एक चूहा और एक चूहिया
एक घड़े में रहते थे।
एक रात सोते-सोते
चूहे की लात चूहिया को लग गई।
चूहिया को लगी चोट,
वह रोने लगी और नाराज़ हो गई।
सुबह हुई तो चूहे ने कहा—
“उठ चूहिया, झाड़ू लगा ले।”
चूहिया बोली—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरी झाड़ू लगाऊँ?
मैं तो नहीं लगाऊँगी!”
चूहे ने कुछ नहीं कहा,
खुद ही झाड़ू लगा ली।
फिर बोला—
“उठ चूहिया, अब चौका कर ले।”
चूहिया फिर बोली—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरा चौका करूँ?
मैं तो नहीं करूँगी!”
चूहे ने चौका भी खुद ही कर लिया।
फिर वह बोला—
“उठ चूहिया, अब चाय बना ले।”
चूहिया ने कहा—
“तूने मारा, तूने पीटा,
तेरी चाय बनाऊँ?
मैं तो नहीं बनाऊँगी!”
चूहे ने चुपचाप
चाय भी खुद ही बना ली।
चाय चूहिया के पास रखी और बोला—
“उठ चूहिया, चाय पी ले।”
चूहिया हँसते हुए बोली—
“अरे मेरे राजा!
तेरी लूँ बलैयाँ।
मैं कब रूठी थी?
मैं तो तेरी बनाई चाय पी लूँगी।”
चूहिया ने चाय पी ली,
दोनों हँस पड़े।
और घड़े में फिर से
खुशी-खुशी रहने लगे।
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