जिसे भूलना था वो क्यों याद आया।।
यह चाहत है कैसी जो फिर बढ़ गई है।
मेरी जिंदगी जाने किस और मुड़ गई है।।
मुझे जीने का नया अंदाज आज आया।।
मेरे सामने कल .............( 1)
कश्ती है टूटी पतवार भी छूट गई है।
लहरों की सहारे यह बड़ी जा रही है।।
उमड़ता सा देखो सैलाब आज आया।।
मेरे सामने कल.........(2)
मेरे अपनों ने मुझसे किनारा किया है।
मगर गैरों में बढ़ कर सहारा दिया है।।
उनकी खुशी का पैगाम आज आया।
मेरे सामने कल ..........(3)
एक छोटी सी खुशी भी बड़ी लग रही है।
जिंदगी दुल्हन सी सजी लग रही है।।
ना गीत रास आए ना साज रास आया
मेरे सामने कल ..........(4)
चलो प्रभात फिर से दुनिया बसा कर हम देखें।
किसी को गले अपने लगा कर हम देखें।।
बदला बदला सा वक्त आज आया।
मेरे सामने कल ...........(5)
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