Thursday, 14 February 2019

आवाहन अब सडकों पर

चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर|
लाशो का अम्बार लगा जब सडकों पर|
कितने घर उजड गये कितने अपनो से विछड गये|
आसुओं का सैलाव वहा जब सडकों पर|

नही बधें है हाथ कुछ कर दिखलाओ तुम|
मक्कारी के आंसु मत बहाओ तुम||
उनको भी दर्द का एहसास‌हो जाने दो|
मोमबत्ती मत जलाना अब सडकों पर||

चीत्कार  उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

मिटने को तैयार हुं मै मिट जाऊगा |
खून के आंसू उनको रुलवाऊगा|
मां तेरे बेटो का आवहान है अब सडकों पर||
चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

Monday, 4 February 2019

रुठा हुआ ये वक्त

रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,

शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।

दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,

शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।

​इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,

मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।

इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,

मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,

आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।

आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,

आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।

​तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,

हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।

तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,

हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,

जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।

नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,

जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।

​रुक जाता है मेरे करीब आकर,

शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।

रुक जाता है मेरे करीब आकर,

शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,

खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।

थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,

खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे