ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे
तेरे उस पार अपनी दुनिया बसा के जाऊगा|
मै नही जानता जमी पे कभी चल भी पाऊगा,
इतना हौसला है मुझमे तुझे झुकाके जाऊगा|
ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........
मेरे रास्ते में होगी हंसी सितारो की महफिले,
अपनी दुनिया उनसे भी आगे लेकर जाऊगा|
ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........
जागती आखों मे ख्याब सजाके बैठा हुँ,
मै नमाजी नही खुदा को भुलाके जाऊगा|
ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........
मेरी रुह का वो मुकाम 'प्रभात' कहा पर होगा
हो सका तो ये हकीकत बताके जाऊगा
ऐ आश्मा नाज ना कर अपनी बुलन्दियो पे.........
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