Thursday, 16 August 2018

जावाज जिन्दगी का सिपाही खो गया

जावाज जिन्दगी का सिपाई खो गया|
वो वतन परस्त हम सफर खो गया|
जो लिखता था कलम से मूकद्दर की दास्ता
उसका मुकद्दर सो गया या वो सो गया|

अब वो ख्याल बन कर दिलो में रहेगा |
वो उसका था नही मेरा ना कोई कहेगा|
वो अब सबकी आंखो का तारा हो गया|

जिसके अटल फैसलो से बना मुल्क है
लाखो काटे हटाये बन गया शक्तिपुंज
नजरे उठा सके नही हौसला दुश्मनो मे
वो सिल्पी अटल था ये काम हो गया|

उसके पद चिन्हो  की धमक देख लो
अब वतन उसके संग संग चल रहा
कह रहे है सभी वो सबका ही था
दिलो पर करके राज जुदा हो गया|

जावाज जिन्दगी का सिपाही खो गया
वो वतन परस्त हम सफर खो गया
           (माननीय अटल जी को समर्पित)

Thursday, 2 August 2018

सपना

[Spoken Word]
[Verse 1]
कैसे कहू तुझसे पवन
दिल मे मेरे क्या है

मौका है
एक सपना है
मेरा सजना है
मुझे सजना है

आखों में जो निंदिया थी

नही सोई मैं मेने खोई|

[Verse 2]

शीशे से पूछूं, मैं बार-बार,

कब तक करूँगी, उसका इंतज़ार।

कंगन खनके, और बिंदिया चमके,

सांसें रुकी हैं, बस उसके नाम पे।

[Pre-Chorus]

ये दीये की लौ भी, अब तो सताए,

परछाई में भी, वो नज़र आए।