Saturday, 28 February 2026
॥ मेरा दिल तेरा हो गया ॥
[Female voice:]मेरा दिल तो कब का सजना तेरा हो गया,
मैं कल रात को सो न पाई, तेरी यादों में सवेरा हो गया।
[Male voice:]तुझसे मिलने की चाहत में जागा, मैं तेरी ओर भागा,
मेरे सनम ये दिल मेरा, ना जाने कब से तेरा हो गया।
[अंतरा १]
[Female voice:]बिन तेरे मुझको करार नहीं आता,तू है हरजाई, तू कभी नहीं आता।तुझे जाने अब क्या हो गया...
[Male voice:] तेरी चाहत मुझे जाने दे, तभी तो मैं आऊँगा,
ओ सनम मेरा तो तेरी राहों में बसेरा हो गया।
[अंतरा २]
[Female voice:]
तुझे परवाह है कहां मेरी
तूने निंदिया चुराई है मेरी
जीना तूने मुश्किल किया है
मेरे दिल में आग लगाई
बेदर्दी तुमने कैसा दर्द दिया है
मेरा दिल जल के अंगारा हो गया
[अंतरा ३]
[Male voice:] तूने समझा है मुझको भंवरा कली कली पे मडराता है
तू मुझको दीवाना कहती है,
समझती है सजना तेरा
अब आवारा हो गया.......
[अंतरा ४]
[Female voice:] ओ सजना ये कैसी मजबरी
बढी है तुझसे दूरी
तुझे पाने की जिद में
बुरा हाल ये मेरा हो गया...
[Male voice:] तू दीवाना समझ या आवारा
मुझे है सब गवारा
रहूंगा बिन तेरे कुवारा
सनम मैं हूं तेरा ये दिल मेरा
अब तेरा हो गया.......
सन्नाटा
मेरे मन के एक कोने का एकांत
इस जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है
मतला:
इस जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है,
दिल भूल से भी मुस्कुराना भूल जाता है।
शेर 1:
ये जिंदगी भी एक खामोश समुन्दर है,
यहाँ दरिया भी आकर बहना भूल जाता है।
शेर 2:
वह जिसने बसाया था कभी सांसों में अपनी,
मोहब्बत में किया हर वादा अपना भूल जाता है।
शेर 3:
बेवजह किस्मत पर इल्जाम लोग लगाते हैं,
तराशे हैं खुद ने ये हालात, बस इंसान भूल जाता है।
शेर 4:
कोई भी दर्द मोहब्बत से बड़ा नहीं होता,
ये खुद की आजमाई हुई बात है, क्यों भूल जाता है।
शेर 5:
दिल अपनी उलझन भी सुलझा न सका कभी,
बदल गए कितने हालात, अक्सर दिल भूल जाता है।
शेर 6:
रास्ता तो एक ही होता है हकीकत में सदा,
जो दो राहे पे खड़ा हो, बस वही भूल जाता है।
मकता:
सुकून दिल और दिमाग में बना कर रख 'प्रभात',
हर मसला सुलझ जाता है, तू क्यों भूल जाता है।
जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,
जिंदगी के इस सफर में लोग अनजाने भी मिलते हैं,
इन अनजानों में कभी ना कभी अपने भी मिलते हैं।
मंजिलें ऐसी भी होती हैं जिनके कोई रास्ते नहीं होते,
फिर भी तन्हा मुसाफिर उनका दम भरते हैं।
बात हौसलों की हो हर शय भी हमराह होती है,
परिंदे तो आसमानोंंं के पार भी उड़ान भरते हैं।
जिंदगी केेे लिए सिर्फ खुशियां ही जरूरी तो नहीं,
फिर क्यों इन गमों को अपने से दूर करते हैं।
इस दुनिया को छोड़िए ये तो तन्हा छोड़ देती है,
हम फिर क्यों किसी कारवां का इंतजार करते हैं।
सफर तो सफर है थक कर रुकना क्योंंं है ,
मंजिलें भी कदम चूमती हैै उनके जो कदम चार चलते हैं।
वक्त है अभी अपनी सफर की तैयारी है,
अपनी तो फितरत है आसमां पर पांव रखते हैं।
जो छोड़कर चले गए मुड़कर भी ना देखा 'प्रभात' हमको
क्यों उनसे मोहब्बत है उनका इंतज़ार करते हैं
Friday, 27 February 2026
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
ढाँचा एक हड्डी का थे वह,
आदर्शों पर रहता था काबू,
सत्य अहिंसा अस्त्र थे उनके,
विश्व पुकारे कह कर बापू।
सत्य का साधक ऐसा,
जो अन्यत्र कहीं ना मिल पाए,
एक युग बीते तभी तो,
एक युग पुरुष धरा पर आए।
सच्ची मानवता का अनुराग,
सदैव हृदय में उनके समाता था,
सुख-दुख पर था निर्वाद राज,
पर पीड़ा पीना आता था।
साधन कैसा हो साध्य का,
बापू को नित्य ध्यान रहा,
बैरी का भी हृदय में उनके
सदा बसा सम्मान रहा।
त्याग व परमार्थ के पथ पर
वह अग्रज बन बढ़ते जाते थे,
शस्त्र सुसज्जित दल भी उनको
निहत्था देख घबराते थे।
नेतृत्व ऐसा था बापू का,
जब जेल में बंद हो जाते थे,
बापू का लेकर नाम नागरिक,
आज़ादी के पथ बढ़ते जाते थे।
ब्रिटिश राज्य का दंभ तोड़ा था
मेरे बापू ने, एक राष्ट्र दिया,
एक दी आवाज़ जनता को मेरे बापू ने।
संगठित समाज का सपना वो,
अधूरा अधूरा सा है अपना वो,
जिसमें भारती मात्र भारती है।
कैसे पूरी हो कल्पना वो
जिस पथ का बापू ने ज्ञान दिया है,
हमने न उसका ध्यान किया।
उच्च वर्ण और मद दौलत का,
तब पग पग पर अभिमान किया।
क्षुद्र मनोरथ के कारण
भ्रष्टाचार खुला हम करते हैं,
ना राष्ट्र और ना राष्ट्रहित, बस अपनी तिजोरी भरते हैं।
संदेश आज राष्ट्र को,
नेतृत्व भी ऐसा देता है,
खुलेआम पैसे को
वह खुदा के जैसा कहता है,
संगठित भाव सरकार का यह,
अपनी ढपली अपना राग।
दिव्य चक्षु से देखो अपने ,
संसद में जूते चलते आज,
प्रतिनिधि बनके जो आते हैं,
चुनाव में पैसा पानी सा बहाते हैं,
अल्पमत की सरकार में वो
करोड़ों में बिक जाते हैं,
धन जन की नित क्षति होती है,
सरकारें आती जाती हैं,
अरबों रुपयों में बनी सरकार
तेरह दिन में गिर जाती है।
महंगाई की मार से जनता है
त्रस्त, न घबराती है।
एक चुनाव गया दूसरा आया,
फिर उसमें लग जाती है।
रामराज की कल्पना
कहीं खो गई और रोटी है।
निर्धनता पल-पल बढ़ती है।
भूखे के पास न रोटी है।
बापू ने जो राज दिया,
वह प्रजातंत्र कहलाता है।
ऐसे प्रजातंत्र को करो विदा,
जिससे बापू का ना कोई नाता।
सपनों की पालकी
:"तू दिल के करीब है
Thursday, 26 February 2026
अपनों ने ला कर छोड़ा बिन बदनाम गलियों में
Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
Intro]
(Haunting Bansuri melody with a deep, echoing reverb)
(Soft strokes of Tabla and Sarangi)
[Verse 1]
अपनों ने ही ला कर छोड़ा इन बदनाम गलियों में
लाज शर्म अब हमने छोड़ी इन बदनाम गलियों में
सच है यारा प्यार है धोखा, मिलता है जिसको ये मौका
खेलता है वह खेल अनोखा, तोड़ देता है दिल भी वो इन बदनाम गलियों में
[Chorus]
संग भी ना परछाई रहती, सब कुछ इतना काला है
सब कुछ मिलता है इन गलियों में, नहीं मिलता उजाला है
टूटती चूड़ी बहते आंसू, संग हमारे रहते हैं
इन बदनाम गलियों में, हम बेबस होकर बहते हैं
[Verse 2]
कोई पकड़ता हाथ यहां पर, कोई दामन से खेल रहा
मासूम दिल तन्हाई में रोता, कोई सहारा नहीं मिल रहा
रोज लगाई जाती है बोली, रोज सजाई जाती डोली
अपनी हर शाम दिवाली, अपनी सुबह होती है होली
[Bridge]
(Sad Violins and slow Cello buildup)
सपने टूटते इन आंखों के इन बदनाम गलियों में...
