आँखों से दिल में उतर गया,
तेरा नशा दिल पर चढ़ गया
हाए उल्फ़त में क्या हो गया,
कितना बेदर्द ज़माना अब हो गया।
जीने नहीं देता है प्यार में,
मरने नहीं देता है इंतजार में।
जो मज़ा है इंतज़ार में,
वो मज़ा कहाँ प्यार में।
आँखों से दिल में उतर गया,
तेरा नशा दिल पर चढ़ गया
हाए उल्फ़त में क्या हो गया,
कितना बेदर्द ज़माना अब हो गया।
तू तो सातिर बड़ा है अपनी जिद पर अड़ा है
जाने की जिद क्यों करता है
ये मौसम आशिकाना बड़ा है
दीवाना पहलू में खड़ा है
देख के मासूम तेरा चेहरा
जोश जवानीका बढ़ गया
आँखों से दिल में उतर गया,
तेरा नशा दिल पर चढ़ गया
हाए उल्फ़त में क्या हो गया,
कितना बेदर्द ज़माना अब हो गया।
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