मेरी चाहत ने ही तो मेरा दिल तोड़ दिया,
मैंने भी अपनी चाहत को तन्हा छोड़ दिया।
अब न जाने फिर कब होठों पर मुस्कुराहट लौटेगी,
हालात बिगड़े हैं ऐसे, हमने हँसना भी छोड़ दिया।
बहारों के फूलों ने जब से दामन छोड़ा है मेरा,
हमने काँटों से ही अपना ये दामन सजा लिया।
माली से चमन के सभी 'ख़ार' मँगा लिए हमने,
अब अपने ही गुलशन में हमने जाना छोड़ दिया।
रातों की चाँदनी से भी अब डर लगने लगा है हमें,
खुले आसमान के नीचे अब तो टहलना छोड़ दिया।
कहीं बहती नदियाँ हमसे हमारे आँसू न माँग लें,
इसलिए बहते शिकारों में हमने तन्हा जाना छोड़ दिया।
उनकी चाहत भी क्या थी दिल में जीने की हसरत थी
वो रुठे हैं जब से हमसे सांसों ने भी नाता तोड़ लिया
वफा के मायने क्या है कोई तो बता दे हमको
क्या हमने ठीक किया हर खुशी से रिश्ता तोड़ दिया
No comments:
Post a Comment