जिंदगी दम तोड़ती है रोज इन गुमनाम गलियों में...
[Outro/Makta]
मोल यहाँ जज्बात का होता, हर सांस यहाँ इक सौदा है
खुशी पराई सी लगती है इन बदनाम गलियों में
उम्मीद का सूरज डूबा जहाँ, उस मोड़ पे 'प्रभात' अब तुम देखो
वो रोते हैं, हंसता जमाना इन बदनाम गलियों में...
[End]
(Fading sound of a single Ghungroo and Bansuri)
Wednesday, 25 February 2026
जिंदगी का एक सफर
Tuesday, 24 February 2026
भगवान गौतम का सन्मार्ग।
दूसरों के हित में जो
अपना लुटाते हैं सब कुछ,
देके उनको अपनी खुशियाँ
ले लेते हैं उनके दुख।
पथ के भ्रमित जाल में
जो ना फँसते हैं कभी,
रोते हैं पल के लिए
फिर हँसते हैं वही
कर्म ही उनकी पूजा होती
कर्म ही होता सेवा का आधार
उनके ज्ञान के आलोक से
प्रकाशित हो जाता ये संसार
जो नित्य निरंतर हर पलआगे बढ़ते हैं शाश्वत सत्य के अनुगामी होते
वह सत्य के संग साथ -साथ चलते हैं
दूसरों के हित में जो.........
उनकी वाणी से
मानवता का सृजन होता
उत्कृष्ट आदर्श रचे जाते
पवित्र पावन दर्शन होता
सब तत्व समरूप हो जाते
उनके पग रज लेने को
समाज के सब नर नारी आतुर रहते हैं
वे तत्व दृष्टा अग्रज बन सबसे आगे रहते हैं
दूसरों के हित में जो......
वह संभालते मनुष्य तेरा
बनते बिगड़ते कल हो आज
जीवन में प्रभु दर्श की
हो थोड़ी सी आस,
आ जाते दर्शन देने वाले
दर्शन अभिलाषी के पास।
है अमीरी सुख का साधन
और गरीबी मोक्ष है,
गौतम बुद्ध ने बताया है
यह सन्मार्ग।
यह धरा मौन उपवास करेगी
ए सनम तू अजनबी तो नहीं,
Instrumental Intro]
(Soft flute and acoustic guitar melody)
[Chorus]
ए सनम तू अजनबी तो नहीं,
तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।
तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,
बस तुझे पाने का ही अरमान है।
[Instrumental Interlude]
[Verse 1]
दिल मेरा अब मेरे बस में नहीं,
तू जो संग है तो जीवन मेहरबान है।
तेरे बिन ये जहाँ लगता अपना नहीं,
मेरी बेबसी ही मेरा इम्तिहान है।
[Chorus]
ए सनम तू अजनबी तो नहीं,
तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।
तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,
बस तुझे पाने का ही अरमान है।
[Instrumental Interlude]
[Verse 2]
हर जनम में हमारी मुलाक़ात हो,
हम मिलें और बस प्यार की बात हो।
ऐसी कोई सुबह ना हो ज़िंदगी में,
जब मेरे हाथों में ना तेरा हाथ हो।
मैं तेरी जान हूँ, तू मेरी जान है।
[Chorus]
ए सनम तू अजनबी तो नहीं,
तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।
तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,
बस तुझे पाने का ही अरमान है।
[Instrumental Solo]
(Emotional flute solo mixed with strings)
[Verse 3]
ये पवन भी सुनेगी अपनी प्रेम कहानी,
मैं तेरा दीवाना, तू मेरी दीवानी।
ये नदियाँ भी गाएंगी अपने फसाने,
हम जनम-जनम के हैं एक-दूजे के दीवाने।
हमारे प्रेम से ये उपवन भी ना अनजान है।
[Chorus]
ए सनम तू अजनबी तो नहीं,
तुझसे मेरी पुरानी पहचान है।
तू ज़मीं पर रहे या आसमानों में,
बस तुझे पाने का ही अरमान है।
[Outro]
ए सनम... तू अजनबी तो नहीं...
(Music fading out slowly)
राधा कृष्ण की होली
[मुखड़ा (Chorus)]
सात रंगे इस होली के सतरंगा त्यौहार है।
आओ यारों रंग लगाओ आया होली का त्यौहार है।
[क्रॉस लाइन (Bridge)]
ब्रज में धूम है होली की
ब्रज में गूंज होली की
ढोल नगाड़े बजते चारों ओर
मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग
यह कैसी धुम है होली की।
[अंतरा 1 (Verse 1)]
गुलाबी गालों पर मोहन श्याम रंग लगाए
गोप गोपिया होली खेले कृष्णा रास रचाये
राधा के हुए सांवरे राधा सांवरे की होली
ब्रज का हर वासी बोला होली होली होली
राधा कृष्ण की होली, राधा कृष्ण की होली।
ब्रज में धूम है होली की
ब्रज में गूंज होली की
ढोल नगाड़े बजते चारों ओर
मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग
यह कैसी धुम है होली की।
[अंतरा 2 (Verse 2)]
नंदलाल का लाल कृष्णा रंग लाल लेकर आया
राधा को तो कृष्ण का श्याम रंग ही भाया
पिचकारी से कृष्ण ने जब भिगोई राधा की चोली
सखिया बोली सुनो सखी राधा है भोली
ब्रज का हर बासी बोला होली होली होली
राधा कृष्ण की होली, राधा कृष्ण की होली।
ब्रज में धूम है होली की
ब्रज में गूंज होली की
ढोल नगाड़े बजते चारों ओर
मचा हुडदंग बिखरा रंग सभी है दंग
यह कैसी धुम है होली की।
[ग्रुप गायन जोश और उत्साह से हाई टेपो में]
सात रंग की होली होली
सात रंग की होली सतरंगी ये होली
सतरंगी ये होली सात रंग की होली
राधा कृष्ण की होली राधा कृष्ण की होली
Monday, 23 February 2026
Meri shayari
हंस मत, रुक जा, ज़रा सुन तो ले,
हसमत रुक जा, ज़रा सुन तो ले।
हंसने वालों से दुनिया खफा हो जाती है,
क्या-क्या कसीदे पढ़ते हैं ज़माने वाले,
अनजाने में ही हंसना, बड़ी खता हो जाती है।
दुनिया की बंदिशों से ज़रा लम्हे उधार लेता हूँ,
अपनी तन्हाई में बैठ कर, मैं खुद को संवार लेता हूँ।"
हमने तो काँच की मानिंद, खुद को आईना बनाया था,
हमें क्या खबर थी कि सामने पत्थर का साया था।"
"चेहरे की मासूमियत पर, सदके ज़माना हुआ,
भीतर जो पत्थर छुपा था, वो सिर्फ हमारा हुआ।"
हया का चाँद
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
सितारे भी ठहर गए हैं उस नक़ाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
शर्मो हया का पर्दा क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे कि मुस्कुराना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
(Gaayan)
नज़रों ही नज़रों में इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको आजमाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
(Gaayan)
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवा-ए-फिरोज़ होंगे।
(Gaayan)
इज़हार-ए-मोहब्बत सनम तू क्यों नहीं करता है,
क्या मेरी मोहब्बत से तुझे डर सा लगता है?
