पहचानते और जानते हैं—
कितनी तुम्हारी औक़ात है!
पल रहे हो जिसके सहारे,
मिल रही अभी… खैरात है!!
(तालियाँ)
अंतरा 1
आतंकियो को पालते हो,
तुम अपनी गोद में,
भारत मां की पहली जागते हैं,
घूमते हैं तुम्हारी खोज में।
(तालियाँ + वाह-वाह)
अंतरा 2
अमन के हम पुजारी हैं,
आंखें दिखाना छोड़ दो।
हर खामोशी बोलती है इक दिन
आजमाना छोड़ दो।
(ज़ोरदार तालियाँ)
अंतरा 3
जो भीख मिलती तुम्हें है,
काम अब आएगी नहीं
करोड़ निगाहें जागती है
धोखा कोई खाएंगी नहीं
(तालियों की गूंज)
अंतरा 4
तरक्की का सर उठा है,
देखी दुनिया रही।
हम चांद पर पहुंचे वहां,
जहां आज तक कोई पहुंचा नहीं।
(ज़ोरदार तालियाँ)
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