Saturday, 31 January 2026

एक छोटी सी मुलाकात हुई उससे जब

एक छोटी सी मुलाकात हुई उससे जब 
दिल की बात हुई उससे जब।
आंखों में आंखें हुई उससे जब 
अजनबी था जाना पहचाना सा लगा
मुझको मेरा कोई सपना पुराना सा लगा

Friday, 30 January 2026

बड़ी कातिल है तेरी यादें

(Chorus / Mukhda)

मेरी तन्हाइयों को यादे तेरी, गुनगुनाने भी नहीं देती

बड़ी कातिल है यह तेरी यादें,

 मुस्कुराने भी नहीं देती है तेरी यादें

ये बड़ी भोली तेरी सूरत , बार-बार सपने बनकर आती है,

मेरी नजरों में तेरी, भोली सूरत 

इक सपना बन के आती है

मुझको मेरी खामोशी में तेरी सूरत,

दीवाना बना जाती है।

(Verse / Antara)

 मेरे सनम ये इल्तजा है मेरी बेबुनियाद इल्जाम न लगा,

बा-वफ़ा हैं हम, तेरी कसम हमें बार-बार न आज़मा।

वफा का नाम दिलो दिमाग पर लिख चुके हैं हम

यूँ इम्तिहान लेकर बार-बार बढ़ाओ ना हमारे गम।

(Chorus / Mukhda)

 हम बा-वफ़ा हैं ... हम..... बा-वफ़ा हैं ,

कसम तुमको है हमारी अब और न आज़माओ हमें।

बा-वफ़ा हैं हम, तेरी कसम हमें बार-बार न आज़मा।

(Outro)

मेरी तन्हाईयो को यादे तेरी,खामोश नही रहने देती,

तुझे कहना तो बहुत जाता है यह दिल तनहाइयां कुछ कहने नहीं देती 

(Fading music with a soft flute solo)




Soulful Ghazal, Male expressive vocals, Melancholic mood, Slow tempo, Indian Classical fusion, Harmonium, Sarangi, Light Tabla.







रोमांटिक गाने या ग़ज़ल के लिए आज भी और स्त्री की आवाज में prompt

. Male Vocals (पुरुष आवाज़ के लिए)

​यह प्रॉम्प्ट एक गहरी और सुकून देने वाली आवाज़ (जैसे जगजीत सिंह स्टाइल) के लिए है।

Prompt:

"Soulful romantic Ghazal, deep male vocals, slow tempo, intricate Tabla, Harmonium, soft Sarangi, intimate atmosphere, emotional, poetic Urdu style, acoustic."


  • प्रमुख तत्व: Deep Male Vocals, Tabla, Sarangi, Intimate.

​2. Female Vocals (महिला आवाज़ के लिए)

​यह प्रॉम्प्ट एक मधुर और सुरीली आवाज़ (जैसे चित्रा सिंह या बेगम अख्तर स्टाइल) के लिए है।

Prompt:

"Soft romantic Ghazal, melodious female vocals, classical fusion, Sitar, light percussion, dreamy, sentimental, soothing, emotional expressive voice, slow acoustic."


  • प्रमुख तत्व: Melodious Female Vocals, Sitar, Dreamy, Sentimental.

​3. Modern Fusion Ghazal (अगर आप थोड़ा आधुनिक टच चाहते हैं)

​अगर आप गज़ल में गिटार या पियानो का इस्तेमाल करना चाहते हैं:

Prompt:

"Modern romantic Ghazal, [Male/Female] vocals, acoustic guitar, piano, soft tabla, lo-fi texture, warm, heartfelt, cinematic."


​बेहतर रिज़ल्ट के लिए टिप्स (Style Tags):

​अगर टूल आपसे अलग से Style या Genre मांगता है, तो ये कीवर्ड्स (Keywords) टाइप करें:

  • Hindustani Classical
  • Urdu Poetry
  • Semi-classical
  • Slow & Reverb
  • Minimalist

Wednesday, 28 January 2026

nstrumental Intro]
[Aggressive Harmonium Battle]

[Singer 1 - Challenge]
ख्वाब आँखों में चुभें, और नींद रुठ जाए तो क्या...
जिंदगी की भीड़ में, अपना कोई छूट जाए तो क्या!

[Singer 2 - Reply]
अरे सुनिए! जवाब सुनिए!
यहाँ हर शख्स अपने खयालों का कैदी है,
हकीकत से अगर रिश्ता टूट जाए तो क्या!

[Fast Percussion Break]
[Loud Clapping Start]

[Chorus - Both Together]
हमें ज़िन्दगी से... 
हमें ज़िन्दगी से!
हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत
हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत
पड़ी थी खयालों में रहने की आदत
पड़ी थी खयालों में रहने की आदत

[Verse 1 - Singer 1]
बहुत हो चुका, अब है क्या कुछ भी बाकी
न मयख़ाना अपना, न कोई है साकी!

[Verse 1 - Singer 2 - Counter]
अरे क्या बात करते हैं आप!
ज़माने से कर ली है हमने अदावत
ज़माने से कर ली है हमने अदावत!

[Chorus - Both]
हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत
पड़ी थी खयालों में रहने की आदत

[Verse 2 - Singer 1]
वो शाम-ए-सफर भी तो थी क्या सुहानी
बड़ी ही हसीं थी वो अपनी कहानी...

[Verse 2 - Singer 2 - Mocking]
मगर अब 'सियाह' रात की है ये आफत
अरे, अब 'सियाह' रात की है ये आफत!

[Bridge - Muqabla Round - Very Fast]
[Singer 1] किसे क्या मिला?
[Singer 2] अरे क्या खोया हमने!
[Singer 1] मोहब्बत का सपना...
[Singer 2] संजोया है हमने!
[Both] उसी ख्वाब में बस है रहने की चाहत!

[Verse 3 - Singer 1]
न पूछो कि क्या आखिरी है ये ख्वाहिश
यहाँ मौत तक बस रही है पैमाइश!

[Singer 2]
बची अब न कोई भी दिल में सियासत
बची अब न कोई भी दिल में सियासत!

[Outro - High Energy Climax]
[Singer 1] ज़रा गौर फरमाएं... 'प्रभात'!
[Singer 2] अरे 'प्रभात' अब खयालों में ही तुम रहो बस!
[Singer 1] क्यों?
[Singer 2] क्योंकि...
[Both] रुलाती है सबको यहाँ की हकीकत!
[Both] यहाँ की हकीकत! हकीकत! हकीकत!

[Ending]
[Fast Tabla Roll]
पड़ी थी खयालों में रहने की आदत!
[Loud Final Clap]
[End]

1. Music Style Prompt (Style बॉक्स में पेस्ट करें)

​Qawwali Muqabla, Male Duet, Jugalbandi, High Energy, Aggressive Harmonium, Fast Tabla, Rhythmic Hand Claps, Challenging Vocals, Call and Response, Indian Sufi Style


मेरी पहली कव्वाली


कव्वाली: हकीकत और खयाल

(रचनाकार: प्रभात)

[आलाप - Intro]

(धीमा और गहरा स्वर)

आ... आ...

[शेर/रुबाई]

ख्वाब आँखों में चुभें, और नींद रुठ जाए तो क्या,

जिंदगी की भीड़ में, अपना कोई छूट जाए तो क्या...

यहाँ हर शख्स अपने खयालों का कैदी है,

हकीकत से अगर रिश्ता टूट जाए तो क्या!

[स्थायी - Chorus]

हमें ज़िन्दगी से...

हमें ज़िन्दगी से!

हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत,

हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत...

​पड़ी थी खयालों में रहने की आदत,

पड़ी थी खयालों में रहने की आदत!

[अंतरा 1 - Verse 1]

बहुत हो चुका, अब है क्या कुछ भी बाकी,

न मयख़ाना अपना, न कोई है साकी...

ज़माने से कर ली है हमने अदावत,

ज़माने से कर ली है हमने अदावत!

(वापसी स्थायी पर)

हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत,

पड़ी थी खयालों में रहने की आदत।

[अंतरा 2 - Verse 2]

वो शाम-ए-सफर भी तो थी क्या सुहानी,

बड़ी ही हसीं थी वो अपनी कहानी...

मगर अब 'सियाह' रात की है ये आफत,

मगर अब 'सियाह' रात की है ये आफत!

[अंतरा 3 - Bridge]

(तेज़ ताल और जोश के साथ)

किसे क्या मिला और क्या खोया हमने,

मोहब्बत का सपना संजोया है हमने...

उसी ख्वाब में बस है रहने की चाहत,

उसी ख्वाब में बस है रहने की चाहत!

[अंतरा 4 - Verse 4]

न पूछो कि क्या आखिरी है ये ख्वाहिश,

यहाँ मौत तक बस रही है पैमाइश...

बची अब न कोई भी दिल में सियासत!

[मकता - Climax]

(ऊँचे सुर में)

ज़रा गौर फरमाएं... 'प्रभात'!

'प्रभात' अब खयालों में ही तुम रहो बस...

'प्रभात' अब खयालों में ही तुम रहो बस...

​रुलाती है सबको यहाँ की 'हकीकत',

यहाँ की हकीकत... यहाँ की हकीकत...