अगर यही सही है तो यह बहाना छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
(Shayari)
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
(Gaayan)
घूँघट में चाँद जब शर्माए, दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए...
वक्त भी नहीं है अब आने जाने का, ये सिलसिला छोड़ दे।
ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे, हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
"ए चाँद तू शर्माना छोड़ दे,
हमें तड़पाना छोड़ दे,
या तू खुद कह दे हमसे
कि यार अब ये ज़माना छोड़ दे।
सितारे भी ठहर गए हैं उस नकाब के दीदार को,
हवाएँ भी रुक गई हैं सुनने को दिल की पुकार को
शर्मो हया का पर्दा
क्यों तूने किया है,
बेदर्दी सनम तूने
जीना मुश्किल किया है,
अब ये भी कह दे
कि मुस्कुराना छोड़ दे।
अभी तो कली ने खिलने की सिर्फ हसरत दिखाई है,
मगर फिजाओं में महक अभी से कयामत लाई है।
नज़रों ही नज़रों में
इशारे खूब करता है,
इशारों में कहता है
कि हम पर मरता है,
ए महबूब मेरे मुझको
आजमाना छोड़ दे
अभी तो घूँघट की ओट है, और बेकरारी का ये आलम है,
ज़रा सोचो! दिल का क्या होगा, जब वह जलवाा फिरोज होंगे
इज़हार-ए-मोहब्बत
सनम तू क्यों नहीं करता है
क्या मेरी मोहब्बत से
तुझे डर सा लगता है
अगर यही सही है तो
यह बहाना छोड़ दे
ज़ालिम ने उलझन में डाल दिया है एक झलक दिखाकर,
खुदा खैर करे, जब ये शाम मुकम्मल दीदार की होगी।
घूँघट में चाँद जब शर्माए,
दिल मेरा मुझसे कहे,
वक्त कुछ देर और रुक जाए
वक्त भी नहीं है अब
आने जाने का यह सिलसिला छोड़ दे
बड़ी भोली थी वो सोने की चिड़ियां
बादल
शीर्षक-कवि हृदय से उद्घोष
Sunday, 22 February 2026
तमन्ना अगर कोई दिल मचलने की करता है,
तमन्ना अगर कोई दिल मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर मिलने की करता है।
हकीकत है ये उस दिल की,
बनाकर खुद को परवाना,
चाह जलने की करता है
मोहब्बत में कहा दिल को,
कभी आराम आया है
मोहब्बत गीत है ऐसा, क
भी हंस के कभी रोके,
दिल ने गाया है
नादान दिल मोहब्बत का,
क्यों एतबार करता है
तमन्ना अगर कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है....
मोहब्बत का कभी कहां,
वो मुकाम आता है,
गीत मोहब्बत का,
कहाँ दिल को रास आता है
हकीकत जानकर भी,
मुकरने की कोशिश करता है।
तमन्ना अगर कोई दिलकिसी से किसी मक़ा पर
दिल से बार-बार पूछा
उसकी 'ख्वाहिश' क्या है?
बेवफा ने मुस्कुरा के कहा
आज़माइश क्या है?
मोहब्बत की है,
कोई गुनाह तो नहीं किया मैंने,
मुझे नादान कहता है
खुद ही नदानी करता है
मैंने इसे रोकना चाहा
आंखें मुझको दिखाता है
इसे दिलरुबा के ख्वाब
देखने में मजा आता है
ये सौदागर है
सौदे का
इजहार करता है
तेरी चाहत इसको,
ये तेरा इंतजार करता है
हसरत है इसे
कभी तो तुम इसे
बुलाओगी
बड़ा ज़िद्दी है ये दिल,
बड़ी-बडी हसरते करता है।
यह चाहत में अपना
वक्त बर्बाद करता है
तमन्ना जब भी कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
यूँही तो कोई आरज़ू
दिल में पैदा नहीं होती,
किसी को पाने की चाह
कभी रुसवा नहीं होती।
जब ये चाह बन जाती है
अरमान एक दिल का
नादान दिल हर हद से
गुज़रने की ज़िद करता है।
तमन्ना जब भी कोई
दिल मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
देख कर दिल को लगा
बड़ा मायूस है ये,
हकीकत से फिर भी,
मुकरने की कोशिश करता है।
तमन्ना जब कोई दिल
मचलने की करता है,
किसी से किसी मक़ा पर
मिलने की करता है।
हकीकत है यह उसे दल की
बनाकर खद को परवाना
चाह जलने की करता है
"प्रेम की गंगा: मेरा गाँव"
एक गांव है मेरे सपनों का
नित लगता मेला अपनों का
कुछ भूले बिसरे मिल जाते हैं
जिन्हें देखकर हम हर्षाते हैं
एक गांव है मेरे सपनों का.....
इस मेले में एक उपवन है
जिसमें फूल लगे हैं शांखो पर
कुछ भवरे उन पर गुंजार रहे
कुछ तितलियां में मडराती उन पर
एक गांव है मेरे सपनों का
मेरे मेले में एक नदियां है
जो दूर कहीं तक जाती है
कुछ अनकही बातें ऐसी हैं
जो मुझे सुनाती जाती है
एक गांव है मेरे सपनों का
मेरे मेले में ना कोई अकेला है
सब साथ साथ ही रहते हैं
सब दुख सुख के साथी हैं
अब अपना मुझको कहते हैं
एक गांव है मेरे सपनों का
नित्य नूतन किरणों से चमकता है
अवर्णित है यह बातों में
यह गांव बसा मेरी आंखों में
कुछ है न्यारा ये लाखों में
एक गांव है मेरेसपनों का
जहां मानवता का वास है जहां हर ओर सिर्फ प्रसन्नता है,
जहाँ स्वार्थ नहीं फलते के फूलते, सिर्फ बहती प्रेम की गंगा है
एक गांव है मेरे सपनों का
Saturday, 21 February 2026
शान इंसान की
शान इंसा की अल्लाह ने रखी
शीर्षक: मोहब्बत और कयामत (एक रूहानी संवाद)
[प्रारंभ: धीमी और गूँजती हुई आवाज]
शान-ए-इंसां की खुदा ने, क्या खूब रखी है,
दौलत-ए-ग़म भी बख़्शी, और मोहब्बत भी दी है।
[धैर्य और भावुकता के साथ]
इक नेक बंदे ने, मालिक से ये सवाल किया,
"ऐ खुदा! इस जहाँ का, क्या अंजाम होगा भला?
