरा हृदय में 

खून से ना घबराता रे।

 लाशों के अंबार लगे हैं 

कफन अपने पास ना रहे,

 साँसें छोटी होती हैं जाती, 

जीवन की कोई आस ना रे। 

प्रेम दया ना पास हमारे

 बन गएआज भिखारी रे,

 समाज बना है जंगल आज ,

 हम हैं हिंसक शिकारी रे।

Sunday, 15 February 2026

मेरी मोहब्बत प्यासी रही, यादें तेरी आती नहीं।

​[Intro]

(Pulsing synth with a fast piano melody)

​[Chorus]

मेरी मोहब्बत प्यासी रही

यादें तेरी आती रहीं

रातों में जगाती रही

मेरी मोहब्बत प्यासी रही

यादें सनम तेरी आती रही

​[Verse 1]

चाहत भरे दिल में अरमान थे, हम भी कितने नादान थे,

नहीं जानते थे मोहब्बत है क्या, उल्फत है क्या ये चाहत है क्या।

हम दुनिया मोहब्बत की बसाते रहे, मोहब्बत हमको सताती रहीं

(दोहराएं): हम दुनिया मोहब्बत की बसाते रहे, मोहब्बत हमको सताती रहीं

यादें सनम तेरी आती रही

​[Chorus]

मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही

​[Verse 2]

कई बार सोचा ना मोहब्बत करेंगे, मोहब्बत में उम्र यूं ना तबाह करेंगे

सनम की गलियों से तौबा करी, फिर भी दिल में जिंदा मोहब्बत रही

हमें अपना वजूद बताती रही, यादें सनम तेरी आती रही

(दोहराएं): हमें अपना वजूद बताती रही, यादें सनम तेरी आती रही

​[Chorus]

मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही

​[Bridge]

(Beat drops, music becomes deeper and atmospheric)

दिल की नादानी को भला क्या कहें, उसकी बेरुखी को बुरा क्या कहे

यह फैसला तो उसी को करना था, हम उसके दिल में रहे ना रहे

कुछ उलझी सी अपनी कहानी रही, यादे सनम तेरी आती रही

​[Chorus]

मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही

​[Verse 3]

इन यादों से दामन छुड़ा ना सके, तबाही से दिल को बचा न सके

चुप चुप के आहे भरते रहे, बात दिल की किसी से बता ना सके

ये मोहब्बतें हमें रुलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही

(दोहराएं): ये मोहब्बतें हमें रुलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही

​[Chorus]

मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही

​[Verse 4]

जी मैं सकूँ कोई तो वजह हो, कोई वजह ना सही बस बेवजहा हो

वो कह दे मोहब्बत नहीं है मुझको, खत्म अब तो यह दिल का सिलसिला हो

क्यों अब तक आंखें मिलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही

(दोहराएं): क्यों अब तक आंखें मिलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही

​[Chorus] - (Full Energy)

मेरी मोहब्बत प्यासी रही

यादें तेरी आती रहीं

रातों में जगाती रही

मेरी मोहब्बत प्यासी रही

यादें सनम तेरी आती रही

​[Outro]

(Music fades with drums continuing for a few seconds)

यादें सनम तेरी आती रही...

मेरी मोहब्बत प्यासी रही...

(Echoing...)


कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू

कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

​कभी हंसे तो आए ये आँसू, कभी रोए तो आए ये आँसू

कभी गालों पे बहे ये आँसू, कभी आँचल में समाए ये आँसू

बार-बार आए ये आँसू

कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

​इन आँसुओं की कहानी अजब है, 

इन आँसुओं का फ़साना ग़ज़ब है

अजूबा ही तो हैं ये आँसू, 

बार-बार आए ये आँसू

कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू

​कभी महफिलों के जाम में छलके, कभी ग़ज़ल के सुरों में चमके

आँखों की चमक बढ़ाते ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू

बार-बार आए ये आँसू

​इन आँसुओं का मोल अनमोल है, बड़े सलोने और मीठे इनके बोल हैं

खुद ही लफ़्ज़ चुनते, खुद ही तोलते, दिल का हर राज़ खोलते ये आँसू

कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

​जब दर्द की आँखों से ये बहते हैं, अपनी ही कोई कहानी कहते हैं

जैसे सीप के मोती हों सलोने, ऐसे अनमोल होते हैं ये आँसू

बार-बार आए ये आँसू

कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू

​अगर पोंछ सको किसी के तुम ये आँसू, तो तुम इंसा नहीं फरिश्ते हो

बस 'प्रभात' इतना कहना है तुमसे, सपनों वाली आँखों में न रहने देना ये आँसू

बार-बार आए ये आँसू

कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू

बार-बार आए ये आँसू




"A soulful Indian Ghazal, male vocal with deep emotional resonance, clear pronunciation, nuanced expression (harkat and murki), traditional Soft Tabla rhythm, melodic Harmonium interludes, subtle Acoustic Guitar plucking in the background, Studio Quality, High Fidelity, 80bpm, poignant atmosphere, cinematic soundstage."