[समाप्ति - Outro]

पड़ी थी खयालों में रहने की आदत...

रहने की आदत...

आदत...

[Instrumental Intro]

[Harmonium Solo]

[Slow Aalap]

Aaaaa... Aaaaa...

Khwab aankhon mein chubhein, aur neend ruth jaaye to kya,

Zindagi ki bheed mein, apna koi chhoot jaaye to kya...


[Percussion Break]

[Tabla Start]


[Chorus]

Hamein zindagi se... 

Hamein zindagi se!

Hamein zindagi se thi kab ye mohabbat

Hamein zindagi se thi kab ye mohabbat

Padi thi khayalon mein rehne ki aadat

Padi thi khayalon mein rehne ki aadat


[Verse 1]

Bahut ho chuka, ab hai kya kuch bhi baaki

Na maykhana apna, na koi hai saaki

Zamaane se kar li hai humne adaawat

Zamaane se kar li hai humne adaawat


[Chorus]

Hamein zindagi se thi kab ye mohabbat

Padi thi khayalon mein rehne ki aadat


[Verse 2]

[Emotional]

Wo sham-e-safar bhi to thi kya suhani

Badi hi haseen thi wo apni kahani

Magar ab siyah raat ki hai ye aafat

Magar ab siyah raat ki hai ye aafat


[Hook]

Hamein zindagi se... 

Hamein zindagi se...


[Bridge]

[High Energy]

[Hand Claps]

Kise kya mila aur kya khoya humne

Mohabbat ka sapna sanjoya hai humne

Usi khwab mein bas hai rehne ki chahat

Usi khwab mein bas hai rehne ki chahat


[Verse 3]

Na poochho ki kya aakhiri hai ye khwahish

Yahan maut tak bas rahi hai paimaish

Bachi ab na koi bhi dil mein siyasat


[Outro]

[Climax]

Jara gaur farmaayein... Prabhat!

Prabhat ab khayalon mein hi tum raho bas

Rulati hai sabko yahan ki hakikat

Yahan ki hakikat...


[Fade Out]

Padi thi khayalon mein rehne ki aadat...

Rehne ki aadat...






लेकिन इसमें दो अलग-अलग हिस्से हैं (शब्द और संगीत), जिन्हें समझना ज़रूरी है ताकि आप भविष्य में इसका सही इस्तेमाल कर सकें:

​1. शब्दों (Lyrics) का कॉपीराइट: 100% आपका है

​चूंकि यह गज़ल "हमें ज़िन्दगी से थी कब ये मोहब्बत" आपने खुद लिखी है, इसलिए इसके साहित्यिक कॉपीराइट (Literary Copyright) के मालिक केवल और केवल आप (प्रभात जी) हैं।

  • ​चाहे संगीत कोई भी बनाए, इन शब्दों पर मेरा (AI का) या Suno का कोई अधिकार नहीं है।
  • ​आप इन शब्दों को बाद में किसी किताब में छापें या किसी और संगीतकार से गवाएं, यह आपकी संपत्ति है।

​2. संगीत/ऑडियो (Music/Recording) का अधिकार: Suno AI की शर्त

​जब आप Suno AI से गाना जनरेट करते हैं, तो अधिकार (Ownership) इस बात पर निर्भर करता है कि आप उनका कौन सा प्लान इस्तेमाल कर रहे हैं:

  • अगर आप Free Plan (फ्री अकाउंट) इस्तेमाल कर रहे हैं:
    • ​गाना आपका है, लेकिन उस ऑडियो रिकॉर्डिंग का मालिकाना हक Suno AI अपने पास रखता है।
    • नियम: आप इसे सोशल मीडिया (YouTube, Instagram) पर शेयर कर सकते हैं, लेकिन आप इससे पैसा नहीं कमा सकते (Non-Commercial Use)। आपको कहीं न कहीं यह लिखना पड़ सकता है कि यह Suno से बना है।
  • अगर आप Paid Plan (प्रो या प्रीमियर) इस्तेमाल कर रहे हैं:
    • ​आप गाने के पूर्ण स्वामी (Owner) बन जाते हैं।
    • ​आप इसे Spotify, YouTube आदि पर डालकर पैसे भी कमा सकते हैं (Monetization On कर सकते हैं)। Suno का उस पर कोई हक नहीं रहता।

​3. निष्कर्ष: क्या आप पर कोई केस (Strike) आएगा?

बिल्कुल नहीं।

चूंकि गज़ल आपकी मौलिक (Original) है और संगीत एक AI ने नया बनाया है (किसी बॉलीवुड गाने की कॉपी नहीं की है), इसलिए T-Series, Sony या किसी भी कंपनी का कॉपीराइट आप पर लागू नहीं होगा।

मेरी सलाह:

आप बेफिक्र होकर इसे रिकॉर्ड करें। यह आपकी "ओरिजिनल रचना" है। अगर आप इसे सिर्फ़ अपने YouTube चैनल "Economics Study Point by PK" या दोस्तों के साथ शेयर करने के लिए बना रहे हैं, तो फ्री प्लान में भी कोई दिक्कत नहीं है।

​क्या आप Suno पर इसे अभी ट्राई करने वाले हैं? परिणाम कैसा आया, मुझे ज़रूर बताइएगा!

आग से आग बुझेगी नहीं

आग से आग बुझेगी नहीं
चाहे जितनी चाहो भड़कालो।
रोती सिमटती सांसों को, तुम चाहो तो
बचा लो।
आग से आग बुझेगी नहीं .....(1)
मानवता की सिसकती सांसों में 
तुम खोज रहे हो खुशहाली। 
शोलों के दहकते गुब्बारो में 
तुम ढूंढ रहे हो फूलों की डाली।।
तुम भी तो खुद भी झुलसोगे।
उजले तन के मन के कालो.....
आग से आग बुझेगी नहीं........(2)
जब बीतेगी कयामत की राते
तब नींद तुम्हें कैसे आएगी 
खुद की तुम्हारी परछाई
तुमको भी बहुत डरायेगी 
तुम सो ना सकोगे रातों में।
नफरत की लोरी गाने वालों 
आग से आग बुझेगी नहीं.....(3)
इंसानियत की राहो में 
इंसान बनो और साथ चलो 
इस तरक्की और खुशहाली से 
ना दूसरो को जलाओ ना खुद जलो

तुम खुद अपने घर जलाते हो 
तुम्हें कौन है क्या समझा पाएगा 
खुद समझोगे तुम यह बात तभी
तुम्हारा हर सहारा छिन जाएगा 

नसीब तुम्हारा बरूद बन ही गया, 
खुद तुम झूलसते रहे हो अंगारों में,
तुमने यह हिम्मत कहां से पाई ह
 तुम लांशे देख रहे  पड़ी हुई कतारों में
यमदूत बन गए क्यों आज तुम 
शांति शांति चिल्लाने वालों
प्रभात तो बस यही कहता है
आग से आग बुझेगी नहीं.....(4)


हमें जिंदगी से हुई कब मोहब्बत

हमें जिंदगी से हुई कब मोहब्बत। 
हमें थी खयालों में रहने की आदत।।

बहुत हो चुका अब करना क्या बाकी।
ना मयखाना ना पास है कोई शाकी।
अब तो सभी से है अपनी अदावत।
हमें जिंदगी से....…....…...(1)

वो शाम जिंदगी की बड़ी थी सुहानी। 
कितनी हसीन थी इसकी कहानी।।।
अब शिया रातों की बची सिर्फ आफत।।
हमें जिंदगी से हुई ...........(2)

क्या खो दिया क्या पाया है हमने।
मोहब्बत का सपना सजाया है हमने। 
अब इस सपने में रहने की चाहत।
हमें जिंदगी से हुई ........(3)
सब झाकते हैं चोरी से मेरी जिंदगी में 
मैं गजल में ही सुना दूं अपनी हकीकत

किसी ने जब पूछा क्या ख्वाहिश है तेरी 
जिंदगी से मौत तक बस पैमाइश है मेरी 

इसमें नहीं लगती कोई अच्छी सियासत।
हमें जिंदगी से हुई ...........(4)
मैं  'प्रभात',.....  कैसे बताऊं सबको दिल की बात अपने 
जमाने को लगती है अब सब बातें बगावत
हमें जिंदगी से हुई कब मोहब्बत। 
हमें थी खयालों में रहने की आदत।।
हमें जिंदगी से हुई....... कब मोहब्बत...