कब मिटेगी दुनियादारी? कब ये मंज़र बदलेगा?
कौन सा वो दिन होगा, जब कयामत का सूरज ढलेगा?"
[जवाब में खुदा की आवाज़ - गूँज और गहराई के साथ]
रब ने फ़रमाया: "बंदे! फ़क्र है तुझपे मुझे,
सुन ले अब जवाब मेरा, जो पूछा है तूने मुझसे।
याद कर ले वो निशानियाँ, जब बुराई आम होगी,
हया मिटेगी आँखों से, और रुसवा शाम होगी।
जब बिकने लगेगी सच्चाई, और ईमान खो जाएगा,
समझ लेना मेरे बंदे, तब कयामत का वक्त आएगा।"
[इंसान की पुरज़ोर विनती - तड़प भरी आवाज़]
बंदा बोला: "ऐ मौला! क्या दुनिया तबाह होगी?
क्या तेरी इस मख़लूक पर, कोई इनायत नहीं होगी?
तू चाहे तो दरिया सुखा दे, पत्थर में आग लगा दे,
तू चाहे तो अपने बंदों की, बिगड़ी तकदीर बना दे।
क्या तेरा नेक बंदा भी, इस आग में झुलसेगा?
क्या तू अपने बंदों पर, अब रहम नहीं करेगा?"
[खुदा का पैगाम - शांत और प्रभावशाली]
खुदा ने कहा: "बंदे! मैंने तुझे मोहब्बत के लिए बनाया,
पर तूने तो नफ़रत को, अपना रहबर बनाया।
फिर क्यों न जले ये दुनिया, जब दिल ही काले हैं,
नफ़रत की इस आग के, सब खुद ही हवाले हैं।"
[तौबा का मंज़र - धीमी और रुआँसी आवाज़]
बंदा रोकर पुकारा: "सब तो शैतान नहीं हैं,
कुछ भटक गए हैं रास्तों से, वो नादान इंसान हैं।
रहम फरमा उन पर भी, उन्हें सही राह पे लाना,
भटके हुए बंदों को, फिर अपने गले लगाना।"
[उम्मीद की किरण - बुलंद आवाज़]
"जब वो मेरे सजदे में, अपना सर झुका लेंगे,
सच तो यही है बंदे, हम उन्हें अपना बना लेंगे।
जो नेक राह पे चलेंगे, उन्हें जन्नत अता होगी,
जो नफ़रत को पालेंगे, उन्हें दोज़ख़ की सज़ा होगी।"
[उपसंहार: ईद और मोहब्बत का संदेश]
झुक गया सजदे में इंसान, तौबा की हर गुनाह से,
वादा किया मोहब्बत का, हटा हाथ गुनाह से।
रमज़ान की बरकत से, जब दिल साफ़ हुए सबके,
गले मिले जब ईद पे, तो साए छँटे नफ़रत के।
नवाज़ और ज़कात का पैगाम, जब तक घर-घर जाएगा,
चलेंगे नेकी की राह पे, तो कयामत का दिन नहीं आएगा।
माँ बेटे को मोहब्बत की, वो लोरी सुनाएगी,
और इस जहाँ में बस, खुदा की मोहब्बत बढ़ जाएगी।
मां में ही वह रुह बनाई थी मैने
जिसमें अपनी जन्नत भी समाई थी
मैने
आज वही मां शर्मसार होती है
जब उसका लाडला इंसानों का खून बहता है
वो मां तो हर एक में बेटा देखती हैं
क्योंकि वह चश्म भी मैंने उसे अदा की है
इस जहां में एक सूरज एक चांद एक धरती बनाई मैंने
और उसमें अपनी खुदाई भी समायी मैंने।
मगर अफसोस हर रोज लहू लुहान यह धरती होती है
सभी मजहबों की रुह तो यही धरती होती है
अमन और सुकून से सभी को साथ लेना है
बड़ी जालिम फितरत निकली इंसान की
उसे तू जहांन लेना था
इसी फितरत से आज इसमें कम पर पहुंचा है
अमन और सुकून का मेरा पैगाम उसे रास नहीं आया है
वह दिन दूर नहीं जबअब कयामत होगी
मगर जब तक जिंदा है मां की मोहब्बत इनायत होगी
मेघा मेरी अटरिया आना
[Intro: Haunting Sitar alap with distant rain and thunder sounds]
[Chorus: Emotional & Slow]
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
[Verse 1: Low-pitched, Melancholic]
छूट गई मोरी सखियां सारी
राह तकते बीती रैना सारी
सूख गया नैनो का पानी
कुछ तो आस बंधाना...
मेघा मेरी अटरिया आना
[Instrumental Break: Soulful Sarangi Solo]
[Verse 2]
प्यासी धरती, प्यासे नैना,
बाट जोहते बीते रैना,
टूट गए हैं आस के मोती
सुखद स्वप्न दिखलाना...
मेघा मेरी अटरिया आना
[Chorus: Slightly Intense]
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
[Verse 3: Deep Emotion]
अंगारे सी तपती धरती,
पिया बिन मैं हर पल मरती,
शीतल अपनी बूंदे बरसा कर
अगन मेरी मिटाना...
[Bridge: High-pitched Alap, Building Intensity]
बिन सजना बैरन ये रातें
मोहे सपने सजना के आते
हर रात नींद से उठाते
आग तन मन में लगाते...
[Verse 4: Soft & Breathu]
सपनों में साजन के खोई
बिन आंसू के आंखें रोई
क्यों लगती सुखद दुख की पीड़ा
टूटत तार बजत है वीणा...
[Outro: Climax with Vocal Alap]
तू प्रेम मल्हार सुनाना...
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़...
[Fading Sitar solo, rain sounds dying out]
[End]
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
छूट गई मोरी सखियां सारी
राह तकते बीती रैना सारी
सूख गया नैनो का पानी
कुछ तो आस बंधाना
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
प्यासी धरती, प्यासे नैना,
बाट जोहते बीते रैना,
टूट गए हैं आस के मोती
सुखद स्वप्न दिखलाना
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
अंगारे सी तपती धरती,
पिया बिन मैं हर पल मरती,
शीतल अपनी बूंदे बरसा कर
अगन मेरी मिटाना
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
बिन सजना बैरन ये रातें
मोहे सपने सजना के आते
हर रात नींद से उठाते
आग तन मन में लगाते
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
सपनों में साजन के खोई
बिन आंसू के आंखें रोई
क्यों लगती सुखद दुख की पीड़ा
टूटत तार बजत है वीणा
तू प्रेम मल्हार सनाना
मेघा मेरी अटरिया आना
मुझे बिरहन का जीवन पतझड़, प्रेम नीर बरसाना
मेघा मेरी अटरिया आना...
