Saturday, 27 June 2026

प्यार में तन्हाई का कैसा जादू होता है

प्यार में तन्हाई का कैसा जादू होता है,दिल जब साजन की यादों में होता है, हम सपनों में सवरने लगते हैं, खुद अपने पर मरने लगते हैं, 
जाने क्यों ऐसा होता है,दिल खुद से बातें करता है, एक डर दिल को लगता है, 
कहीं हम दीवाने ना हो जाए 
कहीं हम खुद से ना खो जाए 

इन हवाओं में तेरी खुशबू है 
जो मुझे मदहोश कर रही है
बेताबी छाई है मेरे दिल पर
तेरी यादे दिल में घर कर रही है
बड़ा मीठा बड़ा प्यारा तेरा दर्द लगता है 

जाने क्यों ऐसा होता है,दिल खुद से बातें करता है, एक डर दिल को लगता है, 
कहीं हम दीवाने ना हो जाए 
कहीं हम खुद से ना खो जाए 

ओ सनम तूने कैसी आग दिल में ये लगाई
अच्छी लगने लगी अब खामोश ये तन्हाई
कोई ख्याल अब आता नहीं निगाहों में
तूने हमसे हमारी नींदे रातो की है  चुराई
 सनम तू हमें अब अजनबी सा लगता है 

जाने क्यों ऐसा होता है,दिल खुद से बातें करता है, एक डर दिल को लगता है, 
कहीं हम दीवाने ना हो जाए 
कहीं हम खुद से ना खो जाए 

मेरे सनम तेरी यादें जीने का सहारा है 
सच कहूं तो दर्द तेरा अब हमको प्यारा है
राते अपनी हमने काटी कलवट बदल बदल के
तेरी यादें ही अब मेरे जीने का सहारा है 
तू अपना नहीं कोई परदेसी लगता है 

प्यार में तन्हाई का कैसा जादू होता है,दिल जब साजन की यादों में होता है, हम सपनों में सवरने लगते हैं, खुद अपने पर मरने लगते हैं, 
जाने क्यों ऐसा होता है,दिल खुद से बातें करता है, एक डर दिल को लगता है, 
कहीं हम दीवाने ना हो जाए 
कहीं हम खुद से ना खो जाए 

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