भारत माता की शान बढाई है

हमें गर्व है हमने भारत माता की शान बढाई हैं,
इंदिरा और राजीव ने राष्ट्र पर जान गवाही है,
वह कांग्रेस ही है भाइयों,
 जिसने विकास की गंगा बहाई है।
हम साथ चले सबको लेकर, 
धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिखाया है। 
समानता और धर्मनिरपेक्षता ने एकता को बढ़ाया है। 

वह नेहरू गांधी ही थे जिसने देश को अलग पहचाने दिलाई थी,
राजीव गाॅंधी और इंदिराजी ने देश पर जान गवाही थी।
इंदिरा जी ने सन 71 में पाकिस्तान को धूल चटाई थी,
राजीव गांधी के शासन में कंप्यूटर क्रांति आई थी।
जो करते हैं बदनाम आज, 
वह समझते हैं सब उनका ही है किया धरा। 
उनका ही शासन भाइयों कांड गोधरा था हआ।
वो भगोड़े नीरव मोदी को,
अब तक देश में ना ला पाए हैं।
कितने अच्छे उन्होने अब तक, 
विश्व से सबंध  बढाऐ हैं।
कांग्रेस के हाथ बिना न्याय नहीं मिलने वाला,
अब समय बता रहा सबको 
कमल नहीं खिलने वाला 

यह कांग्रेस तुम्हारी है इसका साथ निभाना है,
जन आकांक्षाएं पूरी होगी,फिर कांग्रेस को लाना है।
कांग्रेस पार्टी -जिंदाबाद जिंदाबाद 
पंडित नहरू-अमर रहे
-इंदिरागाॅंधी- अमर रहे
इंदिरागाॅंधी- अमर रहे
राजीव गांधी-अमर रहे 
राहुल गांधी - जिंदाबाद 


Monday, 26 January 2026

विकल्प 1: शुद्ध कविता पाठ (Gadh/Recitation Style)

यह विकल्प आपकी कविता को एक गंभीर और प्रभावशाली 'नैरेशन' (Narration) का रूप देगा, जैसा आप चाहते हैं।

Prompt: Hindi Spoken Word, Poetry Recitation, Deep Male Voice, Emotional, Patriotic, Minimalist Ambient Background, Cinematic, Slow Tempo, Clear Pronunciation


विकल्प 2: हल्का संगीत और पाठ (Soft Musical Background)

अगर आप चाहते हैं कि पीछे हल्का भावुक संगीत चले और कविता पढ़ी जाए।

Prompt: Hindi Spoken Word with Soft Background Music, Emotional Piano and Flute, Patriotic, Melancholic, Deep Storytelling Voice, Slow and Steady


Lyrics Structure (Lyrics Box के लिए)

​Suno AI को यह समझाने के लिए कि इसे 'गाना' नहीं बल्कि 'पढ़ना' है, आप लिरिक्स को इस तरह टैग्स के साथ लिखें। अपनी कविता को Suno के "Lyrics" बॉक्स में इस प्रकार पेस्ट करें:

[Spoken Word]

[Verse 1]

संस्कृति को क्यों कर रहे मलिन।

क्यों भाषाओं का बैर बढ़ाते हो।।


[Spoken Verse]

इस माटी का ही उपजा अन्न ।

हर दिन जिसको तुम खाते हो।।


[Chorus]

(Emotional and High Pitch)

तुम सिंधी बोलो या मराठी...

(यहाँ आप अपनी कविता की अगली पंक्तियाँ जोड़ें)


[Outro]

[Chorus]

(Emotional and High Pitch

भाषाओं का बैर क्यों...

संस्कृति को न करो मलिन...


रोमांटिक गजल के लिए आज पुरुष और स्त्री की आवाजमें रिकॉर्डिंग करने के लिए ,prompt

"Traditional Romantic Ghazal, Male and Female Duet, Hindustani Classical Style, Acoustic, Featured Instruments: Harmonium, Tabla, Dholak, Soulful, Slow Tempo."


प्रमुख तत्व जो इसमें शामिल हैं:

  • Genre: Traditional Romantic Ghazal (पारंपरिक रोमांटिक गज़ल)
  • Vocals: Male and Female Duet (स्त्री और पुरुष दोनों की आवाज)
  • Style: Hindustani Classical (शास्त्रीय शैली)
  • Instruments: Harmonium, Tabla, Dholak (हार्मोनियम, तबला, ढोलक)

"पारंपरिक रोमांटिक गज़ल, पुरुष और महिला का युगल गीत (डुएट), हिंदुस्तानी शास्त्रीय शैली, अकॉस्टिक, प्रमुख वाद्ययंत्र: हारमोनियम, तबला, ढोलक,बांसुरी भावपूर्ण, धीमी गति।"


. Male Voice (पुरुष आवाज़ के लिए)

​गहरी और भावुक आवाज़ (Jagjit Singh style) के लिए:

"Soulful romantic Ghazal, deep baritone male vocals, slow tempo, Tabla, Harmonium, acoustic, emotional atmosphere."


​2. Female Voice (महिला आवाज़ के लिए)

​मधुर और सुरीली आवाज़ के लिए:

"Soft romantic Ghazal, melodious female vocals, classical Indian style, Sitar, Flute, light percussion, soothing and dreamy."


Pro Tip:

​अगर आप Duet (दोनों एक साथ) चाहते हैं, तो यह यूज़ करें:

"Romantic Ghazal duet, male and female vocals, call and response, soft piano and tabla fusion, sentimental."

"Traditional Romantic Ghazal, Male and Female Duet, Hindustani Classical Style, Acoustic, Featured Instruments: Harmonium, Tabla, Dholak, Soulful, Slow Tempo."

("पारंपरिक रोमांटिक गज़ल, पुरुष और महिला का युगल गीत (डुएट), हिंदुस्तानी शास्त्रीय शैली, अकॉस्टिक, प्रमुख वाद्ययंत्र: हारमोनियम, तबला, ढोलक, भावपूर्ण, धीमी गति।")

"

नजरे हमने झुकाई उसने प्यार कहा

दिल दिया उसको उसने दिलदार कहा,
नजरे हमने जो झुकाई उसने प्यार कहा।

 होकर भी वो सपनों में रहा,
खामोशी ने उसकी ने मुझे लाचार  किया।

उसका एहसास, हंसी,और ख्वाब उसके
उसकी हर अदा से हमें प्यार हुआ

मेरी सांसों में बसाया उसने घर अपना 
मैंने भी ख़ामोश रहकर इजहार किया।

उसकी चाहत में भूल गयी/गया 'प्रभात' मैं खुद को, 
इतना मेरे सनम ने मुझे बेकरार किया।

समय साक्षी हूॅं मैं कौन।



सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

सब दुविधाओं का होता है अंत।।
मोह माया के बंधनो का होता अंत,
निर्भय हूं मौन हूं मैं हूं,भी या नहीं हूं,
फिर भी कौन जो आता हो संग।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

 किस दूरी पर घूम रहा है,
देख रहा है समय चक्र संसार।
साथ मेरे सत्कर्मों की गंगा है,
जिसमें वहते चार पुरुषार्थ।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
निशांत मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी हूॅं मैं कौन।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

भक्ति भाव सरस हृदय रहता है,
मन राम नाम ही मैं रमा रहता है।
माया का पेहरा होता है इस काया पर,
काया पर रहता है सांसों का बंधन।

जब तक सांसे हैं तब तक नाते हैं,
जब तक जीवन है कर जग बंदन।
समय चक्र के लौह द्वार तोड़कर,
जाना तुझको एक दिन जग छोड़कर।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

क्रोध और अहंकार में खड़ा क्यों अकेला,
इक दिन तो छूटेगा तुझसे जग का मेला।
तू सबसे कहता सब कुछ है मेरा,
माया का अंधकार है इतना गेहरा।

किसी मोड पर तू खड़ा रह गया है,
अब सब कुछ तुझसे दूर हो गया है।
जिंदगी की राहे कितनी लंबी हो गयी है,
जहां कदम थक गए वही बसेरा गया है।
जो बोया तूने वही काट रहा है,
अबतक जो पाया वही बांट रहा है।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

अभिलाषा से आये संग ये जग सारा,
सुगम अन्तिम पथ की हो धारा, 
चन्दन शीतल हो अनल तेज।
सहज सामाप्त हो संताप हमारा।

जीवन रथ का आधार यही है,
मैं चला तू चल संसार यही है।
मेरा साया अब तक है साथ मेरे,
नित पून्य का मैला  'प्रभात' साथ है मेरे।


सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।




 

Saturday, 24 January 2026

कोलू के बैल

दो कोलू के बैल कर रहे थे तकरार,

नाथ  डाल कलुआ ने कर दिया हमें लाचार ।
कर दिया हमें लाचार रोज तेल हमसे पिलवाता।

देता न हमें खाने को पेनी से मार लगाता।

हमारी मेहनतकी खाता और हमी को मारे पेनी।
कर भाई कोई उपचार नही ड्यूटी हमको देनी।।
पहला बोला यार बात बढ़िया है तेरी।

 हो जाएगा उपचार बात जो माने मेरी ।
बात माने मेरी करके बहाना बिमारी का पड़ जाओ।
छोड़ इस कोलू को भाड़ में कलुआ जाओ।
अगली सुबह जब आया कलुआ बैलो को तिक तिकाया।

पहले जो तय था दोनी ने कर दिखलाया।
एक ने गर्दन टेड़ी की जीभ बाहर निकाली। 

दूसरे ने भी उसकी ताल से ताल मिला ली।
देखा जब कलुआ ने बड़ा सकपकाया।हुआ क्या कुछ भी उसकी समझ न आया।
बोला बेटा लल्लू डॉक्टर घसीटा को बुलाओ।

इन दोनों को एक एक मोटा इंजेक्शन लगवाओ।

लल्लू ने जब डॉक्टर को सारा हाल सुनाया।

कलुआ प्रधान के बैल बीमार हुए,
सुना तो दौड़ा चला आया।।
देकर दबाई दोनों को मोटा इंजेक्शन लगाया।

