Monday, 4 May 2026

इश्क नहीं करना इश्क से डर लगता है

हम हुस्न वालों को, क्यों मिलती है सजा
हमसे ही मोहब्बत है हमसे ही है खफा
कहते हैं हमको बेवफा हमने तो की है वफा 
इश्क होता है नशीला, नशीली इसकी हर अदा 
इश्क नही करना, इश्क से दिल डरता है

चाहत मोहब्बत की इश्क करना सिखाती है 
दीवानगी सनम की और आग भड़काती है 
बचना है मुश्किल इस इश्क की आग में जलना है
मिटा दो अपनी हस्ती को अगर इश्क करना है 
दुनिया वाले हरदम रहते हैं  इश्क से खफा 

हम हुस्न वालों को, क्यों मिलती है सजा
हमसे ही मोहब्बत है हमसे ही है खफा

मैं फिर भी हमारी है तनहाई भी हमारी है 
चर्चा भी हमारा है रुसवाई भी हमारी है 
 हम महफिलो की शान है  कहकशो की जान है
सब जान लेना चाहते हैं हम सब की जान है 
कितना अजीब  जहां का अंदाज है जुदा

हम हुस्न वालों को, क्यों मिलती है सजा
हमसे ही मोहब्बत है हमसे ही है खफा

हम बेबसी में जीने को मजबूर हो गए 
सितम भी सहे हमने बदनाम भी हो गए 
अब डरना किस है क्यों कर हम करें
अब महफिलो की शान खुले आम हो गए
कल इश्क एक नशा था अब इश्क है सजा

हम हुस्न वालों को, क्यों मिलती है सजा
हमसे ही मोहब्बत है हमसे ही है खफा




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