Friday, 12 June 2026

महफिल सजाने में आई हूं

महफिल सजाने में आई हूं 
इस महफिल में कोई तन्हा ना हो 
चुन लो अपना मनचाहा आशिक 
कोई माशूक अकेला ना हो 
उसकी बाहों में हो उसकी महबूबा 
सब कुछ है रंगीनियों में डूबा 
अभी तो महफिल में शबाब नहीं आया 
अभी तो महफिल अधूरी है 
छलकेगे  जाम बिखरे की खुशियां 
दुनिया के हर गम दूर हो जाएंगे
मोहब्बत की चाहत में सब खो जाएंगे
मैं मोहब्बत की शमा जलाने आई

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