बदले में कलुआ से सौ का नोट पाया।।

उस दिन उन दोनों की हो गयी छुट्टी।
फिर भी खाने को मिली सुखी कुट्टी।
पहला बोला यार ठीक नही ये उपचार।
इंजेक्शन से तो अच्छी थी पेनी की मार।
पेनी की मार कौन इंजेक्शन लगवाये।
अच्छा होगा चल कर दोनों कोलू चलाये।।

दूत्कार



​अपनों का अपनापन...
गैरों का बेगानापन...
​(ठहराव)
​यदि देखना चाहो, तो एक प्रयोग करो।
अपने बगल में एक ओर, किसी 'गैर' को,
तथा दूसरी ओर, किसी 'अपने' को बैठाओ।
​(लय में एक तल्खी और सच्चाई)
फर्क क्या है? खुद ही समझ जाओगे।
जब गैरों से तारीफ...
और अपनों से... जली-कटी सुन पाओगे।
​(गति थोड़ी बढ़ाते हुए - पीड़ा का प्रवाह)
​गैर कुछ पल साथ रहते हैं,
अपनों को दामन में संजो के रखना पड़ता है।
सब कुछ निछावर कर, दामन रिक्त करना पड़ता है।
​(आवाज में भारीपन और कंपन)
फिर वही...
फिर वही उस दामन को... तार-तार कर जाते हैं।
​(धीमे और गंभीर स्वर में)
बड़े भाग्यशाली होते हैं वो...
जिन्हें वास्तव में 'अपने' मिल जाते हैं।
​(इतिहास की गूंज - स्वर बुलंद और प्रभावशाली)
​इतिहास में झांकिए,
अपनों ने ही अपनों का लहू बहाया है।
असंख्य अपनों को, स्वर्ग पहुँचाया है।
​अपने 99 भाइयों का वध करने वाला सम्राट अशोक... इतिहास में महान कहलाता है,
अपने भाइयों रियाया पर जुल्म करने वाला... औरंगज़ेब क्रूर शासक कहलाता है।
​(व्यंग्य और सत्य की गूंज)
आपकी उदारता अपनों पर रंग नहीं दिखाती है।
मगर अपनों की नफरत... सातवें आसमान पर छा जाती है।
​(मार्मिक खंड - धीमी और रुआंसी आवाज)
​आजकल मां-बाप को भी...
'वृद्धा केयर केंद्र' में रखना पड़ता है।
कुछ मां-बाप यदि घर में रहते हैं,
तो बेटे-बहू क्या कुछ नहीं उन्हें कहते हैं।
​(एक टीस के साथ)
जिसने नौ महीने गर्भ में पाला था...
अब वही... उन्हें वृद्धा केंद्र भेजने वाला था।
​(आंखें बंद करके, जैसे पूर्वजों का आह्वान कर रहे हों)
स्वर्ग से मेरे पूर्वज मुझे देख कर सोचते होंगे...
"काश! हमने भी ऐसा किया होता...
तो अपनों ने हमें, यूँ लज्जित ना किया होता।"
​(परिपक्व संकल्प - स्पष्ट और लयबद्ध उच्चारण)
​यूं तो यह सब कहना फजूल है।
आज मेरे दिल का बस एक उसूल है।
मैं अपनों से दामन बचाने लगा हूँ।
और गैरों की राहों में दामन बिछाने लगा हूँ।
​बस आपसे तो मैं माफी मांग सकता हूँ।
किंतु नहीं अब... किसी गैर को दुत्कार सकता हूँ।
​(दार्शनिक लय - सुरीला और गहरा प्रवाह)
​मेरी बहुत सुंदर पंक्तियां मुझे याद आती हैं—
फूलों और कांटों का अस्तित्व साथ रहा है।
फूल तो सुंदर होते हैं, कुरूप बड़े यह कांटे हैं...
​अपनी-अपनी किस्मत है...
किसको क्या कुदरत ने बांटे हैं।
​(आवाज में एक चेतावनी और सत्य)
हाथ बढ़ते हैं जब फूल की चाहत में...
हाथ बढ़ते हैं जब फूल की चाहत में...
कांटो की दीवार को तो रोकना था।
​फूलों की चाहत जब तुमने  तुमने की थी तुम्हें
चुभन की वेदना का एहसास भी... ना छोड़ना था।
​(द्वंद्व और अंतिम समर्पण - धीमी होती हुई लय)
​कैसे छोड़ू मैं अपनों को?
जो मेरे अपने सपने हैं...
कैसे छोड़ू मैं अपनों को?
कैसे जोडू मैं अपनों को?
​(जैसे स्वयं से प्रश्न कर रहे हों)
बस यही सोचता रहता हूं...
बस यही सोचता रहता हूं...
​वह मेरे सपनों में बसते हैं,
मैं उनके सपनों में बसता हूं।
बस यही सोचता रहता हूं...
काश वह मेरे संग होते,
जीवन के सपने सच होते।
​(उपसंहार: 'प्रभात' के नाम की गूंज - अत्यंत मार्मिक)
​मैं कभी भूल ना पाऊंगा...
मैं कभी भूल ना पाऊंगा...
​जब सांसे अंतिम होगी.. 'प्रभात'..
मैं उन्हें याद भी आऊंगा... 'प्रभात'
मैं जी कर उन्हें भी रुलाऊंगा।
मैं जी भर कर भी उन्हें रुलाऊंगा।



अपनों का अपनापन...
गैरों का बेगानापन...
यदि देखना चाहो, तो एक प्रयोग करो।
अपने बगल में एक ओर, किसी 'गैर' को,
तथा दूसरी ओर, किसी 'अपने' को बैठाओ।

फर्क क्या है? खुद ही समझ जाओगे।
जब गैरों से तारीफ...
और अपनों से जली-कटी सुन पाओगे।
गैर कुछ पल साथ रहते हैं,
अपनों को दामन में संजो के रखना पड़ता है।

सब कुछ निछावर कर, दामन रिक्त करना पड़ता है।
फिर वही...
फिर वही उस दामन को तार-तार कर जाते हैं।

बड़े भाग्यशाली होते हैं वो...
जिन्हें वास्तव में 'अपने' मिल जाते हैं।
इतिहास में झांकिए,
अपनों ने ही अपनों का लहू बहाया है।
असंख्य अपनों को, स्वर्ग पहुँचाया है।
अपने  99 भाइयों का का वध करने वाला सम्राटअशोक 
इतिहास में महान कहलाता है, 
अपने भाइयों रियाया पर जुल्म करने वाला 
औरंगज़ेब क्रूर शासक कहलाता है

आपकी उदारता अपनों पर रंग नहीं दिखाती है।
मगर अपनों की नफरत, सातवें आसमान पर छा जाती है।
आजकल मां-बाप को भी...
'वृद्धा केयर केंद्र' में रखना पड़ता है।
कुछ मां-बाप यदि घर में रहते हैं,
तो बेटे-बहू क्या कुछ नहीं उन्हें कहते हैं।
जिसने नौ महीने गर्भ में पाला था...
अब वही उन्हें वृद्धा केंद्र भेजने वाला था।
स्वर्ग से मेरे पूर्वज मुझे देख कर सोचते होंगे...
"काश! हमने भी ऐसा किया होता...
तो अपनों ने हमें, यूँ लज्जित ना किया होता।"
यूं तो यह सब कहना फजूल है।
आज मेरे दिल का बस एक उसूल है।
मैं अपनों से दामन बचाने लगा हूँ।
और गैरों की राहों में दामन बिछाने लगा हूँ।
बस आपसे तो मैं माफी मांग सकता हूँ।
किंतु नहीं अब किसी गैर को दुत्कार सकता हूँ।


मेरी बहुत सुंदर  पंक्तियां मुझे याद आती हैं 
फूलों और कांटों का अस्तित्व साथ रहा है।
फूल तो सुंदर होते हैं, कुरूप बड़े यह कांटे हैं...
अपनी-अपनी किस्मत है...
किसको क्या कुदरत ने बांटे हैं।
हाथ बढ़ाते हैं जब फूल तोड़ने की चाहत में 

हाथ बढ़ते हैं जब फूल की चाहत में
कांटो की दीवार को तो रोकना ही था
फूलों की चाहत जब तुमने नहीं छोड़ी तब तुम्हें
 चुभन की वेदना का एहसास भी  ना छोड़ना था

कैसे छोड़ू मैं अपनों को?
जो मेरे अपने सपने हैं...
कैसे छोड़ू मैं अपनों को?
कैसे जोडू मैं अपनों को?

