Saturday, 24 January 2026

प्यार अपनों से किया

प्यार अपनों से किया हमने खता कर बैठे।
सारे अपनों को अपने से खफा कर बैठे।।

नहीं समझे की हालत यू भी बदलेंगे। 
मेरे अपने मेरी आंखों से दूर जा बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने.......(1)

अंदाज उनके भी बदले जिन पे नाज किया।
रोज खामोश तनहाई ने आगाज किया।।
हमने भी तन्हाइयों से खूब प्यार किया। महफिलों के शोरगुल से दुर जा बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने .....(2)

हंसने हंसाने की आदत से मजबूर थे हम।
हंसने की चाह में खुद को ही रूला बैठे।।
 अपनी जिंदगी को चुटकुला बना बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने..........(3) 

जाने क्यों कर ये सफर इतना लंबा हुआ।
हर रोज जिंदगी में  नया तजुर्बा हुआ।
कहां से शुरू हुआ था कहां पे आ बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने .........(3)

वहीं शहर वही गली वही घर मेरा था।
मगर आज रूठा हुआ मुझसे सवेरा था।
चमन में गुल थे उन्हें भी खार बना बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने ........(4)


जिनके वजूद से वजूद हमारा जिंदा था।
आज मिलने के बाद वो भी शर्मिंदा था।
बस कुछ यादें सीने में दफन कर बैठे।।
प्यार अपनों से किया हमने ..........(5)



No comments:

Post a Comment