तू सजना बिल्कुल अनाड़ी है
मैं तुझे खिलाड़ी बना दूंगी
आंखों में आंखें डाल के देख
तुझे मैं शिकारी बना दूंगी
[अंतरा 1]
तू दूर से तकता है,
पास आने से तू डरता है।
ये शराफत छोड़ दे ओ बाबू,
क्यूँ ठन्डी आहें भरता है?
तेरी सूख गई बगिया में
मैं सावन की हरियाली ला दूंगी ।
आंखों में आंखें डाल के देख,
तुझे मैं शिकारी बना दूंगी।
[अंतरा 2]
तू भोला बड़ा है सजना,समझे ना बात जरा सी
कहां मिलेगी तुझको मुझ जैसी
सुंदर नार नवेली
तेरी अंधेरी सी इन रातों में,
मैं दीवाली की लड़ी लगा दूंगी।
आंखों में आंखें डाल के देख,
तुझे मैं शिकारी बना दूंगी।
[अंतरा 3]
कहता है सारा ज़माना
आसान नहीं दिल लगाना।
हुस्न के आगे टिका है कब
दुनिया का कोई बहाना ।
तू आज तो मान ले कहना मेरा,
तुझे हर बाजी जिता दूंगी ।
आंखों में आंखें डाल के देख,
तुझे मैं शिकारी बना दूंगी।
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