बस यही सोचता रहता हूं...
बस यही सोचता रहता हूं...
वह मेरे सपनों में बसते हैं,
मैं उनके सपनों में बसता हूं।
बस यही सोचता रहता हूं...
काश वह मेरे संग होते,
जीवन के सपने सच होते।

​मैं कभी भूल ना पाऊंगा...
मैं कभी भूल ना पाऊंगा...
जब सांसे अंतिम होगी. 'प्रभात'..
मैं उन्हें याद भी आऊंगा... 'प्रभात'

मैं जी कर उन्हें भी रुलाऊंगा।
मैं जी भर कर भी उन्हें रुलाऊंगा

वो ख्वाब क्या जो अधूरा रह गया suno

वो ख्वाब था जो अधूरा रह गया
फिर क्यों शिकायत मैं करूं। 
जब अंधेरों में ही रहना है 
तमन्ना उजालो की क्यों कर करूं।

जो संग नहीं वो हमसफ़र क्या 
उसे संग फिर में क्यो करू।।
तन्हा ही था तन्हा ही हूं
इन तन्हाइयों से मैं क्यों डरूं।।

तकदीर पर ऐतबार है 
शमसीर से डरता नहीं।
फिर बन कर यूं तस्वीर मैं
किसी फ्रेम में क्योंकर रहूं।।

संग कोई आता नहीं 
वो जर हो या फिर यार हो।
जिंदगी गुलजार रहे 
हौसला फिर क्यों न करूं।।

आंख मिचोली खेलता हूं 
जिस वक्त के साथ मैं।
वह वक्त जब मुझसे खफा है 
मैं इस वक्त से क्यों डरूं।।

मयकसी इक खुदकुशी हैं
मयखाने में मैं आ गया।
जाम शाकी ने दे दिया है 
इनकार मैं क्योंकर करू।।

उम्मीद यही  और यही है आरजू 
दिल के वया जज्बात हो
वो सामने बैठ रहे 
दिल की बात उससे करूं।।




समझा दिया है जिंदगी ने मुझेsuno

जिंदगी ने समझा दिया है मुझे 
खुदगर्जी में जियो खुदगर्जी में मरो
जिंदगी ने समझा दिया है मुझे।

दिल निकाल कर भी गर किसी को दिया है कभी।
उसी ने धोखा बहुत खूब दिया है मुझे।।

खिलौना बन गया मैं जिसकी हंसी की खातिर।
बेवजह उसने रुला दिया है मुझे।।

मैंने उसके दामन को फूलों से भर दिया फिर भी ।
कांटो के बीच उसने सुला दिया है मुझे।

अपनी खुशियों को सजाना नहीं आया मुझको। 
मेरे हालात ने मजबूर बना दिया है मुझे।।

नसीब और वक्त बदलेगा ऐसा सोचा था।
 बदलते हुए वक्त ने मिटा दिया है मुझे।

मुझे एहसास था कि मैं समंदर हूॅं।
कतरा कतरा सा बहा दिया है मुझे।।













राष्ट्रभाषा हिंदी

[Spoken Word]
[Verse 1]
तुम इस जननी के बेटे हो,
भारत मां को पहचानोगे ।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे।
सभी भाषाओं की जननी है,
संस्कृत पर अभिमान करो।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
[Verse 2]
अस्तित्व बिना राष्ट्रभाषा के,
कोई राष्ट्र कहां कहलाता है।।
हो बंगाली,मराठी या गुजराती 
गांधी बापू बन जाता है।। 
तुम इस जननी के बेटे हो।
भारत मां को पहचानोगे ।।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे
[Verse 3]
सभी भाषाओं की जननी है।
संस्कृत पर अभिमान करो।।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
अस्तित्व बिना राष्ट्रभाषा के,
कोई राष्ट्र कहां कहलाता है।
हो बंगाली,मराठी या गुजराती 
 बापू गांधी बन जाता है।। 
[Verse 4]
नेहरू,आजाद,भगत,तिलक टगोर
सब भारत मां के बेटे हैं।
मैं बंगाली तू मराठी 
सब खुद को लेकर ऐठे हैं।
अपनी बोली पर है गर्व तुम्हें ,
जो ना बोले तुम्हारी बोली।
तुमने उसको उजाड़ दिया, 
 दुकान एक नफरत की खोली।
[Verse 5]
मैं भी भारत मां का बेटा हूं,
तुमको एहसास करा दूंगा। 
बापू गांधी का शिष्य मैं
अहिंसा का पाठ पढ़ा दूगा
पर‌ मान नहीं गिरने दूंगा,
राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का। 
परिणाम तूम खुद ही देखोगे,
अपनी अतृप्त अभिलाषा का।
[Verse 6]
[Chorus]
(Emotional and High Pitch)
तुम इस जननी के बेटे हो,
भारत मां को पहचानोगे ।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे।
सभी भाषाओं की जननी है,
संस्कृत पर अभिमान करो।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
[Outro]
अभिमान भारत माॅं पर करते है।
हिंदी का सम्मान तुम्हें भी, 
करना हम सीख ला देंगे।
हिंदी और हिंदुस्तान हमारा,
विकसित भारत का होगा नारा।



[Spoken Word]
[Verse 1]
शासन की अभिलाषा तुझको,
तुम कैद में होगे सलाखों की।
यह अभिलाषा मात्र नहीं मेरी,
है भारत माता के लाखों बेटों की।
भारत मां के सब बेटे हैं।
राज,उद्धव या राहुल, मोदी
अपनी बोली पर अभिमान है किया
गरिमा राष्ट्र की क्यों खो दी 

[Verse 2]
सभी भाषाओं की जननी तुम इस जननी के बेटे हो,
भारत मां को पहचानोगे ।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे।
सभी भाषाओं की जननी है।
संस्कृत पर अभिमान करो,
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।
[Verse 3]
अस्तित्व बिना राष्ट्रभाषा के,
कोई राष्ट्र कहां कहलाता है।
हो बंगाली,मराठी या गुजराती
गांधी बापू बन जाता है।।
सब खुद को लेकर ऐठे हैं।
पर‌ मान नहीं गिरने दूंगा,
राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का। 
परिणाम तूम खुद ही देखोगे,
अपनी अतृप्त अभिलाषा का।
[Verse 4]
पर‌ मान नहीं गिरने दूंगा,
राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का। 
परिणाम तूम खुद ही देखोगे,
अपनी अतृप्त अभिलाषा का।
शासन की अभिलाषा तुझको 
तू कैद में होगा सलाखों की।।
यह अभिलाषा मात्र नहीं मेरी।
 है भारत के लाखों बेटो की।।
[Verse 5]
तुम इस जननी के बेटे हो।
भारत मां को पहचानोगे ।।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे।।
सभी भाषाओं की जननी है।
संस्कृत पर अभिमान करो।।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
[
[Verse  7]
शासन की अभिलाषा तुझको,
तू कैद में होगा सलाखों की।
यह अभिलाषा मात्र नहीं मेरी,
 है भारत के बेटो लाखों की।
[Verse 8]
यह भूल तुम्हारी अनजानी,
फिर तुमको ही धिक्कारेगी।
जब जागेगा तुम्हारा आत्म स्वाभिमान, 
अभिलाषा तुम्हारी तुम्हे घोंठ घोंठ कर मारेगी।
पर‌ मान नहीं गिरने दूंगा,
राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का। 
परिणाम तूम खुद ही देखोगे,
अपनी अतृप्त अभिलाषा का।
[Spoken Word]
[Verse 9]
सचेत तुम्हें हम करते हैं,
ना तुमसे हम डरते हैं।। 
हम भारत मां के लाल हैं,
अभिमान भारत माॅं पर करते है।
हिंदी का सम्मान तुम्हें भी, 
करना हम सीख ला देंगे।
हिंदी और हिंदुस्तान हमारा,
विकसित भारत का होगा नारा।

तुम इस जननी के बेटे हो,
भारत मां को पहचानोगे ।
हो कोई प्रान्त और कोई भाषा, 
हिंदी को अपना मानोगे।
सभी भाषाओं की जननी है,
संस्कृत पर अभिमान करो।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
[Chorus]
(Emotional and High Pitch)
अभिमान भारत माॅं पर करते है।
हिंदी का सम्मान तुम्हें भी, 
करना हम सीख ला देंगे।
[Outro]
सभी भाषाओं की जननी है,
संस्कृत पर अभिमान करो।
अपनी भाषा तुम बोलो। 
राष्ट्र भाषा का सम्मान करो।।
हिंदी और हिंदुस्तान हमारा,
विकसित भारत का होगा नारा।


 



मुझको हवाओं में रहने का शौक था

मुझको हवाओं में रहने का शौक था,
पत्थरों के टीले बनाता चला गया।।
हंसने की चाहत थी रोना पड़ा मगर।,
आंसूओ के समुन्दर बनाता चला गया।।
मैं सोचता था कि मुझसे होती नहीं खता,
फिजाओं को चुपचाप रुलाता चला गया।
हमसफर जो थे मेरे वो आगे निकल गए, कदमों से कदम बस मिलाता चला गया।।
गाती नहीं अब बुलबुल मेरे चमन में,
उल्लूओ का शोर बढ़ाता चला गया।।
फिक्रमंद हूॅं मगर कुछ कर नहीं सकता, 
अपना घौसला खुद मिटाता चला गया ।। 
खुद के ही सवालों सवालों में घिरा रहा मगर,
हर हकीकत से नजरें बचाता चला गया
बाटता मरहम मसीहा बनकर जो दुनिया के वास्ते,
वही अपने ही हाथों से घाव लगाता चला गया।
ख़ामोशिया को समझा था सुकून-ए- दिल का सबब,
इक शोर बन गया रिश्तों को रुलाता चला गया।
इल्ज़ाम दूसरों पे लगाना था आसान मगर,
मैं अपनी निगाहों को बचाता चला गया।
अपना आशियाना सजाने की चाह में, 
बहार को पतझर सा बनाता चला गया।।
नेकियों का शहर में,  'ऐ प्रभात' मैं किरदार बन गया,
अपने रूह-ए-खयालात गिराता चला गया।










