वो मुझे अपना बना के रख ना सके
तोड़ दिया दिल मेरा उन्हें एहसास ना था
तोड़ दिया दिल मेरा उन्हें एहसास ना था
दिल तोड़ने की वजह बता ना सके
दर्द जो हमको मिला वो उम्र भर को काफी था
दर्द जो हमको मिला वो उम्र भर को काफी था
वो चार दिन मेरा साथ निभा ना सके
मुझे पलकों पर सजा के रख ना सके
वो मुझे अपना बना के रख ना सके
कोई जिद थी जो उसे पूरी करनी थी
कोई जिद थी जो उसे पूरी करनी थी
हम उसकी जिद का बोझ उठा ना सके
मुझे पलकों पर सजा के रख ना सके
वो मुझे अपना बना के रख ना सके
बड़ा तन्हा सफर था जो हमने किया
बड़ा तन्हा सफर था जो हमने किया
अपने सफ़र में उसे हमसफर बना ना सके
मुझे पलकों पर सजा के रख ना सके
वो मुझे अपना बना के रख ना सके
हम अपने ख्यालों में कुछ इस तरह गुमसुम थे
हम अपने ख्यालों में कुछ इस तरह गुमसुम थे
चाह कर भी दिल की बात बता ना सके
हमने सोचा भी कि कोई उसकी मजबूरी रही होगी
हमने सोचा भी कि कोई उसकी मजबूरी रही होगी
वो मेरे रुह वे रुह मजबूरी अपनी बता ना सके
हम अपने ख्यालों में कुछ इस तरह गुमसुम थे
हम अपने ख्यालों में कुछ इस तरह गुमसुम थे
चाह कर भी दिल की बात बता ना सके
एक वादा था जो निभाना था मजबूरी थी
एक वादा था जो निभाना था मजबूरी थी
उसके हाथों में मेरा हाथ था हम हटा ना सके
अब जब प्रभात खुद जिंदगी का ऐतबार नहीं
अब जब प्रभात खुद जिंदगी का ऐतबार नहीं
नासूर बनने दिया जख्म अपना दिखा ना सके
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