Thursday, 14 February 2019

आवाहन अब सडकों पर

चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर|
लाशो का अम्बार लगा जब सडकों पर|
कितने घर उजड गये कितने अपनो से विछड गये|
आसुओं का सैलाव वहा जब सडकों पर|

नही बधें है हाथ कुछ कर दिखलाओ तुम|
मक्कारी के आंसु मत बहाओ तुम||
उनको भी दर्द का एहसास‌हो जाने दो|
मोमबत्ती मत जलाना अब सडकों पर||

चीत्कार  उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

मिटने को तैयार हुं मै मिट जाऊगा |
खून के आंसू उनको रुलवाऊगा|
मां तेरे बेटो का आवहान है अब सडकों पर||
चीत्कार उठी मानवता आज फिर सडकों पर-----

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