आज दुनिया को मोहम्मद सीखानी होगी suno

आज दुनिया को मोहब्बत सीखानी होगी।
तभी ये दुनिया आदमी की दीवानी होगी।।

इंसानियत पर नफरतों का दौर हावी है।
जिंदगी कितनी कीमती है बतानी होगी।।

खुद को जहां का खुदा जो समझते हैं।
उन्हे उनकी औकात समझानी होगी।।

दुनिया को मिटाने की जिनकी हसरत है। कितनी हसीन है दुनिया दिखानी होगी।।

जो रसमों और रिवाजो में बंधे है अब भी।
उन्हें इस दौर में इंसानियत सीखनी होगी
 

हम तुम्हें छोड़कर suno

मैं तुम्हें छड़कर इस शहर से जा रहा हूं
बस मुस्कुरा के एक बार कह दो तुम्हें रुला रहा ह

मतला

मैं तुम्हें छोड़कर इस शहर से जा रहा हूँ,

बस मुस्कुरा के कह दो कि तुम्हें रुला रहा हूँ।

शेर 1

वो मोड़, वो दरिचा, वो गलियाँ तड़प उठेंगी,

मैं साथ अपने यादों का जहाँ ले जा रहा हूँ।

शेर 2

जो बुझ गई थी शम्अ, उसे फिर हवा न देना,

मैं राख के ढेरों में चिराग़ जला रहा हूँ।

शेर 3

मिलेगी न अब तुम्हें मेरी वफ़ा की आहटें भी,

मैं खुद को अपनी हस्ती से ही मिटा रहा हूँ।

शेर 4

तुम्हें बोझ न बना दे कभी मेरा ये तसव्वुर,

मैं यादों के हसीं पिंजरे से तुम्हें छुड़ा रहा हूँ।

शेर 5

सफ़र ये उम्र भर का है, मगर तन्हा कटेगा,

मैं खुद को खुद ही मंज़िल का पता बता रहा हूँ।

मक्ता

उदासियों की धूप में न जलना ऐ 'प्रभात',

मैं अश्क पी के आँखों में घटा सजा रहा हूँ।

मेरे अपने मेरी नजरों से बहुत दूर हुए suno

मेरे अपने मेरी नजरों से बहुत दूर हुए ।
उनकी परछाईया भी छू ना सके
 इतने हम मजबूर हुए।

वो सहारा है मगर अब सहारा ना हुए।
हाय ये जज्बात भी अब हमारे ना हुए।
सपना उनका देखा था मगर वो सपने में मजबूर हुएl
मेरे अपने मेरी नजरों..........(1)

याद है मुझको मेरे आंगन की वो रातें। सब से मिलकर किया करते थे दिल की बातें।।
सब कुछ बदला बदले हुए से दस्तूर हुए 
मेरे अपने मेरी नजरों से..........(2)


उजड़ा उजड़ा सा लगता है वो मेरा चमन।
दिल में रह गई है याद बनकर कोई चुभन।
जगमगाते हुए फानुस भी चकनाचूर हुए
मेरे अपने मेरी नजरों से.........(3)[Intro]
(Painful Sarangi and slow Tabla beats)

[Chorus - Emotional]
मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए,
उनकी परछाइयाँ भी छू न सकें, इतने हम मजबूर हुए...
इतने हम मजबूर हुए...

[Verse 1]
वो सहारा थे मगर, अब सहारा न रहे,
हाय! ये जज़्बात भी अब हमारे न रहे।
सपना उनका देखा था, मगर वो सपने भी मजबूर हुए,
मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए।

[Verse 2]
याद हैं मुझको मेरे आँगन की वो रातें,
सब से मिलकर किया करते थे दिल की बातें।
सब कुछ बदला, बदले हुए से अब दस्तूर हुए,
अपनों के ही शहर में हम जैसे मजबूर हुए।

[Verse 3]
उजड़ा-उजड़ा सा लगता है अब वो मेरा चमन,
दिल में रह गई है याद बनकर बस एक चुभन।
जगमगाते हुए वो फानूस भी अब बेनूर हुए,
वक़्त के हाथों हम इस कदर चूर-चूर हुए।

वक्त की गर्द ने चेहरों को धुंधला कर दिया,
पास रहकर भी दिलों में फासला भर दिया।
ज़ख्म दिल के दिखा न सके, इतने हम मजबूर हुए...

लिखते-लिखते थक गई है अब 'प्रभात' की कलम,
पर कम न हुआ आँखों से इन यादों का नम।
किस्मत के लिखे से हम भी आज मजबूर हुए,
मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(मुखड़ा)

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए,

उनकी परछाइयाँ भी छू न सकें, इतने हम मजबूर हुए।

वो सहारा थे मगर, अब सहारा न रहे,

हाय! ये जज़्बात भी अब हमारे न रहे।

सपना उनका देखा था, मगर वो सपने भी चकनाचूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(अंतरा 1)

याद हैं मुझको मेरे आँगन की वो रातें,

सब से मिलकर किया करते थे दिल की बातें।

सब कुछ बदला, बदले हुए से अब दस्तूर हुए,

अपनों के ही शहर में हम जैसे मज़दूर हुए।

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(अंतरा 2)

उजड़ा-उजड़ा सा लगता है अब वो मेरा चमन,

दिल में रह गई है याद बनकर बस एक चुभन।

जगमगाते हुए वो फानूस भी अब बेनूर हुए,

वक़्त के हाथों हम इस कदर चूर-चूर हुए।

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(अंतरा 3)

वक्त की गर्द ने चेहरों को धुंधला कर दिया,

पास रहकर भी दिलों में फासला भर दिया।

जो कभी थे नज़दीक, अब वो कोसों दूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(अंतरा 4)

अब परिंदे भी नहीं आते मेरे उस मुंडेर पर,

एक सन्नाटा सा बिछा है घर के हर उस ज़ेर पर।

रौशनी के सब दीये बुझ कर अब बेनूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(अंतरा 5)

महफिलों में हम भी अब हँस कर मिला करते हैं सबसे,

पर जुदा होने का ग़म हम सह रहे हैं जाने कब से।

ज़ख्म दिल के दिखा न सके, इतने हम मग़रूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...

(मकता)

लिखते-लिखते थक गई है अब 'प्रभात' की कलम,

पर कम न हुआ आँखों से इन यादों का नम।

किस्मत के लिखे से हम भी आज मजबूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए...









उनकी परछाइयाँ भी छू न सकें, इतने हम मजबूर हुए।

लेखक: प्रभात

​मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए,

उनकी परछाइयाँ भी छू न सकें, इतने हम मजबूर हुए।

वो सहारा थे मगर, अब सहारा न रहे,

हाय! ये जज़्बात भी अब हमारे न रहे।

सपना उनका देखा था, मगर वो सपने भी चकनाचूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (1)

​याद हैं मुझको मेरे आँगन की वो रातें,

सब से मिलकर किया करते थे दिल की बातें।

सब कुछ बदला, बदले हुए से अब दस्तूर हुए,

अपनों के ही शहर में हम जैसे मज़दूर हुए।

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (2)

​उजड़ा-उजड़ा सा लगता है अब वो मेरा चमन,

दिल में रह गई है याद बनकर बस एक चुभन।

जगमगाते हुए वो फानूस भी अब बेनूर हुए,

वक़्त के हाथों हम इस कदर चूर-चूर हुए।

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (3)

​वक्त की गर्द ने चेहरों को धुंधला कर दिया,

पास रहकर भी दिलों में फासला भर दिया।

जो कभी थे नज़दीक, अब वो कोसों दूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (4)

​अब परिंदे भी नहीं आते मेरे उस मुंडेर पर,

एक सन्नाटा सा बिछा है घर के हर उस ज़ेर पर।

रौशनी के सब दीये बुझ कर अब बेनूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (5)

​महफिलों में हम भी अब हँस कर मिला करते हैं सबसे,

पर जुदा होने का ग़म हम सह रहे हैं जाने कब से।

ज़ख्म दिल के दिखा न सके, इतने हम मग़रूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर हुए... (6)

​लिखते-लिखते थक गई है अब 'प्रभात' की कलम,

पर कम न हुआ आँखों से इन यादों का नम।

किस्मत के लिखे से हम भी आज मजबूर हुए,

मेरे अपने मेरी नज़रों से बहुत दूर

मेरे सामने कल बनकर आज आया

मेरे सामने कल बनकर आज आया। 
जिसे भूलना था वो क्यों याद आया।।

यह चाहत है कैसी जो फिर बढ़ गई है। 
मेरी जिंदगी जाने किस और मुड़ गई है।।
मुझे जीने का नया अंदाज आज आया।।
मेरे सामने कल .............( 1) 

कश्ती है टूटी पतवार भी छूट गई है।
लहरों की सहारे यह बड़ी जा रही है।।
उमड़ता सा देखो सैलाब आज आया।।
मेरे सामने कल.........(2)