Friday, 20 February 2026
नित नई उड़ानें भरने को
कैसा है और है कहां
Thursday, 19 February 2026
आज फिर आग फिज़ाओं से बरसती है,
आज फिर आग फिज़ाओं से बरसती है,
उम्मीद दो बूँद पानी की, क्यों कर है।
मेरे वतन की मिट्टी है पसीना भी मैंने बहाया है
फिर रोटी की अपनी अपनी यह मनमानी क्यों कर है
जब दौर ही नफ़रतों का है हमसाया,
बात मासूम जिंदगानी की क्यों कर है।
मछलियाँ समझ न सकीं इतना,
दरिया का रुख तूफ़ानी क्यों कर है।
ये जहाँ मेरा है, तेरा है, हम सबका है,
अकेले इसे पाने की तुझे दीवानगी क्यों कर है।
ज़माना भी यही था, वो भी यहीं था पर अब नहीं,
मेरी कौम अब तक इस तरह चुप क्यों कर है।
मज़हब की बेड़ियों में ही जब बँधकर रहना है,
ज़हन में आज़ादी की ये दीवानगी क्यों कर है।
मेरी ज़िंदगी खरीद कर तुम ख्वाब दिखाते हो,
फिर चंद साँसों की मुझे मोहलत क्यों कर है।
हाथों में खंजर और लव पर तुम्हारे दुआएं है
इंसान मैं भी हूं मुझ पर इतनी मेहरबानी क्यों कर है?
धूप का सफर है मंजिल है, पर साया साथ नहीं
मेरे और उसके बीच में इतना फासला क्यों कर है
परिंदों की चहक बता रही है वो लौट आए हैं
मगर इन घरों में अब तक बिरानगी क्यों कर है
अपनी हरकतों से ,वो शैतान के सानी हैं,
उनके धड़ पर चेहरा इंसानी क्यों कर है।
अज़ाब तुझ पर है मासूमों का खून वहाया तूने
उसने तुझे जन्नत का ख्वाब दिखाया क्यो कर है
Wednesday, 18 February 2026
युगजयी तर्कश
[Intro - धीमा और गंभीर संगीत, बाँसुरी की धुन]
[Verse 1]
उन्नति के चरम शिखर से, मनुज धरा पर आता है।
पतन और उत्थान से, सदियों से उसका नाता है।
विश्व धरा पर मानव का उद्गम, नहीं कोई चमत्कारी माया है।
मानव होगा तब मानव है, वह नहीं अंतरिक्ष से आया है।
[Verse 2]
अपने ही करों से उसने, विश्व धरा कश्रृंगार किया।
मानव को कालजयी बनाया, सृजनता का उपहार दिया।
उसके सृजन की गाथा को, हर युग का सम्मान मिला,
उसके सृजन की गाथा को, हर युग का सम्मान मिला,
किंतु प्रतीत हुआ यह, वह मानवता से अनभिज्ञ मिला।
किंतु प्रतीत हुआ यह, वह मानवता से अनभिज्ञ मिला।
है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
उत्कृष्ट ये गुण प्रकृति का, स्वयं अभी तो है अलग-थलग।
परिवर्तन चक्र न रुकने पाता, निर्वात गति बहता जाता,
जहाँ धीर गंभीर गहरे सागर हों, पर्वतराज हिमालय बन जाता।
श
[Verse 3]
अपने सहज गुणों से प्रकृति, नित नई सीख सिखाती है।
निष्कपट, निर्मल, निश्चल, उमंग उल्लास आनंद बढ़ाती है।
यह प्रकृति काल रूप है, यह देवों का प्रतिरूप है।
नित्य निरंतर चिरंजीवी है, सुख-दुख विरक्त एक स्वरूप है।
[Bridge - तनावपूर्ण और चेतावनी भरा संगीत]
मनुष्य में भी वास इसी का, वह रहा सदा दास इसी का।
स्वामी बनने की अभिलाषा में, सदा करता उपहास इसी का।
जब विचार शून्य मस्तिष्क होते, तब मानवता अश्रु बहाती,
जब विचार शून्य मस्तिष्क होते, तब मानवता अश्रु बहाती,
प्रलय रूपी अंधियारा छा जाता, मनुज तेरी सृजनता खो जाती।
प्रलय रूपी अंधियारा छा जाता, मनुज तेरी सृजनता खो जाती।
[Chorus Repeat - उच्च ऊर्जा के साथ]
है रूप अलग, है रंग अलग, गुण और विचारों में अलग-थलग।
उत्कृष्ट ये गुण प्रकृति का, स्वयं अभी तो है अलग-थलग।
परिवर्तन चक्र न रुकने पाता, निर्वात गति बहता जाता,
जहाँ धीर गंभीर गहरे सागर हों, पर्वतराज हिमालय बन जाता।
[Outro - तीव्र और गंभीर चेतावनी]
धरा पर अब तक उसने पीयूष स्रोत बरसाया है,
धरा पर अब तक उसने पीयूष स्रोत बरसाया है,
दुर्बुद्धि मनुज तुझे ना वह रास आया है।
दुर्बुद्धि मनुज तुझे ना वह रास आया है।
सावधान! संधान संहारक वाणों का,
सावधान! संधान संहारक वाणों का,
काल देव के मन में आया है... काल देव के मन में आया है।
काल देव के मन में आया है... काल देव के मन में आया है।
वो गरीबों की मलिन बस्ती
मनुज भेष में छुपाया दानव
जाग सत्ता के चौकीदार
Tuesday, 17 February 2026
॥ वह एक हसीं हसीना थी ॥
[Chorus]
वो एक हसीं हसीना थी,
वो एक हसीन हसीना जी।
दिल उसने मुझसे छीना जी,
मुझे कोई निशानी दी ना जी...
मैं क्या करूँ?
मेरा मुश्किल हो गया जीना जी।
[Verse 1]
जब मेरी गली में आई थी,
वो दुल्हन सी शर्माई थी।
उसने नज़र नहीं उठाई,
वो एक हसीं हसीना जी।
जब मेरी गली में आई थी,
वो दुल्हन सी शर्माई थी।
उसने नज़र नहीं उठाई,
वो एक हसीं हसीना जी।
[Chorus]
दिल उसने मुझसे छीना जी...
[Verse 2]
जब बाग में थी वो मुझे मिली,
मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।
उसकी बातें मिश्री की डली,
वो एक हसीं हसीना थी।
जब बाग में थी वो मुझे मिली,
मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।
उसकी बातें मिश्री की डली,
वो एक हसीं हसीना थी।
[Chorus]
दिल उसने मुझसे छीना जी...
[Verse 3]
जब मेरे पास से आई थी,
गुलाबो की महक समाई थी।
उसकी महक बसी थी सांसों में,
वो थी एक हसीना लाखों में।
जब मेरे पास से आई थी,
गुलाबो की महक समाई थी।
उसकी महक बसी थी सांसों में,
वो थी एक हसीना लाखों में।
[Chorus]
वो एक हसीं हसीना जी...
[Verse 4]
वो जादू की एक गुड़िया थी,
ये गीत उसे सुनाया था।
मन को उसके भी भाया था,
मेरे दिल पर मेरा काबू था,
उसकी चाल में भी एक जादू था।
वो जादू की एक गुड़िया थी,
ये गीत उसे सुनाया था।
मन को उसके भी भाया था,
मेरे दिल पर मेरा काबू था,
उसकी चाल में भी एक जादू था।
[Outro: Fast Instrumental Fade Out]
वो एक हसीं हसीना जी...
दिल उसने मुझसे छीना जी...
वह एक हसीं हसीना थी,
वह एक हसीन हसीना जी।
दिल उसने मुझसे छीना जी,
मुझे कोई निशानी दी ना जी...
