जावाज जिन्दगी का सिपाई खो गया|
वो वतन परस्त हम सफर खो गया|
जो लिखता था कलम से मूकद्दर की दास्ता
उसका मुकद्दर सो गया या वो सो गया|
अब वो ख्याल बन कर दिलो में रहेगा |
वो उसका था नही मेरा ना कोई कहेगा|
वो अब सबकी आंखो का तारा हो गया|
जिसके अटल फैसलो से बना मुल्क है
लाखो काटे हटाये बन गया शक्तिपुंज
नजरे उठा सके नही हौसला दुश्मनो मे
वो सिल्पी अटल था ये काम हो गया|
उसके पद चिन्हो की धमक देख लो
अब वतन उसके संग संग चल रहा
कह रहे है सभी वो सबका ही था
दिलो पर करके राज जुदा हो गया|
जावाज जिन्दगी का सिपाही खो गया
वो वतन परस्त हम सफर खो गया
(माननीय अटल जी को समर्पित)