अपने एक पल में बेगाने बन जाते है
एक पल में अजनबी अपने बन जाते हैं
ये कोई नयी बात नहीं, महसूस करके देखना
अपने एक पल में बेगाने बन जाते है
एक पल में अजनबी अपने बन जाते हैं
बड़ा अजीब लगता है, ऐसा हादसा जिंदगी में
जब कभी खुशियां सिमट जाती है लम्हे ठहर जाते है
अपने एक पल में बेगाने बन जाते है
एक पल में अजनबी अपने बन जाते हैं
हमको शिकायत है जिंदगी से कभी सभल ना सकी
परेशानियां कारबा बनके संग संग चलती रही
खूब हंसते हैं लोग भी जब दर्द उन्हें सुनते हैं
अपने एक पल में बेगाने बन जाते है
एक पल में अजनबी अपने बन जाते हैं
आखिर मंजिल जब करीब आती है
तब उम्र ढल जाती है, फिर एहसास क्या
किसी खुशी या गम का, अपने हंसी सफर का, अपनेहमसफर का
उम्र के साथ फासले भी बढ़ते जाते हैं
अपने एक पल में बेगाने बन जाते है
एक पल में अजनबी अपने बन जाते हैं
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