मैं क्या करूँ?
मेरा मुश्किल हो गया जीना जी।
अंतरा 1:
जब मेरी गली में आई थी,
वो दुल्हन सी शर्माई थी।
उसने नज़र नहीं उठाई,
वह एक हसीं हसीना जी।
दिल उसने मुझसे छीना जी...
अंतरा 2:
जब बाग में थी वो मुझे मिली,
मुझे लगा जैसे कोई कली खिली।
उसकी बातें मिश्री की डली,
वह एक हसीं हसीना थी।
दिल उसने मुझसे छीना जी...
Monday, 16 February 2026
आसमा की बुलंदशियों पर छा रहा तिरंगा
[Intro: Heavy Dhol and Trumpet Fanfare]
[Chorus]
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
[Verse 1]
देश के दुश्मन गला अपना घोटने लगे हैं,
ललकार से तिरंगे की कांपने लगे हैं।
कहर उन पर अपना अब ढा रहा तिरंगा,
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।
(Repeat)
देश के दुश्मन गला अपना घोटने लगे हैं,
ललकार से तिरंगे की कांपने लगे हैं।
कहर उन पर अपना अब ढा रहा तिरंगा,
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।
[Verse 2: Rising Intensity]
नाज है उन्हें उनके एटम बमों पर,
लश्कर के बनाए हुए मानव बमों पर।
बाप एटम का अब बना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
(Repeat)
नाज है उन्हें उनके एटम बमों पर,
लश्कर के बनाए हुए मानव बमों पर।
बाप एटम का अब बना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
[Verse 3]
जख्म मुंबई के वो काम कर गए हैं,
हिंदुस्तानी दिलों में जुनून भर गए हैं।
राख आतंक को अब बना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
(Repeat)
जख्म मुंबई के वो काम कर गए हैं,
हिंदुस्तानी दिलों में जुनून भर गए हैं।
राख आतंक को अब बना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
[Bridge: Hard Percussion & Aggressive Tone]
भूल मत करना आतंकी ठेकेदारों,
इल्म मुल्क और अपनी कौम के गद्दारों।
हिदायत गीता कुरान की सुना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
(Repeat)
भूल मत करना आतंकी ठेकेदारों,
इल्म मुल्क और अपनी कौम के गद्दारों।
हिदायत गीता कुरान की सुना रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
[Verse 4]
जुल्म बहुत सह चुके अब और ना सहेंगे,
बदले अब तुमसे गिन गिन के हम लेंगे।
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।
(Repeat)
जुल्म बहुत सह चुके अब और ना सहेंगे,
बदले अब तुमसे गिन गिन के हम लेंगे।
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।
[Verse 5]
जनता का राज है ना कोई राज अब चाहिए,
विश्व का जो ताज है वो ताज हमें चाहिए।
एक नया सपना आज दिखा रहा तिरंगा,
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।
(Repeat)
जनता का राज है ना कोई राज अब चाहिए,
विश्व का जो ताज है वो ताज हमें चाहिए।
एक नया सपना आज दिखा रहा तिरंगा,
आसमां की बुलंदियों पर छा रहा तिरंगा।
[Verse 6: High Octave Energy]
नयी हुंकार आज भर रहा है तिरंगा,
केसरिया आभा से दमक रहा है तिरंगा।
तिरंगे के कदमों को कोई रोक ना सकेगा,
इतिहास नूतन हर दिन बना रहा है तिरंगा।
(Repeat)
नयी हुंकार आज भर रहा है तिरंगा,
केसरिया आभा से दमक रहा है तिरंगा।
तिरंगे के कदमों को कोई रोक ना सकेगा,
इतिहास नूतन हर दिन बना रहा है तिरंगा।
[Outro: Grand Finale]
भारत माता का गौरव बढ़ा रहा है मेरा तिरंगा,
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
(Repeat)
भारत माता का गौरव बढ़ा रहा है मेरा तिरंगा,
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा।
गीत वंदे मातरम का गा रहा तिरंगा,
अपने दुश्मनों को बेनकाब कर रहा तिरंगा।
हिंसक शिकारी
[Structure: Repetitive Folk Style]
[Vocal Instruction: Do not sing headings or bracketed text]
[Mood: Dark, Somber, Reflective]
(Verse 1)
खून को खून नहीं पहचाने, कैसी मति गई मारी रे।
खून को खून नहीं पहचाने, कैसी मति गई मारी रे।
एक दूजे की खून की प्यासी, लगती दुनिया सारी रे।
एक दूजे की खून की प्यासी, लगती दुनिया सारी रे।
(Verse 2)
कैसी अनोखी रीत बनाई, जो है सबसे न्यारी रे।
कैसी अनोखी रीत बनाई, जो है सबसे न्यारी रे।
आपा धापी लूट खसोट की, देखो चली बयारी रे।
आपा धापी लूट खसोट की, देखो चली बयारी रे।
(Verse 3)
जिन छप्पर पे फूस नहीं था, उनमें आग लगाई रे।
जिन छप्पर पे फूस नहीं था, उनमें आग लगाई रे।
शैतानों का राज हुआ है, देता मनुज ना दिखाई रे।
शैतानों का राज हुआ है, देता मनुज ना दिखाई रे।
(Verse 4)
स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े, दया से ना कोई नाता रे।
स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े, दया से ना कोई नाता रे।
जिन हृदय में भाव नहीं है, उनका कौन विधाता रे?
जिन हृदय में भाव नहीं है, उनका कौन विधाता रे?
(Verse 5)
खाने को रोटी नहीं है, फिर भी खरीद के गोली लाता रे।
खाने को रोटी नहीं है, फिर भी खरीद के गोली लाता रे।
कितना साहस भरा हृदय में, खून से ना घबराता रे।
कितना साहस भरा हृदय में, खून से ना घबराता रे।
(Verse 6)
लाशों के अंबार लगे हैं, कफन अपने पास ना रे।
लाशों के अंबार लगे हैं, कफन अपने पास ना रे।
साँसें छोटी होती हैं जाती, जीवन की कोई आस ना रे।
साँसें छोटी होती हैं जाती, जीवन की कोई आस ना रे।
(Outro)
प्रेम दया ना पास हमारे, बन गए आज भिखारी रे।
प्रेम दया ना पास हमारे, बन गए आज भिखारी रे।
समाज बना है जंगल आज, हम हैं हिंसक शिकारी रे।
समाज बना है जंगल आज, हम हैं हिंसक शिकारी रे।
खून को खून नहीं पहचाने
कैसी मति गई मारी रे,
एक दूजे की खून की प्यासी
लगती दुनिया सारी रे।
कैसी अनोखी रीत बनाई
जो है सबसे न्यारी रे,
आपधापी लूट खसोट की
देखो चली बयारी रे।
जिन छप्पर पे फूस नहीं था
उनमें आग लगाई है,
शैतानों का राज हुआ है
देता मनुज ना दिखाई रे।
स्नेह प्रेम के बंधन तोड़े,
दया से ना कोई नाता रे,
जिन हृदय में भाव नहीं है
उनका कौन विधाता रे?
