[मुखड़ा ]
बुरा क्या है हम हुस्न वालों की चाहत नहीं करते,
बड़े मासूम होते हैं ये कभी वफ़ा नहीं करते।
लाख पलकें बिछाओ इनकी राहों में क्या होता है,
ये अपने आशिकों की कभी परवाह नहीं करते।
[अंतरा 1]
एक बार जो आ जाए इनके पिंजरे में,
वो परिंदे कभी आसमां में फिर उड़ा नहीं करते।
गुनाह है इनकी नज़रों में मोहब्बत करना,
भूलकर भी भूल से ये ऐसा गुनाह नहीं करते।
बुरा क्या है हम हुस्न वालों की चाहत नहीं करते,
बड़े मासूम होते हैं ये कभी वफ़ा नहीं करते।
[अंतरा 2]
सात जन्मों तक साथ देने का वादा खूब करते हैं,
मगर एक जन्म में भी ये कभी साथ नहीं चलते।
आशिक तड़पता रहे इसमें मज़ा आता है हुस्न वालों को,
बड़े बेमुरब्बत होते हैं कोई परवाह नहीं करते।
बुरा क्या है हम हुस्न वालों की चाहत नहीं करते,
बड़े मासूम होते हैं ये कभी वफ़ा नहीं करते।
[अंतरा 3]
मंजिलों से पहले ही ये अक्सर साथ छोड़ देते हैं,
किसी की वफ़ा पर ये कभी ऐतबार नहीं करते।
एक नया रंग बदलते हैं बदलते वक्त की तरह,
टूट कर प्यार करो इनसे मगर ये प्यार नहीं करते।
बुरा क्या है हम हुस्न वालों की चाहत नहीं करते,
बड़े मासूम होते हैं ये कभी वफ़ा नहीं करते।
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