Tuesday, 5 May 2026

सांसों की डोरी से बंधा है प्यार का मेरे ये रिश्ता

सांसों की डोरी से बंधा है 
प्यार का मेरे ये रिश्ता 
टूटेगी सांसे टूट जाएगा 
प्यार का हर एक सपना 
ये जग है वीराना 
यहां कब तक बसेरा है अपना 
सब कुछ लगता है जैसे 
जगती आंखों का  सपना 

मोम के पुतले हैं हम सब 
एक दिन सबको पिघलना है
जब तक चल रही है धड़कन 
तब तक संग संग चलना है

ये जग है वीराना 
यहां कब तक बसेरा है अपना 
सब कुछ लगता है जैसे 
जगती आंखों का  सपना 

जीवन का  पतझड़ जब आता है
वीराना उपवन होते हैं 
कल क्या होगी से ये खबर
बस एक रात की हम सोते हैं 
जब नहीं होता जगना जब नहीं होता चलना


ये जग है वीराना 
यहां कब तक बसेरा है अपना 
सब कुछ लगता है जैसे 
जगती आंखों का  सपना 

आंधियां चलती है जाने कितने  पेड़ गिराती हैं
जो सामने आ जाए सब कुछ उड़ा ले जाती है 
ऐसा ही यह जीवन है 
आज मिले कल बिछड़ना 

ये जग है वीराना 
यहां कब तक बसेरा है अपना 
सब कुछ लगता है जैसे 
जगती आंखों का  सपना 


No comments:

Post a Comment