रात मोरी अम्मा कोई धक्का मारे
किवड़िया पर बड़ी जोर-जोर से
मैं भी चिल्लाये रहीं तू ही ना जागी
करत रहा चोरी वो सीना जोरी
घर के हर एक छोर-छोर से
सांस मोरी अटक गई हलक में मोरे
लाठी डंडा कुछ भी ना रखा था धोरे
उठ के मैं पास कैसे आती तोरे
मुझको लगत रहा वो मुझको ही घूरे
दिल मेरा धड़क रहा जोर जोर से
रात मोरी अम्मा कोई धक्का मारे
किवड़िया पर बड़ी जोर-जोर से
मैं भी चिल्लाये रहीं तू ही ना जागी
करत रहा चोरी वो सीना जोरी
घर के हर एक छोर-छोर से
कप कपी टांगों में हो रही अम्मा
पायल मोरी छम छम बज रही अम्मा
धक धक जिया में हुई रही अम्मा
सांसे मेरी ऊपर नीचे हो रही अम्मा
निकल रही आवाज चोर चोर रे
रात मोरी अम्मा कोई धक्का मारे
किवड़िया पर बड़ी जोर-जोर से
मैं भी चिल्लाये रहीं तू ही ना जागी
करत रहा चोरी वो सीना जोरी
घर के हर एक छोर-छोर से
हिम्मत करके मैं तो बिस्तर से उतरी
रसोई में झांका दूध दही थी बिखरी
समझ में मझे आया आई थी बिल्ली
अच्छा हुआ नहीं निकली मोरी किल्ली
जग हसाई होती जोर शोर से
रात मोरी अम्मा कोई धक्का मारे
किवड़िया पर बड़ी जोर-जोर से
मैं भी चिल्लाये रहीं तू ही ना जागी
करत रहा चोरी वो सीना जोरी
घर के हर एक छोर-छोर से
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