जखोली ब्लाक के अखोली की।
यादे बडी सलोनी है|
जन जन मानस मे वसा जो
वो इन्द्रमणी बडोनी है||
संकल्पो और आर्दशो के रंगो ने जिसे सजाया है|
वो सपूत पहाडो का उत्तराखण्ड जिसने बनाया है||
24 दिस० 1924 ने उपहार दिया एक टहरी को|सुरेशानन्द के आंगन मे जन्म मिला पहाड के पहरी को||
जो नित्य चला सत्य अहिंसा के पथ पर|
पहाडो का गांधी कहलाये|
राजभोग और राजयोग इस आघोडी को ना भाये||
वो सन्यासी और साधु सा पैदल ही चलता जाता था|
जन चेतना को जगा जगा|
लोकसंस्कृति का अलख जगाता था|
जिसके केदार नृत्य पर पंडित नेहरु भी झूमे थे|
किया राज्य निर्माण हेतु आन्दोलन जब|
सत्ता के शासक भी घूमे थे||
चक्करा गया था सिर शासको का तब|
खटीमा मंसूरी लोम हर्षक हत्याकाण्ड किया|
इस महान जन सैनानी को जोगीवाला से गिरफ्तार किया|
विकास की राह के रोडो को|
अपनी ठोकर से जिसने हटाया था|
वन अधिनियम का विरोध किया|
राह के पेडो को कटवाया था|
यह कृत्य उनके अदम्य साहस का |
एक सुन्दर उदाहरण है
इसलिये वो गांधी के सदृश हुए|
ये नमक कानून सा उदृहरण है|
निज चिन्तन मे था बसा जिसके|
विकास मात्र पहाडो का |
उत्तराखण्ड है प्रतिफल उसकी
सिंह सदृश कृकश दहाडो का|
72 वर्ष की जर्जर काया थी|
कहर बन बीमारी भी आई|
थी पहर 18 अगस्त 1999 की |
तब काल सवारी भी आई||
यह अदभ्य साहसी सैनानी तब भी
जन जन के चिन्तन मे डूबा था|
कुछ इस तरह से प्यारे बच्चों|
उततराखणड का सूरज डूबा था
आओ हम सब ये प्रण करे
उनके ही सद मार्ग पर कदम बढायेगे|
अपने उत्तराखण्ड को हम सब भी
आर्दशों के रंगो से सजायेगे|
इस देवभूमि का आंगन तब
देवालय बन जायेगा
इस महापुरुष इन्र्दमणी बडोनी का
जीवन स्वप्न तब सत्य सार्थक हो जायेगा|
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