रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।
रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।
दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,
शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।
दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,
शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।
इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,
मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।
इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,
मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।
रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।
आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,
आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।
आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,
आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।
तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,
हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।
तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,
हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।
रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।
नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,
जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।
नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,
जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।
रुक जाता है मेरे करीब आकर,
शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।
रुक जाता है मेरे करीब आकर,
शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।
रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।
थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,
खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।
थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,
खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।
रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,
कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे