तुझसे दिल की तड़प का क्या कहना
तूने मुड़कर ना देखा दोबारा
दिल धड़क तड़प के कहता रहा
क्यों बेमौत सनम तूने मारा
ये दिल तुझसे मोहब्बत करता था
तूने ठोकर मारी है दिल को
क्यों यह दिल आहे भरता है
क्यों पुकार रहा अपने कातिल को
यह बात अगर समझ में आ जाए
तो हमको भी धीरे से कह देना
तुझसे दिल की तड़प का क्या कहना
तूने मुड़कर ना देखा दोबारा
दिल धड़क तड़प के कहता रहा
क्यों बेमौत सनम तूने मारा
आशिक तो हजारों मिलते हैं
पर दिलदार मिलता है मुश्किल से
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