महफिल सजाने में आई हूं
इस महफिल में कोई तन्हा ना हो
चुन लो अपना मनचाहा आशिक
कोई माशूक अकेला ना हो
उसकी बाहों में हो उसकी महबूबा
सब कुछ है रंगीनियों में डूबा
अभी तो महफिल में शबाब नहीं आया
अभी तो महफिल अधूरी है
छलकेगे जाम बिखरे की खुशियां
दुनिया के हर गम दूर हो जाएंगे
मोहब्बत की चाहत में सब खो जाएंगे
मैं मोहब्बत की शमा जलाने आई
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