स्वपनो को रोका है किसने सपने आते जाते है।
कुछ सपने देते खुशिया कुछ सपने रुलाते है।
मैने भी एक सपना देखा जिसमे तू शहजादी थी ;परियो जैसे पंख तेरे पास कभी ना आती थी ।
उड़ते उड़ते दूर गगन में तू कही छिप जाती थी ।
आँख खुले जब उन सपनो को भूल नही हम पातेहै।
सपनो को रोका है किसने सपने आते जाते है।
मेरी रातो के सपनो में एक चाँद था दूर गगन में ।
चाँद जिसे में समझी थी वो तेरी ही तो सूरत थी ।
मेरी रातो की तन्हाइयो को तेरी बहुत जरूरत थी।बात यही सच्ची है साजन आज तुम्हे बताते है।
सपनो को रोका है किसने सपने आते जाते है।।
nav prabhat
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