Monday, 4 May 2026

नशीला है यह समा दिल तुझको ढूंढता है

 
नशीला है यह समा 
दिल तुझको ढूंढता है 
तू है कहां 
मेरी महफिल है वही 
मेरे सनम 
तू है जहां 
अब तेरे बिना मैं जाऊं कहां 
आज तू सनम मेरी बाहें तरसती हैं

खो गई मस्तियां 
हो गई खुशियां 
तेरे बिना सपने अपने नहीं 
अपनी नहीं चाहत 
तेरे बिना मन लगता नहीं 
दिल को नहीं राहत
ढूंढती हूं तुझे 
मेरा ये दिल मेरे बस में कहां 

नशीला है यह समा 
दिल तुझको ढूंढता है 
तू है कहां 
मेरी महफिल है वही 
मेरे सनम 
तू है जहां 
अब तेरे बिना मैं जाऊं कहां 
आज तू सनम मेरी बाहें तरसती हैं

चाँद भी छुप गया,  रात भी खामोश है

धड़कने मेरे बस में नही,  

यादें ना आए तेरी

ये भी मेरे बस में नहीं

तन्हाई का पहरा सांसों पर ,ज़ख्म दिल का बड़ा गहरा है

तू भी रूठा  हुआ है वक्त भी अभी तक ठहरा है

आजा भी कि  ढुंढू मैं कहाँ!

नशीला है यह समा 
दिल तुझको ढूंढता है 
तू है कहां 
मेरी महफिल है वही 
मेरे सनम 
तू है जहां

बड़ा मुश्किल हो गया अब जीना तेरे बिना 
मुझ पर हंसने लगी है बहारे
रूठ जाए ना मुझसे मेरी हंसी 
आजा अपनी बाहों में मुझको छुपा ले 
अपने सीने से मुझको लगा ले 
 निभा दे अपनी वफा

नशीला है यह समा 
दिल तुझको ढूंढता है 
तू है कहां 
मेरी महफिल है वही 
मेरे सनम 
तू है जहां


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