खाने को रोटी नहीं है फिर भी
खरीद के गोली लाता रे,
कितना साहस भरा हृदय में
खून से ना घबराता रे।
लाशों के अंबार लगे हैं
कफन अपने पास ना रहे,
साँसें छोटी होती हैं जाती,
जीवन की कोई आस ना रे।
प्रेम दया ना पास हमारे
बन गएआज भिखारी रे,
समाज बना है जंगल आज ,
हम हैं हिंसक शिकारी रे।
Sunday, 15 February 2026
मेरी मोहब्बत प्यासी रही, यादें तेरी आती नहीं।
[Intro]
(Pulsing synth with a fast piano melody)
[Chorus]
मेरी मोहब्बत प्यासी रही
यादें तेरी आती रहीं
रातों में जगाती रही
मेरी मोहब्बत प्यासी रही
यादें सनम तेरी आती रही
[Verse 1]
चाहत भरे दिल में अरमान थे, हम भी कितने नादान थे,
नहीं जानते थे मोहब्बत है क्या, उल्फत है क्या ये चाहत है क्या।
हम दुनिया मोहब्बत की बसाते रहे, मोहब्बत हमको सताती रहीं
(दोहराएं): हम दुनिया मोहब्बत की बसाते रहे, मोहब्बत हमको सताती रहीं
यादें सनम तेरी आती रही
[Chorus]
मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही
[Verse 2]
कई बार सोचा ना मोहब्बत करेंगे, मोहब्बत में उम्र यूं ना तबाह करेंगे
सनम की गलियों से तौबा करी, फिर भी दिल में जिंदा मोहब्बत रही
हमें अपना वजूद बताती रही, यादें सनम तेरी आती रही
(दोहराएं): हमें अपना वजूद बताती रही, यादें सनम तेरी आती रही
[Chorus]
मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही
[Bridge]
(Beat drops, music becomes deeper and atmospheric)
दिल की नादानी को भला क्या कहें, उसकी बेरुखी को बुरा क्या कहे
यह फैसला तो उसी को करना था, हम उसके दिल में रहे ना रहे
कुछ उलझी सी अपनी कहानी रही, यादे सनम तेरी आती रही
[Chorus]
मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही
[Verse 3]
इन यादों से दामन छुड़ा ना सके, तबाही से दिल को बचा न सके
चुप चुप के आहे भरते रहे, बात दिल की किसी से बता ना सके
ये मोहब्बतें हमें रुलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही
(दोहराएं): ये मोहब्बतें हमें रुलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही
[Chorus]
मेरी मोहब्बत प्यासी रही... यादें सनम तेरी आती रही
[Verse 4]
जी मैं सकूँ कोई तो वजह हो, कोई वजह ना सही बस बेवजहा हो
वो कह दे मोहब्बत नहीं है मुझको, खत्म अब तो यह दिल का सिलसिला हो
क्यों अब तक आंखें मिलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही
(दोहराएं): क्यों अब तक आंखें मिलाती रही, यादें सनम तेरी आती रही
[Chorus] - (Full Energy)
मेरी मोहब्बत प्यासी रही
यादें तेरी आती रहीं
रातों में जगाती रही
मेरी मोहब्बत प्यासी रही
यादें सनम तेरी आती रही
[Outro]
(Music fades with drums continuing for a few seconds)
यादें सनम तेरी आती रही...
मेरी मोहब्बत प्यासी रही...
(Echoing...)
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
कभी हंसे तो आए ये आँसू, कभी रोए तो आए ये आँसू
कभी गालों पे बहे ये आँसू, कभी आँचल में समाए ये आँसू
बार-बार आए ये आँसू
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
इन आँसुओं की कहानी अजब है,
इन आँसुओं का फ़साना ग़ज़ब है
अजूबा ही तो हैं ये आँसू,
बार-बार आए ये आँसू
कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू
कभी महफिलों के जाम में छलके, कभी ग़ज़ल के सुरों में चमके
आँखों की चमक बढ़ाते ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू
बार-बार आए ये आँसू
इन आँसुओं का मोल अनमोल है, बड़े सलोने और मीठे इनके बोल हैं
खुद ही लफ़्ज़ चुनते, खुद ही तोलते, दिल का हर राज़ खोलते ये आँसू
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
जब दर्द की आँखों से ये बहते हैं, अपनी ही कोई कहानी कहते हैं
जैसे सीप के मोती हों सलोने, ऐसे अनमोल होते हैं ये आँसू
बार-बार आए ये आँसू
कभी थम नहीं पाए ये आँसू, बार-बार आए ये आँसू
अगर पोंछ सको किसी के तुम ये आँसू, तो तुम इंसा नहीं फरिश्ते हो
बस 'प्रभात' इतना कहना है तुमसे, सपनों वाली आँखों में न रहने देना ये आँसू
बार-बार आए ये आँसू
कभी खुशी में आए ये आँसू, कभी गम में आए ये आँसू
बार-बार आए ये आँसू
"A soulful Indian Ghazal, male vocal with deep emotional resonance, clear pronunciation, nuanced expression (harkat and murki), traditional Soft Tabla rhythm, melodic Harmonium interludes, subtle Acoustic Guitar plucking in the background, Studio Quality, High Fidelity, 80bpm, poignant atmosphere, cinematic soundstage."
हालत बड़े थे उलझे उलझे,हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।
मतला:
हालात बड़े थे उलझे उलझे, हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।
हम उलझ गए खुद में ही, इन हालातों को सुलझाते-सुलझाते।
शेर:
इक धोखा दिया खुद अपने को, सच मान लिया इक सपने को।
आंखों से पानी छलक गया, जब तक ये होंठ मुस्कुराते।
शेर:
रुकते भी तो कैसे रुकते, मंजिल तो दूर हमारी थी।
परछाई साथ नहीं चलती, ये कदम भी तो हैं थक जाते।
शेर:
परछाई मेरी छोड़ गई, जब शाम ढली और रात आई।
तेरी यादों ने साथ नहीं छोड़ा, वह संग रही और साथ में आई।
शेर:
हम उलझे रहे ख्यालों में, कुछ अनसुलझे सवालों में।
जिनके जवाब हम ढूंढते रहे, बस हर रोज तेरे ख्यालों में।
मक़्ता:
'प्रभात' हम खुद ही बहक गए, खुद ही बहक गए।
अपने इन हालातों को बहकाते बहकाते।
आखरी पंक्ति:
हालात बड़े थे उलझे उलझे, हम सुलझाते तो कैसे सुलझाते।
Saturday, 14 February 2026
तू रोशनी भर ही थी सही
[Intro]
(Emotional and long Sarangi solo. Fades into soft Sitar and Piano.)
[Chorus / Mukhda]
(Vocal enters with deep resonance)
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई,
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई।
अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई,
अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई।
[Verse 1 / Antara]
(Slight emotional peak in vocals)
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।
[Chorus Reprise]
(Soft Tabla rhythm continues)
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर थी छा गई...
[Verse 2]
(Increasing intensity in the Sarangi between lines)
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।
[Bridge]
(Slowing down, very minimal music)
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।
[Chorus Reprise]
(Vocal focus on the word 'Roshni')
तू रोशनी भर ही थी...
[Verse 3]
(Gentle and conversational tone)
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।
[Outro]
(Fading peacefully)
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई...
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर थी छा गई...