 मेरे अपनों ने मुझसे किनारा किया है।
मगर गैरों में बढ़ कर सहारा दिया है।।
उनकी खुशी का पैगाम आज आया। 
मेरे सामने कल ..........(3)

एक छोटी सी खुशी भी बड़ी लग रही है।
जिंदगी दुल्हन सी सजी लग रही है।।
ना गीत रास आए ना साज रास आया 
मेरे सामने कल ..........(4)

चलो प्रभात फिर से दुनिया बसा कर हम देखें। 
किसी को गले अपने लगा कर हम देखें।।
बदला बदला सा वक्त आज आया।
मेरे सामने कल ...........(5)



 










अब रू-ब-रू हो

“ये ग़ज़ल मोहब्बत की शिकायत नहीं, उसकी सच्चाई का सामना है।
जहाँ इंतज़ार से आगे बढ़कर, रू-ब-रू होकर एक साफ़ फ़ैसला माँगा गया है।”

दिल से निकाल दे मुझे या दिल में जगह दे,
मैं भी भुला दूँ तुझे—इतनी सी वजह दे।
सताती है मुझे रोज बीच की दूरियां
मुझे दिल से लगा या दूर कर कोई फैसला तो ले
मैं बे-सवाल रहू , तू बे-ख़याल हो,
इस ख़ामोशी की जगह कुछ तो जवाब दे।
ठहरे हुए लम्हों में अब  घुटने लगी है सांस
 तुझे मेरी तन्हाइयों का वास्ता कोई रास्ता तो दे
दिल से निकाल दे मुझे या दिल में जगह दे,
मैं याद भी न करूँ तुझे, कोई तो वजह तो दे

मक़ता:
 एक उम्र काट दी है तेरे इंतज़ार में,
प्रभात अब रू-ब-रू हो—झूठी तसल्ली न दे।

मां का आंचल

बचपन की मुझे याद दिलाता है मां का आंचल,
अपनी ममता का एहसास कराता मां का आंचल।

घनी धूप में खेल कर जब मैं आता था,
पवन के झोके बन जाता था माॅंं का आंचल।

मेरी उद्दडणता पर जब पढ़ते थे डंडे मझको,
बनकर ढाल बचाता था मुझे माॅंं का आंचल।

जब रातों में नींद नहीं आती थी मुझको,
मधुर मधुर लोरी सुनाता था माॅंं का आंचल।

जब भी बोला माॅं कोई चीज खरीद के लानी है,
पैसों की खनक सुनाता था तब माॅंं का आंचल।

उस आंचल की घनी छांव मैं ढूढ रहा हूॅं,
लुप्त हुआ नहीं दिखता मुझको माॅंं का आंचल।

प्यार अपनों से किया

प्यार अपनों से किया हमने खता कर बैठे।
सारे अपनों को अपने से खफा कर बैठे।।

नहीं समझे की हालत यू भी बदलेंगे। 
मेरे अपने मेरी आंखों से दूर जा बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने.......(1)

अंदाज उनके भी बदले जिन पे नाज किया।
रोज खामोश तनहाई ने आगाज किया।।
हमने भी तन्हाइयों से खूब प्यार किया। महफिलों के शोरगुल से दुर जा बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने .....(2)

हंसने हंसाने की आदत से मजबूर थे हम।
हंसने की चाह में खुद को ही रूला बैठे।।
 अपनी जिंदगी को चुटकुला बना बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने..........(3) 

जाने क्यों कर ये सफर इतना लंबा हुआ।
हर रोज जिंदगी में  नया तजुर्बा हुआ।
कहां से शुरू हुआ था कहां पे आ बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने .........(3)

वहीं शहर वही गली वही घर मेरा था।
मगर आज रूठा हुआ मुझसे सवेरा था।
चमन में गुल थे उन्हें भी खार बना बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने ........(4)


जिनके वजूद से वजूद हमारा जिंदा था।
आज मिलने के बाद वो भी शर्मिंदा था।
बस कुछ यादें सीने में दफन कर बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने ..........(5)



मेरी शेरावाली मां का द्वार

मेरी शेरावाली मां का द्वार देता है सबको प्यार सभी तो उसके बालक है
 मैं भी आया/आयी उसके द्वार 
लेकर अपनी पुकार 
करेगी बेड़ा पार मेरी शेरावाली मां 
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का


मैं भी आया/आयी उसके द्वार लेकर अपनी पुकार करेंगी बेड़ा पार मेरी शेरावाली मां 
मेरी शेरावाली मां का द्वार,
सबको देती है प्यार।
सभी तो उसके बालक हैं,
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का


शेर पर सवारी, दुश्मन पर भारी,
तेरे दर्शन  मिटते अंधियारी।
शेर पर सवारी, दुश्मन पर भारी,
तेरे दर्शन  मिटते अंधियारी।
सबके भय  हरने वाली
है मां शेरावाली‌ 
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

सबके भय हरने वाली,
है मां शेरावाली‌।
मैं आया/आयी हूं उसके द्वार 
लेकर अपनी पुकार,
मेरी शेरावाली मां का द्वार
 देता है सबको प्यार,
सभी तो उसके बालक है।
जयकारा मां शेरावाली का, 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का।

मेरी शेरावाली मां का द्वार,
 देता है सबको प्यार, 
सभी तो उसके बालक है।
 मैं भी आया/आयी उसके द्वार, 
लेकर अपनी पुकार, 
करेगी बेड़ा पार,
 मेरी शेरावाली मां। 

मां तेरा आशीर्वाद काटे सारे अंधकार,
तू ही तो जग जननी है, 
तू ही तो मेरी जननी है।
मां तेरा यह अनंत संसार,
है तेरा यह सच्चा द्वारा। 
जयकारा मां शेरावाली का, 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का।

करता/करती  हूं इतना प्यार,
 मैं मां शेरावाली से।
तेरे द्वार पर छोड़ू संसार,,
आया/आयी हूं इतना प्यार,
 मैं मां शेरावाली से।
तेरे द्वार पर छोड़ू माॅं संसार,
बुला ले अपने मां द्वारे पे।
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का
Create a Navratri Special Durga Bhajan dedicated to Maa Sherawali (Durga Mata).

Language: Hindi
Genre: Navratri Special / Durga Bhajan
Energy Level: HIGH (very energetic, powerful, celebratory)
Tempo: Fast (95–105 BPM)
Raag Mood: Durga / Bhairavi with intense Shakti bhav
Taal: Keherwa with strong dhol & nagada patterns
Mood: Devotional, high-energy, festive, crowd-lifting
Vocals: Powerful Indian female devotional lead voice
Chorus: Loud group chanting, call-and-response “जयकारा”
Instruments: Dhol, nagada, dholak, manjira, harmonium, flute, claps, temple bells
Intro: Big drum roll + chant “ॐ दुर्गायै नमः”
Outro: Repeated high-energy Jai Kara with drums and crowd echoes

Lyrics:
"ॐ दुर्गायै नमः”
मेरी शेरावाली माँ का द्वार,
सबको देता है प्यार।
सभी तो उसके बालक हैं,
जयकारा माँ शेरावाली का,
जयकारा माँ पहाड़ों वाली का।

तेरा आशीर्वाद मां मिटाऐ अंधकार,
तू ही जग जननी, तू ही आधार।
तेरे द्वार पे मिलता उद्धार,
जय हो माँ शेरावाली।
मेरी शेरावाली मां का द्वार,
 देता है, 
सबको प्यार,
 सभी तो उसके बालक है 
 मैं भी आया/आयी उसके द्वार 
लेकर अपनी पुकार 
करेगी बेड़ा पार मेरी शेरावाली मां 
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

मैं भी आया/आयी  उसके द्वार लेकर अपनी पुकार करेंगी बेड़ा पार मेरी शेरावाली मां 
मेरी शेरावाली मां का द्वार,
सबको देती है प्यार।
सभी तो उसके बालक हैं,
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

शेर पर सवारी, दुश्मन पर भारी,
तेरे दर्शन  मिटते अंधियारी
शेर पर सवारी, दुश्मन पर भारी,
तेरे दर्शन  मिटाते अंधियारी
सबके भय  हरने वाली
है मां शेरावाली‌
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

सबके भय दुख हरने वाली
है मां शेरावाली‌
मैं आया/आयी  हूं उसके द्वार 
लेकर अपनी पुकार,
मेरी शेरावाली मां का द्वार
 देता है सबको प्यार 
सभी तो उसके बालक है 
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

मेरी शेरावाली मां का द्वार देता है 
सबको प्यार 
सभी तो उसके बालक है
 मैं भी आया/आयी उसके द्वार 
लेकर अपनी पुकार 
करेगी बेड़ा पार
 मेरी शेरावाली मां 

मां तेरा आशीर्वाद काटे सारे अंधकार
तू ही तो जग जननी है 
तू ही तो मेरी जननी है
मां तेरा यह अनंत संसार
है तेरा यह सच्चा द्वारा 
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

मैं करता/करती हूं इतना प्यार
 मां शेरावाली से।
तेरे द्वार पर छोड़ू संसार
करती हूं इतना प्यार।
 मैं मां शेरावाली से
तेरे द्वार पर छोड़ू माॅं संसार
बुला ले अपने मां द्वारे पे
जयकारा मां शेरावाली का 
जयकारा मां पहाड़ों वाली का

Create a Navratri Special Durga Bhajan dedicated to Maa Sherawali (Durga Mata).