हालत बड़े थे उलझे उलझे,हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।


​मतला:
हालात बड़े थे उलझे उलझे, हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।
हम उलझ गए खुद में ही, इन हालातों को सुलझाते-सुलझाते।
​शेर:
इक धोखा दिया खुद अपने को, सच मान लिया इक सपने को।
आंखों से पानी छलक गया, जब तक ये होंठ मुस्कुराते।
​शेर:
रुकते भी तो कैसे रुकते, मंजिल तो दूर हमारी थी।
परछाई साथ नहीं चलती, ये कदम भी तो हैं थक जाते।
​शेर:
परछाई मेरी छोड़ गई, जब शाम ढली और रात आई।
तेरी यादों ने साथ नहीं छोड़ा, वह संग रही और साथ में आई।
​शेर:
हम उलझे रहे ख्यालों में, कुछ अनसुलझे सवालों में।
जिनके जवाब हम ढूंढते रहे, बस हर रोज तेरे ख्यालों में।
​मक़्ता:
'प्रभात' हम खुद ही बहक गए, खुद ही बहक गए।
अपने इन हालातों को बहकाते बहकाते।
​आखरी पंक्ति:
हालात बड़े थे उलझे उलझे, हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।

Saturday, 14 February 2026

तू रोशनी भर ही थी सही

​​​[Intro]

(Emotional and long Sarangi solo. Fades into soft Sitar and Piano.)

[Chorus / Mukhda]

(Vocal enters with deep resonance)

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई,

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई।

अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई,

अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई।

[Verse 1 / Antara]

(Slight emotional peak in vocals)

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।

[Chorus Reprise]

(Soft Tabla rhythm continues)

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई...

[Verse 2]

(Increasing intensity in the Sarangi between lines)

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।

मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,

मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।

[Bridge]

(Slowing down, very minimal music)

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।

[Chorus Reprise]

(Vocal focus on the word 'Roshni')

तू रोशनी भर ही थी...

[Verse 3]

(Gentle and conversational tone)

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।

तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,

तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।

[Outro]

(Fading peacefully)

तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई...

प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर थी छा गई...

(Final fading notes of Sarangi and Sitar)

[End]





[Intro]

[Slow, melancholic Sarangi and soft Piano melody]

[Chorus]

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।

अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई,

अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई।

[Verse 1]

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।

[Musical Interlude]

[Sitar and Tabla bridge]

[Chorus]

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।

[Verse 2]

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसके वास्ता।

मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,

मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।

[Bridge]

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।

[Chorus]

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,

तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।

[Verse 3]

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।

तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,

तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।

[Musical Interlude]

[Flute and Sarangi solo]

[Outro]

तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई,

तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई।

प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,

प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।

[End]




[Intro]
[Soft Sarangi and Piano melody]
​[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई,
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई।
​[Verse 1]
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।
​[Verse 2]
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।
​[Bridge]
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।
​[Verse 3]
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।
​[Outro]
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक झलक थी दिखा गई,
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक झलक थी दिखा गई।
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
​[End]




​[Intro]

[Soft Sarangi and Piano melody]

​[Chorus]

तू रोशनी भर ही थी , जो फलक पर तिरछा गई,

तू रोशनी भर ही थी , जो फलक पर तिरछा गई।

अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई,

अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई।

​[Verse 1]

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,

मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,

तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।

​[Verse 2]

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,

मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।

मैं तेरी इबादत में खडा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,

मैं तेरी इबादत में खडा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।

​[Bridge]

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,

संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।

​[Verse 3]

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,

मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।

तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,

तेरी चाहत अब भी इसमें  रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।

​[Outro]

तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक  दिखा गई,

तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक  दिखा गई,

प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,

प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।

​[End]

Mata Lakshmi Narayan ki aarti


जय माँ! जय माँ!
जय माँ! जय माँ!
मातृ भवानी, नारायण को संग में लाओ,
हमारे घर में, वैभव ज्योत जलाओ।
मैया, वैभव ज्योत जलाओ।
​मात भवानी, घर आँगन हमारा महकाओ,
मैया, महके घर आँगन हमारा।
मिले माँ तेरा ही सहारा, माता अपना वरद हस्त बढ़ाओ।
कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,
मैया, विनती सुनो हमारी।
चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,
मैया, तर जाए दुनिया सारी।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, अमृत रस बरसाओ।
शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी भी आएँ,
मैया, विष्णु जी भी साथ आएँ।
तेरे भक्त के छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,
मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, मंगल गीत गवाओ।
दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,
मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।
अपने इस निर्धन बेटे के, घर में ज्योत जगाओ,
मैया, वैभव ज्योत जगाओ।
भक्ति का वरदान दे मैया, सोया भाग्य जगाओ।
जय माँ भवानी! जय नारायण!
वैभव ज्योत जलाओ!

