Tuesday, 5 May 2026

खिली-खिली मै खिली अधखिली हूं कली



खिली-खिली मै खिली  अधखिली हूं कली 

ओ दिलवालो देखो इधर मैं हूं शर्मीली

अंतरा 1:

अभी तो बस ख्वाबों ने, ली है अंगड़ाई,

रंगों की महफ़िल देखो, मेरे संग आई।

भौरों से कह दो जरा, दूर ही रहें,

अभी तो मैं अपनी ही, खुशबू में पली।

खिली-खिली मैं खिली...

अंतरा 2:

नज़रें झुकी-झुकी हैं, धड़कन है जवां,

कोई तो बताए मुझे, जाना है कहाँ?

कांच जैसा मन मेरा, टूटे ना कहीं,

चाहत की राहों में, मैं पहली बार चली।

खिली-खिली मैं खिली...

अंतरा 3:

शबनम के मोतियों से, खुद को सजाऊ मै

हवाओं के झोंकों संग, झूमती  गाऊ मैं

रुत ये सुहानी  बीत ना जाए कहीं,

बहारों ने पाला मुझे मैं बन के कली खिली 

खिली-खिली मैं खिली...

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