दो कोलू के बैल कर रहे थे तकरार,
नाथ डाल कलुआ ने कर दिया हमें लाचार ।
कर दिया हमें लाचार रोज तेल हमसे पिलवाता।
देता न हमें खाने को पेनी से मार लगाता।
हमारी मेहनतकी खाता और हमी को मारे पेनी।
कर भाई कोई उपचार नही ड्यूटी हमको देनी।।
पहला बोला यार बात बढ़िया है तेरी।
हो जाएगा उपचार बात जो माने मेरी ।
बात माने मेरी करके बहाना बिमारी का पड़ जाओ।
छोड़ इस कोलू को भाड़ में कलुआ जाओ।
अगली सुबह जब आया कलुआ बैलो को तिक तिकाया।
पहले जो तय था दोनी ने कर दिखलाया।
एक ने गर्दन टेड़ी की जीभ बाहर निकाली।
दूसरे ने भी उसकी ताल से ताल मिला ली।
देखा जब कलुआ ने बड़ा सकपकाया।हुआ क्या कुछ भी उसकी समझ न आया।
बोला बेटा लल्लू डॉक्टर घसीटा को बुलाओ।
इन दोनों को एक एक मोटा इंजेक्शन लगवाओ।
लल्लू ने जब डॉक्टर को सारा हाल सुनाया।
कलुआ प्रधान के बैल बीमार हुए,
सुना तो दौड़ा चला आया।।
देकर दबाई दोनों को मोटा इंजेक्शन लगाया।
बदले में कलुआ से सौ का नोट पाया।।
उस दिन उन दोनों की हो गयी छुट्टी।
फिर भी खाने को मिली सुखी कुट्टी।
पहला बोला यार ठीक नही ये उपचार।
इंजेक्शन से तो अच्छी थी पेनी की मार।
पेनी की मार कौन इंजेक्शन लगवाये।
अच्छा होगा चल कर दोनों कोलू चलाये।।
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