Wednesday, 24 April 2019

मै भी टूट कर करु उसको प्यार

[Style: Soulful, Romantic, Bollywood Ballad, Male Vocals, Acoustic Guitar, Soft Tabla, High Emotional Intensity]

​[Intro]

(Instrumental Flute Solo)

​[Verse]

वो सांसों में रहे बसा मेरी

वो ज़िन्दगी बन जाए मेरी

उसे कैसे मैं ये चाह कहूँ

हर पल उसके संग रहूँ

​क्या यही चाहत है यार

क्या यही है जिसे कहते हैं प्यार

कोई हमें बताए तो

कोई हमें भी चाहे तो

​[Chorus] 

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

​[Verse]

हर रंग जिसके रंग रंगा

जिससे ना कोई लगे सगा

हर सपना लगे चाहत में जगा

तन्हाइयाँ हों एक सजा

​क्या वही मन का मीत है

क्या यही सच, यही प्रीत है

कोई ये राज खोल दे

मेरे कानों में ही बोल दे

लगे वो मधुर सी एक झंकार

​[Chorus]

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार


​[Bridge]

वो कमल सी पंखुरियां हिलें तो

दिल की बात मैं भी कहूँ

पल-पल का दर्द बयाँ करूँ

वो ख्वाबों में ही सही मिलें तो

​पर होंठ कुछ कह पाएँगे

या यूँ सिले ही रह जाएँगे

चंद पल और गर वो दे उधार

​[Verse]

जैसे सागर से लहरें मिलें

जैसे भौरों से कोई कली मिले

मेरा मन भी वैसे ही बावरा

बस उसके ही रास्तों पे चले

​वो धूप सी चमकती रहे

मेरे आँगन में महकती रहे

बस इतना सा ही है इंतज़ार

​[Outro]

खुद को खोकर उसे पा लूँ मैं

अपनी रूह में उसे सजा लूँ मैं

वो दरिया है, मैं प्यास पुरानी हूँ

उसकी लहरों में खुद को बसा लूँ मैं

​नहीं डर मुझको है ज़माने का

नहीं मानता रस्मों की दीवार

​[Final Chorus]

टूट कर करूँ उसको प्यार

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

मैं टूट कर करूँ उसको प्यार

[End]


Tuesday, 16 April 2019

ऐ आश्मा नाज न कर

ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे
तेरे उस पार अपनी दुनिया बसा के जाऊगा|

मै नही जानता जमी पे कभी चल भी पाऊगा,
इतना हौसला है मुझमे तुझे झुकाके जाऊगा|

ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........

मेरे रास्ते में होगी हंसी सितारो की महफिले,
अपनी दुनिया उनसे भी आगे लेकर जाऊगा|

ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........

जागती आखों मे ख्याब सजाके बैठा हुँ,
मै नमाजी नही खुदा को भुलाके जाऊगा|

ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........

मेरी रुह का वो मुकाम 'प्रभात' कहा पर होगा

हो सका तो ये हकीकत बताके जाऊगा

ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........

Tuesday, 9 April 2019

देवालय


हृदय को देवालय बनाइये

नये स्वप्न संसार को दिखाइये

आइए, आइए, आइए...

गीत 'मानव भक्ति' के गाइये

हृदय को देवालय बनाइये


ध्येय जो भी जीवन में हो मिला

रह न जाए मन में कोई गिला

फूल बनकर यदि न उपवन में खिला

तो जीवन ये कैसा, बताइये?

कर्म से ही कीर्ति को पाइये

जीवन को फूलों सा सजाइये

प्रकृति का दुल्हन सा श्रृंगार कर

पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं से प्यार कर

छोड़ नफरत, सृजन का विचार कर

जीवन को 'बसंत' सा सजाइये

इस बगिया को पसीने से महकाइये


हृदय को देवालय बनाइये

नये स्वप्न संसार को दिखाइये


न भटकें हम अन्धकार में

न उलझें व्यर्थ के विकार में

रत रहें बस मानव के सत्कार में

नये पदचिह्न अब बनाइये

कोई मनुज उपेक्षित न खड़ा

विश्व धरा पर उपकार हो बड़ा

भंवर में जो भूख के है पड़ा

उन्नति का तट उन्हें दिखाइये


हृदय को देवालय बनाइये...