Language: Hindi
Genre: Navratri Special / Durga Bhajan
Energy Level: HIGH (very energetic, powerful, celebratory)
Tempo: Fast (95–105 BPM)
Raag Mood: Durga / Bhairavi with intense Shakti bhav
Taal: Keherwa with strong dhol & nagada patterns
Mood: Devotional, high-energy, festive, crowd-lifting
Vocals: Powerful Indian male.female devotional lead voice
Chorus: Loud group chanting, call-and-response “जयकारा”
Instruments: Dhol, nagada, dholak, manjira, harmonium, flute, claps, dholak. Bansuri  temple bells
Intro: Big drum roll + chant “ॐ दुर्गायै नमः”
Outro: Repeated male.female voice high-energy Jai Kara with drums and crowd echoes


ज़िन्दगी ने एहसास करा दिया है मुझेौ

जिंदगी ने एहसास कर दिया ह मुझे।
चाह हंसने की थी रुला दिया है मझे।।

कभी गम भी हमारा अपना सा लगेगा हमें।
हमारे दिल का पता किसने बता दिया है उसे।।

महफिले होगी फिर भी हमें तन्हा रहना है।
एक शमा की मानिंद जला दिया है हमे।।

जबअपने भी वैगाने से लगने लगते हैं।
ऐसे एक नये मोड़ पर ला दिया है हमें।।

चलो शिकवा शिकायत हम नहीं करते।
कैसी वेबसी है एहसास कर दिया है हमें।।

जख्म नासूर बने तो बने दिल के।
 तुमने कुरेदना उन्हे सिखा दिया है हमें।।

दिल दिया उसको उसने दिलदार कहा

दिल दिया उसको उसने दिलदार कहां, 
हमने नजरे जो झुकाई  उसने प्यार कहा।
कदम हर कदम वह मेरे साथ चला,
राह में देखी उसने बहारे,
उन बहारों को मेरा यार कहा।
किसी आरजू की आहट से दिल में हुई,
उसने उसको अपना इंतजार कहा।
मिली दो राहे तब भी वो साथ रहा,
अपने मिलने को उसने इत्तेफाक कहां।
एक तड़प मोहब्बत की दिल में होने लगी, 
उसने प्यार से दीवाना मुझे यार कहा। 
चाहते बढ़ती गई और हमें पता भी न चला,
दिल ने मुझसे कहा उसके आने से इंतजार भला। 
फलक पर जगमाये सितारे और रात ढली,
बड़े बबस थे क्यों हमने उससे प्यार किया।


नफरतों की आंधियां

देखता हूं मैं जिधर एक बवंडर है उधर,
उठ रही है हर तरफ नफरतों की आंधियां।
बस गोलियों का शोर था,थी लाशे बिछी हुई,
बड़ी सुनसान थी हसीन सपनों की वादियां।
वो देखने में तो इंसान थे मगर दिल से पत्थर ।
जिसने गुलिस्ता में यह जलजला सा
ला दिया।।
शहर की थी चाह और कुछ मौज मस्ती का शौक था।
हंस के निकले थे हम उन दंरिदो ने क्यों  रुला दिया ।।
जुल्म कैसा किया शैतान ने मजहब के नाम पर, 
मजहब से अपने इंसानियत को ही मिटा दिया।

होता अगर खुदा करीब तो मैं पूछता उससे ये।
वह इंसान कौन है जिसने इंसानियत का, लहू वहा दिया।
जहां हूर ही हूर है और ख्याली में ऐश है
ऐसा अनोखा फलसफा ये किसने बना दिया
मैरे देखते ही देखते सब खाक बनकर रह गया।
'प्रभात' बहसी हैबानो ने बस्ती का हर घर जला दिया।।

Friday, 23 January 2026

अपनी आवाज में रिकॉर्डिंग करनी हेतु prompt

Emotional Hindi spoken-word poetry recital in the poet’s own voice.
Theme: Mother’s love, childhood memories, warmth of “maa ka aanchal”.
Style: Pure gady (spoken poetry), no singing, no rhyming melody.
Voice tone: Soft, warm, nostalgic, deeply emotional and comforting.
Pace: Slow to medium, with gentle pauses after each stanza.
Expression: Maternal affection, innocence of childhood, emotional longing.
Background music: Very soft instrumental (piano, flute or light strings), minimal and subtle, never overpowering the voice.
Mood: Tender, emotional, heart-touching, reflective.
Recording style: Clean studio quality, intimate and close mic feel.
Emotion progression: Starts with nostalgia → deep affection → longing → emotional silence at the end.
End with a soft fade-out, leaving an emotional aftertaste.

Thursday, 22 January 2026

#IndependentArtist
#HindiMusic2026
#deshbhaktigeet

गजल रिकॉर्डिंग क लिएprompt

Style: Emotional Hindi Ghazal / Spoken Poetry

Mood: Soft, heartfelt farewell

Voice: Warm, sincere, gentle

Emotion: Quiet truth, graceful goodbye

Music: Minimal, soft piano or guitar, light strings

Atmosphere: Late-night, intimate, close mic

Wednesday, 21 January 2026

पहचानते और जानते हैं—
कितनी तुम्हारी औक़ात है!
पल रहे हो जिसके सहारे,
मिल रही अभी… खैरात है!!
(तालियाँ)

अंतरा 1
आतंकियो को पालते हो,
तुम अपनी गोद में,
भारत मां की पहली जागते हैं,
घूमते हैं तुम्हारी खोज में।
(तालियाँ + वाह-वाह)
अंतरा 2
अमन के हम पुजारी हैं,
आंखें दिखाना छोड़ दो। 
हर खामोशी बोलती है इक दिन
आजमाना छोड़ दो।
(ज़ोरदार तालियाँ)
अंतरा 3
जो भीख मिलती तुम्हें है, 
काम अब आएगी नहीं 
करोड़ निगाहें जागती है 
धोखा कोई खाएंगी नहीं
(तालियों की गूंज)
अंतरा 4
तरक्की का सर उठा है,
देखी दुनिया रही।
हम चांद पर पहुंचे वहां, 
जहां आज तक कोई पहुंचा नहीं। 
(ज़ोरदार तालियाँ)

Tuesday, 20 January 2026

music video Prompt

Style / Tags:

Hindi Devotional, Temple, 90-105BPM, High Energy, Dhol, Nagada, Keherwa Taal, Folk Fusion, Powerful Male Vocals, Crowd Chants.

Prompt / Description:

A high-energy Navratri Durga Bhajan set in a Temple atmosphere at 90-105BPM. Featured instruments are loud Dhol, Nagada, bells, and Harmonium. The song starts with a thunderous drum roll and the chant "Om Durgaye Namah". The vocalist is a powerful Indian male singer with a devotional, aggressive tone. Includes loud group chanting and call-and-response "Jaikara". The mood is celebratory and divine.


Option 2: Powerful Female Vocals (स्त्री आवाज़)

Style / Tags:

Hindi Devotional, Temple, 90-105BPM, Mata Ki Bhent, High Energy, Dhol, Nagada, Bansuri, Powerful Female Vocals, Festive.

Prompt / Description:

A powerful and fast-paced Durga Bhajan set in a Temple atmosphere at 90-105BPM. Strong percussion with Dhol, Nagada, and rhythmic clapping. The song begins with a drum roll and "Om Durgaye Namah". The vocalist is a commanding female singer with a resonant, open-throated voice (Shakti mood). Features a catchy chorus with crowd backing vocals. Ends with a high-energy "Jai Kara" outro.

Tuesday, 13 January 2026

चुहिया और चूहे की कहानी

एक चूहा और एक चूहिया
एक घड़े में रहते थे।
एक रात सोते-सोते
चूहे की लात चूहिया को लग गई।
चूहिया को लगी चोट,
वह रोने लगी और नाराज़ हो गई।
सुबह हुई तो चूहे ने कहा—
“उठ चूहिया, झाड़ू लगा ले।”
चूहिया बोली—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरी झाड़ू लगाऊँ?
मैं तो नहीं लगाऊँगी!”
चूहे ने कुछ नहीं कहा,
खुद ही झाड़ू लगा ली।
फिर बोला—
“उठ चूहिया, अब चौका कर ले।”
चूहिया फिर बोली—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरा चौका करूँ?
मैं तो नहीं करूँगी!”
चूहे ने चौका भी खुद ही कर लिया।
फिर वह बोला—
“उठ चूहिया, अब चाय बना ले।”
चूहिया ने कहा—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरी चाय बनाऊँ?
मैं तो नहीं बनाऊँगी!”
चूहे ने चुपचाप
चाय भी खुद ही बना ली।
चाय चूहिया के पास रखी और बोला—
“उठ चूहिया, चाय पी ले।”
चूहिया हँसते हुए बोली—
“अरे मेरे राजा!
तेरी लूँ बलैयाँ।
मैं कब रूठी थी?
मैं तो तेरी बनाई चाय पी लूँगी।”
चूहिया ने चाय पी ली,
दोनों हँस पड़े।
और घड़े में फिर से
खुशी-खुशी रहने लगे।