हमें थी खयालों में रहने की आदत।।
बहुत हो चुका अब करना क्या बाकी।
ना मयखाना ना पास है कोई शाकी।
अब तो सभी से है अपनी अदावत।
हमें जिंदगी से....…....…...(1)
वो शाम जिंदगी की बड़ी थी सुहानी।
कितनी हसीन थी इसकी कहानी।।।
अब शिया रातों की बची सिर्फ आफत।।
हमें जिंदगी से हुई ...........(2)
क्या खो दिया क्या पाया है हमने।
मोहब्बत का सपना सजाया है हमने।
अब इस सपने में रहने की चाहत।
हमें जिंदगी से हुई ........(3)
सब झाकते हैं चोरी से मेरी जिंदगी में
मैं गजल में ही सुना दूं अपनी हकीकत
किसी ने जब पूछा क्या ख्वाहिश है तेरी
जिंदगी से मौत तक बस पैमाइश है मेरी
इसमें नहीं लगती कोई अच्छी सियासत।
हमें जिंदगी से हुई ...........(4)
मैं 'प्रभात',..... कैसे बताऊं सबको दिल की बात अपने
जमाने को लगती है अब सब बातें बगावत
हमें जिंदगी से हुई कब मोहब्बत।
हमें थी खयालों में रहने की आदत।।
हमें जिंदगी से हुई....... कब मोहब्बत...
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