खुदगर्जी में जियो खुदगर्जी में मरो
जिंदगी ने समझा दिया है मुझे।
दिल निकाल कर भी गर किसी को दिया है कभी।
उसी ने धोखा बहुत खूब दिया है मुझे।।
खिलौना बन गया मैं जिसकी हंसी की खातिर।
बेवजह उसने रुला दिया है मुझे।।
मैंने उसके दामन को फूलों से भर दिया फिर भी ।
कांटो के बीच उसने सुला दिया है मुझे।
अपनी खुशियों को सजाना नहीं आया मुझको।
मेरे हालात ने मजबूर बना दिया है मुझे।।
नसीब और वक्त बदलेगा ऐसा सोचा था।
बदलते हुए वक्त ने मिटा दिया है मुझे।
मुझे एहसास था कि मैं समंदर हूॅं।
कतरा कतरा सा बहा दिया है मुझे।।
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