[Verse 1]
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
तू अल्प ज्ञान
यह ज्ञान स्त्रोत
तू दीपक-ज्योत
यह महाज्योत
यह निर्मल हेतु कटु परिधान
यह मौन रहे
तू कर व्याख्यान
हर श्वास में तेरी ही तलाश
हर धकधक में तेरा ही प्रकाश
[Chorus]
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
तू छाया भी
तू ही सार
फिर हमसे इतना इनकार
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
[Verse 2]
सृष्टि का पलक तो तू है
इसका संहारक तो तू है
तू प्रभाव
तू शक्तिमान
जो सत्य है
बस तू ही पहचान
पर नहीं संबंध इतना सा
तू ही समीप
तू ही दुराशा
सृष्टि भी तेरी पलक है यदि
इसका जो संहारक है
तेरी ही छवि
[Chorus]
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
तू छाया भी
तू ही सार
फिर हमसे इतना इनकार
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
[Bridge]
यदि यह संहारक है इसका
यह भी तेरी संहारक है
तू ही प्रश्न
तू ही उत्तर
तू ही राह
तू ही पथिक प्रखर
[Chorus]
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
तू छाया भी
तू ही सार
फिर हमसे इतना इनकार
यह धरा मौन उपवास करेगी कब तक
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक
ये धरा मौ न उपवास करेगी कब तक ।
तुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक ।
सृष्टि का पालक तो तू है।इसका संहारक तो तू है।।
तू प्रवाह मान तू शक्तिमान जो सत्य है वो तू है।।
पर नहीं सम्बन्ध इतना सा सृष्टि भी तेरी पालक है। यदि तू संहारक है इसका।ये भी तेरी संहारक है।।ये धरा मौ न उपवास करेगी कब तक| तुुझ पर मानव विश्वास करेगी कब तक।।
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