(Final fading notes of Sarangi and Sitar)
[End]
[Intro]
[Slow, melancholic Sarangi and soft Piano melody]
[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।
अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई,
अंधेरे थे मेरी राह में, इसलिए नज़र को भा गई।
[Verse 1]
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।
[Musical Interlude]
[Sitar and Tabla bridge]
[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।
[Verse 2]
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसके वास्ता।
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।
[Bridge]
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।
[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी, जो फलक पर तिरछा गई।
[Verse 3]
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।
[Musical Interlude]
[Flute and Sarangi solo]
[Outro]
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई,
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई।
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
[End]
[Intro]
[Soft Sarangi and Piano melody]
[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई,
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई।
[Verse 1]
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।
[Verse 2]
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,
मैं तेरी इबादत में खड़ा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।
[Bridge]
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।
[Verse 3]
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।
[Outro]
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक झलक थी दिखा गई,
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक झलक थी दिखा गई।
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
[End]
[Intro]
[Soft Sarangi and Piano melody]
[Chorus]
तू रोशनी भर ही थी , जो फलक पर तिरछा गई,
तू रोशनी भर ही थी , जो फलक पर तिरछा गई।
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई,
अंधेरे थे मेरी राह में, इस नज़र को भा गई।
[Verse 1]
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा,
मैंने तुमको अपना माना खुदा, ना पल भर को भी हुआ तुमसे जुदा।
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई,
तू मेरी सांसों में ही थी बसी, मेरे लब पे गीत बनके आ गई।
[Verse 2]
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता,
मेरी बंदगी थी मेरी दास्ताँ, मैंने दिया था तुमको इसका वास्ता।
मैं तेरी इबादत में खडा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता,
मैं तेरी इबादत में खडा रह गया, तुझे मिल गया नया रास्ता।
[Bridge]
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई,
संभल सका ना मैं इसलिए, मेरी ज़िंदगी लड़खड़ा गई।
[Verse 3]
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है,
मुझे तेरी दोस्ती भी अभी अज़ीज़ है, मेरा दिल भी यह कुछ अजीब है।
तेरी चाहत अब भी इसमें है रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं,
तेरी चाहत अब भी इसमें रही, तुझसे जुदा हुआ ये दिल नहीं।
[Outro]
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई,
तेरी आरज़ू मेरे दिल में घर कर गई, वो जो इक तेरी झलक दिखा गई,
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई,
प्रभात तू रोशनी ही थी सही, जो फलक पर तिरछा गई।
[End]
Mata Lakshmi Narayan ki aarti
जय माँ! जय माँ!
जय माँ! जय माँ!
मातृ भवानी, नारायण को संग में लाओ,
हमारे घर में, वैभव ज्योत जलाओ।
मैया, वैभव ज्योत जलाओ।
मात भवानी, घर आँगन हमारा महकाओ,
मैया, महके घर आँगन हमारा।
मिले माँ तेरा ही सहारा, माता अपना वरद हस्त बढ़ाओ।
कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,
मैया, विनती सुनो हमारी।
चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,
मैया, तर जाए दुनिया सारी।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, अमृत रस बरसाओ।
शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी भी आएँ,
मैया, विष्णु जी भी साथ आएँ।
तेरे भक्त के छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,
मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, मंगल गीत गवाओ।
दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,
मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।
अपने इस निर्धन बेटे के, घर में ज्योत जगाओ,
मैया, वैभव ज्योत जगाओ।
भक्ति का वरदान दे मैया, सोया भाग्य जगाओ।
जय माँ भवानी! जय नारायण!
वैभव ज्योत जलाओ!
Mata Lakshmi Narayan ki aarti
[Intro]
(Fast Dholak and Flute music)
जय माँ! जय माँ!
[Chorus - Mukha-da]
मात भवानी, नारायण को संग में लाओ,
हमारे घर में, वैभव ज्योत जलाओ।
मैया, वैभव ज्योत जलाओ।
मात भवानी, घर आँगन हमारा महकाओ,
मैया, महके घर आँगन हमारा।
मिले माँ तेरा ही सहारा, माता अपना वरद हस्त बढ़ाओ।
[Verse 1 - Antara]
कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,
मैया, विनती सुनो हमारी।
चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,
मैया, तर जाए दुनिया सारी।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, अमृत रस बरसाओ।
[Verse 2 - Antara]
शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी भी आएँ,
मैया, विष्णु जी भी साथ आएँ।
तेरे भक्त के छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,
मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, मंगल गीत गवाओ।
[Verse 3 - Antara]
दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,
मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।
अपने इस निर्धन बेटे के, घर में ज्योत जगाओ,
मैया, वैभव ज्योत जगाओ।
भक्ति का वरदान दे मैया, सोया भाग्य जगाओ।
[Outro - Fast Beats]
जय माँ भवानी! जय नारायण!
वैभव ज्योत जलाओ!
(Music Fade Out)
आओ माँ खुशियाँ लेकर, दूर करो सब अंधियारा,
मैया, दूर करो सब अंधियारा।
संग लाओ नारायण को, महके घर-आँगन हमारा,
मैया, महके घर-आँगन हमारा।
(अंतरा - 1)
कष्ट हरो हे मात भवानी, विनती सुनो हमारी,
मैया, विनती सुनो हमारी।
चरण कमल की धूलि पाकर, तर जाए दुनिया सारी,
मैया, तर जाए दुनिया सारी।
आओ माँ खुशियाँ लेकर...
(अंतरा - 2)
शंख चक्र और गदा हाथ में, विष्णु जी साथ आएँ,
मैया, विष्णु जी साथ आएँ।
भक्तों के इस छोटे घर को, बैकुंठ धाम बनाएँ,
मैया, बैकुंठ धाम बनाएँ।
आओ माँ खुशियाँ लेकर...
(अंतरा - 3)
दया दृष्टि की वर्षा कर दो, सुख-संपत्ति बरसाओ,
मैया, सुख-संपत्ति बरसाओ।
निर्धन के इस सूने घर में, वैभव ज्योत जगाओ,
मैया, वैभव ज्योत जगाओ।
आओ माँ खुशियाँ लेकर, दूर करो सब अंधियारा,
Friday, 13 February 2026
दिल ने कहा तुमसे कहूं,
नज़्म: इबादत-ए-एहसास
दिल ने कहा तुमसे कहूं,
मैंने कहा कैसे कहूं।
दिल ने कहा निगाहों से कह,
मैंने कहा उसे देखता ही नहीं।
दिल ने कहा फिर भी चाहत है,
मैंने कहा उसकी दिल में इबादत है।
दिल ने कहा तू तन्हा ही जी,
मैंने कहा उसकी यादें मेरे साथ हैं।
[अगले पड़ाव (अशआर):]
दिल ने फिर एक सवाल किया—
कि जो पास नहीं, वो प्यारा क्यों है?
बिन मंज़िल का ये आवारा सफ़र,
तुझे उम्र भर का सहारा क्यों है?
मैंने कहा—
मोहब्बत आँखों की मोहताज नहीं होती,
हर हकीकत में रूह की आवाज़ नहीं होती।
उसे पाना मेरा मक़सद ही नहीं,
क्योंकि खुदा को पाने की कोई रस्म-ओ-रिवाज़ नहीं होती।
दिल ने कहा—
कि वो मशरूफ़ है अपनी दुनिया में,
तू क्यों उसकी यादों में राख होता है?.....
मैंने मुस्कुरा कर कहा—
इश्क जब इबादत की दहलीज़ छू ले,
तो रकीब का डर भी पाक होता है।
अब न 'मैं' बचा, न 'दिल' की कोई बात रही,
बस उसकी याद की सल्तनत और मेरी सारी रात रही।