Mata Lakshmi Narayan ki aarti

[Intro]

(Fast Dholak and Flute music)

जय माँ! जय माँ!

[Chorus - Mukha-da]

मात भवानी, नारायण को संग में लाओ,

हमारे घर में, वैभव ज्योत जलाओ।

मैया, वैभव ज्योत जलाओ।

​मात भवानी, घर आँगन हमारा महकाओ,

मैया, महके घर आँगन हमारा।

मिले माँ तेरा ही सहारा, माता अपना वरद हस्त बढ़ाओ।

[Verse 1 - Antara]

कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,

मैया, विनती सुनो हमारी।

चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,

मैया, तर जाए दुनिया सारी।

आओ माँ खुशियाँ लेकर, अमृत रस बरसाओ।

[Verse 2 - Antara]

शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी भी आएँ,

मैया, विष्णु जी भी साथ आएँ।

तेरे भक्त के छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,

मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।

आओ माँ खुशियाँ लेकर, मंगल गीत गवाओ।

[Verse 3 - Antara]

दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,

मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।

अपने इस निर्धन बेटे के, घर में ज्योत जगाओ,

मैया, वैभव ज्योत जगाओ।

भक्ति का वरदान दे मैया, सोया भाग्य जगाओ।

[Outro - Fast Beats]

जय माँ भवानी! जय नारायण!

वैभव ज्योत जलाओ!

(Music Fade Out)




आओ माँ खुशियाँ लेकर, दूर करो सब अंधियारा,

मैया, दूर करो सब अंधियारा।

संग लाओ नारायण को, महके घर-आँगन हमारा,

मैया, महके घर-आँगन हमारा।

(अंतरा - 1)

कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,

मैया, विनती सुनो हमारी।

चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,

मैया, तर जाए दुनिया सारी।

आओ माँ खुशियाँ लेकर...

(अंतरा - 2)

शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी साथ आएँ,

मैया, विष्णु जी साथ आएँ।

भक्तों के इस छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,

मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।

आओ माँ खुशियाँ लेकर...

(अंतरा - 3)

दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,

मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।

निर्धन के इस सूने घर में, वैभव ज्योत जगाओ,

मैया, वैभव ज्योत जगाओ।

आओ माँ खुशियाँ लेकर, दूर करो सब अंधियारा,






Friday, 13 February 2026

दिल ने कहा तुमसे कहूं,

दिल ने कहा तुमसे कहूं, 
मैंने कहा कैसे कहूं। 
दिल ने कहा निगाहों से कह,
मैंने कहा उसे देखता ही नहीं।
दिल ने कहा फिर भी चाहत है,
मैंने कहा उसकी दिल में इबादत है।
दिल ने कहा तू तन्हा  ही जी 
मैंने कहा उसकी यादें मेरे साथ हैं।
दिल ने कहा तुमसे कहूं, 
मैंने कहा कैसे कहूं। 
दिल ने कहा निगाहों से कह,
मैंने कहा उसे देखता ही नहीं।
दिल ने कहा फिर भी चाहत है,


मैंने कहा उसकी दिल में इबादत है।
दिल ने कहा तू तन्हा  ही जी 
मैंने कहा उसकी यादें मेरे साथ हैं।



नज़्म: इबादत-ए-एहसास
​दिल ने कहा तुमसे कहूं,
मैंने कहा कैसे कहूं।
दिल ने कहा निगाहों से कह,
मैंने कहा उसे देखता ही नहीं।
​दिल ने कहा फिर भी चाहत है,
मैंने कहा उसकी दिल में इबादत है।
दिल ने कहा तू तन्हा ही जी,
मैंने कहा उसकी यादें मेरे साथ हैं।
​[अगले पड़ाव (अशआर):]
​दिल ने फिर एक सवाल किया—
कि जो पास नहीं, वो प्यारा क्यों है?
बिन मंज़िल का ये आवारा सफ़र,
तुझे उम्र भर का सहारा क्यों है?
​मैंने कहा—
मोहब्बत आँखों की मोहताज नहीं होती,
हर हकीकत में रूह की आवाज़ नहीं होती।
उसे पाना मेरा मक़सद ही नहीं,
क्योंकि खुदा को पाने की कोई रस्म-ओ-रिवाज़ नहीं होती।
​दिल ने कहा—
कि वो मशरूफ़ है अपनी दुनिया में,
तू क्यों उसकी यादों में राख होता है?.....
​मैंने मुस्कुरा कर कहा—
इश्क जब इबादत की दहलीज़ छू ले,
तो रकीब का डर भी पाक होता है।
अब न 'मैं' बचा, न 'दिल' की कोई बात रही,
बस उसकी याद की सल्तनत और मेरी सारी रात रही।