Monday, 26 January 2026

समय साक्षी हूॅं मैं कौन।



सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

सब दुविधाओं का होता है अंत।।
मोह माया के बंधनो का होता अंत,
निर्भय हूं मौन हूं मैं हूं,भी या नहीं हूं,
फिर भी कौन जो आता हो संग।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

 किस दूरी पर घूम रहा है,
देख रहा है समय चक्र संसार।
साथ मेरे सत्कर्मों की गंगा है,
जिसमें वहते चार पुरुषार्थ।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
निशांत मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी हूॅं मैं कौन।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

भक्ति भाव सरस हृदय रहता है,
मन राम नाम ही मैं रमा रहता है।
माया का पेहरा होता है इस काया पर,
काया पर रहता है सांसों का बंधन।

जब तक सांसे हैं तब तक नाते हैं,
जब तक जीवन है कर जग बंदन।
समय चक्र के लौह द्वार तोड़कर,
जाना तुझको एक दिन जग छोड़कर।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

क्रोध और अहंकार में खड़ा क्यों अकेला,
इक दिन तो छूटेगा तुझसे जग का मेला।
तू सबसे कहता सब कुछ है मेरा,
माया का अंधकार है इतना गेहरा।

किसी मोड पर तू खड़ा रह गया है,
अब सब कुछ तुझसे दूर हो गया है।
जिंदगी की राहे कितनी लंबी हो गयी है,
जहां कदम थक गए वही बसेरा गया है।
जो बोया तूने वही काट रहा है,
अबतक जो पाया वही बांट रहा है।

सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।

अभिलाषा से आये संग ये जग सारा,
सुगम अन्तिम पथ की हो धारा, 
चन्दन शीतल हो अनल तेज।
सहज सामाप्त हो संताप हमारा।

जीवन रथ का आधार यही है,
मैं चला तू चल संसार यही है।
मेरा साया अब तक है साथ मेरे,
नित पून्य का मैला  'प्रभात' साथ है मेरे।


सिमटे सांसे तो सिमट जाती है दुनिया,
चंद्र कदमों पर ही दुनिया रुक जाती है।
समय मौंन है-निशांत मौंन है समय साक्षी मैं हुं कौन।




 

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