भीगी हुई इन रातों में, सुलग रहा है तन, आग लगी है, बहके हुए
जजबातों में भीगी हुई इन रातों में
होश कहां है, कैसे रोके खुद को,
या फिर बहकने दे खुद को,इन रातों में
अपनी सांसों से कह दो इतना करीब ना आए, इनकी गर्मी से कहीं, दिल मेरा ना पिघल जाए
ऐसी बातें करके, दिल हमारा ना दुखाओ
जितने करीब हैं हम, उतना करीब तुम भी आओ
हमको ना यू बहकाओ, देखो तुम मान जाओ, हम भी बह जाएंगे तुम्हारी बातों में
भीगी हुई इन रातों में, सुलग रहा है तन, आग लगी है, बहके हुए
जजबातों में भीगी हुई इन रातों में
होश कहां है, कैसे रोके खुद को,
या फिर बहकने दे खुद को,इन रातों में
इतनी प्यार भरी बातों का
सोचो तो क्या होगा असर
होश ना हम गवा दे,
बहकने लगी है तुम्हारी नजर
ऐसे ना अब हमको सताओ
जरा सा और करीब आ जाओ
धड़कने हम गिन ले तुम्हारी
मेरे दिल में तुम समा जाओ
हम ना पिघल जाएं पास आ के तुम्हारी सांसों में
भीगी हुई इन रातों में, सुलग रहा है तन, आग लगी है, बहके हुए
जजबातों में भीगी हुई इन रातों में
होश कहां है, कैसे रोके खुद को,
या फिर बहकने दे खुद को,इन रातों में
तन मन भिगो रही है सावन की देखो घटाएं
ऐसे में करीब तुम हो मदहोश हम हो ना जाए
आग लगाई है सावन ने, तुम दिल में लगा रहे हो
कहनी है बात हमे दिल की,खामोश हम हो ना जाए
देखो सताना तुम छोड़ो, बातें बनाना तुम छोड़ो
तुमको हमारी है कसम, मूंह ना सनम हमसे मोड़ो
डर हमको लग रहा है
जाने क्या है तुम्हारे वादों में
भीगी हुई इन रातों में, सुलग रहा है तन, आग लगी है, बहके हुए
जजबातों में भीगी हुई इन रातों में
होश कहां है, कैसे रोके खुद को,
या फिर बहकने दे खुद को,इन रातों में
कं
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