Saturday, 24 January 2026

हम तुम्हें छोड़कर suno

मैं तुम्हें छड़कर इस शहर से जा रहा हूं
बस मुस्कुरा के एक बार कह दो तुम्हें रुला रहा ह

मतला

मैं तुम्हें छोड़कर इस शहर से जा रहा हूँ,

बस मुस्कुरा के कह दो कि तुम्हें रुला रहा हूँ।

शेर 1

वो मोड़, वो दरिचा, वो गलियाँ तड़प उठेंगी,

मैं साथ अपने यादों का जहाँ ले जा रहा हूँ।

शेर 2

जो बुझ गई थी शम्अ, उसे फिर हवा न देना,

मैं राख के ढेरों में चिराग़ जला रहा हूँ।

शेर 3

मिलेगी न अब तुम्हें मेरी वफ़ा की आहटें भी,

मैं खुद को अपनी हस्ती से ही मिटा रहा हूँ।

शेर 4

तुम्हें बोझ न बना दे कभी मेरा ये तसव्वुर,

मैं यादों के हसीं पिंजरे से तुम्हें छुड़ा रहा हूँ।

शेर 5

सफ़र ये उम्र भर का है, मगर तन्हा कटेगा,

मैं खुद को खुद ही मंज़िल का पता बता रहा हूँ।

मक्ता

उदासियों की धूप में न जलना ऐ 'प्रभात',

मैं अश्क पी के आँखों में घटा सजा रहा हूँ।

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