Tuesday, 15 April 2025

आज के दौर में

आज के दौर में जाने कहां 
किन महफिलों में खो गए रिश्ते 
सबके सीने में दिल है मगर 
 मिलते नहीं दिल के रिश्ते

झूठी खुशियों में ढूंढते हैं सुकून दिल का
सच्ची खुशियों से दूर हैं सच्चे रिश्ते 
आज के दौर में जाने कहां ........(1)

अपनों से गैर भी भले हैं यारों 
जो नजरों में सजाते हैं प्यार के रिश्ते 
आज के दौर में जाने कहां ..........(2)

 दौलत की तराजू में तोले जाते हैं रिश्ते
फुर्सत कहां किसी को सजा प्यार से रिश्ते 
आज के दौर में जाने कहां ............(3)

 

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