नशीला है यह समा
दिल तुझको ढूंढता है
तू है कहां
मेरी महफिल है वही
मेरे सनम
तू है जहां
अब तेरे बिना मैं जाऊं कहां
आज तू सनम मेरी बाहें तरसती हैं
खो गई मस्तियां
हो गई खुशियां
तेरे बिना सपने अपने नहीं
अपनी नहीं चाहत
तेरे बिना मन लगता नहीं
दिल को नहीं राहत
ढूंढती हूं तुझे
मेरा ये दिल मेरे बस में कहां
नशीला है यह समा
दिल तुझको ढूंढता है
तू है कहां
मेरी महफिल है वही
मेरे सनम
तू है जहां
अब तेरे बिना मैं जाऊं कहां
आज तू सनम मेरी बाहें तरसती हैं
चाँद भी छुप गया, रात भी खामोश है
धड़कने मेरे बस में नही,
यादें ना आए तेरी
ये भी मेरे बस में नहीं
तन्हाई का पहरा सांसों पर ,ज़ख्म दिल का बड़ा गहरा है
तू भी रूठा हुआ है वक्त भी अभी तक ठहरा है
आजा भी कि ढुंढू मैं कहाँ!
नशीला है यह समा
दिल तुझको ढूंढता है
तू है कहां
मेरी महफिल है वही
मेरे सनम
तू है जहां
बड़ा मुश्किल हो गया अब जीना तेरे बिना
मुझ पर हंसने लगी है बहारे
रूठ जाए ना मुझसे मेरी हंसी
आजा अपनी बाहों में मुझको छुपा ले
अपने सीने से मुझको लगा ले
निभा दे अपनी वफा
नशीला है यह समा
दिल तुझको ढूंढता है
तू है कहां
मेरी महफिल है वही
मेरे सनम
तू है जहां
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