दिल की दुश्वारिया सनम तुझसे नहीं कहते हैं
बिछड़ कर तुझसे बस चुपके चुपके रोते हैं
दर्द सीने में उठता है दिल थाम लेते हैं
अभी भी इश्क है तुझे इल्जाम नहीं देते हैं
हमें एहसास है कि अब तुमसे मिलना मुश्किल है
क्या कहीं कितना मजबूर हमारा दिल है
जख्म सहते हैं जुवा से कुछ नहीं कहते हैं
दिल की दुश्वारिया सनम तुझसे नहीं कहते हैं
बिछड़ कर तुझसे बस चुपके चुपके रोते हैं
तुम अभी मेरे गम में मुझे सहारा देते हो
तुम्हारा काम है हमें तुम हमारा रहते हो
बड़ी उलझन है क्यों बेवजह हम उलझते हैं
दिल की दुश्वारिया सनम तुझसे नहीं कहते हैं
बिछड़ कर तुझसे बस चुपके चुपके रोते हैं
मुझे जुदा तो किया अपनी यादों में ही रहने देना
हमसे जो हुई खता सब कुछ हमसे कह देना
हम तेरे प्यार में हर दिन यू ही तड़पते हैं
दिल की दुश्वारिया सनम तुझसे नहीं कहते हैं
बिछड़ कर तुझसे बस चुपके चुपके रोते हैं
दर्द सीने में उठता है दिल थाम लेते हैं
अभी भी इश्क है तुझे इल्जाम नहीं देते हैं
No comments:
Post a Comment