Tuesday, 30 June 2026

मेरी अदाओं का नशा बेकरारी बढ़ाने

मेरी अदाओं का नशा बेकरारी बढ़ाने लगा,सरूर बनके छाने लगा, 
तुझ को तड़पाने में, तुझको जलाने में, 
मुझको मजा आने लगा

हुस्न की तो आदत है, इश्क को सताने की, आग लगाने की,
ख्वाहिशे दिल की बढ़ाने की, 
सदियों से इस जमाने में, इश्क तड़पता ही रहा, हुस्न जब भी
 बेपर्दा हुआ, इश्क बे आबरू हुंआ
हुस्न की चाहत रही, इश्क को आजमाने की 
सबको ऐसा लगा, हुस्न करता नहीं दगा,
इश्क को सताने में, उसको आता है मजा


मेरी अदाओं का नशा बेकरारी बढ़ाने लगा,सरूर बनके छाने लगा, 
तुझ को तड़पाने में, तुझको जलाने में, 
मुझको मजा आने लगा


वादे तो हुस्न खूब करता है, अपना कोई वादा निभाता नहीं, उसको वादा निभाना आता नहीं, इश्क की मीठी बातों से उसका कोई नाता नहीं 
इश्क जो करता है वादा
 जान देकर उसको निभाता है, बेवफाई करना, इश्क को आता नहीं 
हुस्न तो बेवफा होता है इश्क को तो आती है वफा

मेरी अदाओं का नशा बेकरारी बढ़ाने लगा,सरूर बनके छाने लगा, 
तुझ को तड़पाने में, तुझको जलाने में, 
मुझको मजा आने लगा

सोचो जरा हुस्न क्यों करता है बेवफाई 
क्या वफा उसके मन को रास ना आई 
बात इतनी सी है हुस्न बेबस हो जाता है 
जहां उस पर जाने क्या-क्या तोहमत लगाता है, हुस्न के दिन में भी चाहत वफा की होती है, 
उसकी आंखों से बहते हैं आंसू बनके वफा 

मेरी अदाओं का नशा बेकरारी बढ़ाने लगा,सरूर बनके छाने लगा, 
तुझ को तड़पाने में, तुझको जलाने में, 
मुझको मजा आने लगा



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