हृदय को देवालय बनाइये...

​[Verse 5 - Duet]

धर्म, वर्ण, नस्लों में जो भेद है

दुर्ग अब भी ऐसा जो अभेद है

नर नहीं नारायण, यही खेद है

वेद अब 'नर-ऋचाओं' का बनाइये


तर्क पर ही रचा विधान हो

एक विधि हो, उसका ही सम्मान हो

समभाव भी विद्यमान हो

समानता से समाज को सजाइये

हृदय को देवालय बनाइये...


Sunday, 7 April 2019

विदाई

विदाई के पल भी क्या खुब होते है|
कुछ तो खुब हसते है कुछ खुब रोते है|

जो विदा होते है नये सपने संजोते है|
जो करते विदाई है कोई अपना सा खोते है||
खोने-पाने की रीत ये सदियो से चलती आई है|
बडी कडवी बडी मीठी सी होती ये विदाई है||

कडवा उन्ही को मिलता है जो करते विदाई है|
विदा होने वालो के हिस्से मे सिर्फ होती मठाई है

लव्जो की ये मिठाई ही मुबारकबाद मेरी है
मिले आपको चमन अमन चैन खुशहाली|
अपने रब से यही दुआ है मेरी
यही मुराद मेरी है

Thursday, 14 February 2019

आवाहन अब सडकों पर

चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर|
लाशो का अम्बार लगा जब सडकों पर|
कितने घर उजड गये कितने अपनो से विछड गये|
आसुओं का सैलाव वहा जब सडकों पर|

नही बधें है हाथ कुछ कर दिखलाओ तुम|
मक्कारी के आंसु मत बहाओ तुम||
उनको भी दर्द का एहसास‌हो जाने दो|
मोमबत्ती मत जलाना अब सडकों पर||

चीत्कार  उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

मिटने को तैयार हुं मै मिट जाऊगा |
खून के आंसू उनको रुलवाऊगा|
मां तेरे बेटो का आवहान है अब सडकों पर||
चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

Monday, 4 February 2019

रुठा हुआ ये वक्त

रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,

शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।

दिल में इसके शिकायतों का गुब्बार भरा है,

शायद इसी के चलते, इतना ये खफा हुआ है।

​इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,

मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।

इरादा क्या है इसका, कहता भी कुछ नहीं है,

मैं इधर जा रहा हूं, वो उल्टा जा रहा है मुझसे।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,

आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।

आंखों के हसीन ख्वाब, छीने इसने मेरे,

आता है रातों को, नींदें उड़ाने मेरी।

​तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,

हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।

तनहाइयों में आके, करता है शोर ज़ालिम,

हैवानियत भरे चेहरों से, डराता है मुझको।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,

जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।

नज़रें बचाकर गुज़र जाता है मेरी राह से,

जैसे कोई बेवफा दोस्त पुराना हो।

​रुक जाता है मेरे करीब आकर,

शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।

रुक जाता है मेरे करीब आकर,

शायद अब भी उससे, मेरा याराना हो।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे।

​थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,

खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।

थक कर मत बैठ 'प्रभात' कह रहा है ये वक्त,

खुद ही बताएगा, क्या चाहता है ये मुझसे।

​रुठा हुआ ये वक्त, ये यूं ही नहीं है खफा मुझसे,

कुछ तो खता हुई है, बस कहता नहीं है मुझसे





Tuesday, 22 January 2019

मै वो नही

मै वो नही जो  तुफानो से डरता हो
मै रहा अडिग तेज पवन के झोको मे
मै नही वो जो संकटो से डर जाते है
मै तो रहा सदा संकटो की गोदी मे

मै नही रहा भाग्य का अनुगामी बन कर
मै स्वम् अपने भाग्य का बना रचिता हूँ
विजय उपहार दिया मुझे मेरे भाग्य ने

मैने हर क्षण का हर क्षण किया संहार है
स्वमं हर क्षण ने मेरे पथ का श्रृंगार किया  है
हर क्षण ने मुझसे प्यार किया है और्
हर क्षण ने नया एक उपहार दिया है

क्यों ना हो जाऊं मैं मौन तमाशा बनके

देखना फिर भी हर हालात में रहूंगा तन के