Tuesday, 3 March 2026

जो हमदर्द था दर्द दिया है उसने

जो हमदर्द कहता था दुनिया का, दर्द दिया है उसने 
जाने कितने मासूमों को, जिंदा जला दिया उसने
वह शैतानों का बादशाह है, खून पीने का आदी है 
इंसानी की जिस्मों से हर कतरा खून का  निचोड़ लिया है उसने 
अपनी मौत का खौफ इस कदर हावी था उसके सर पर 
बेगुनाह बच्चो का सिर भी कलम करा लिया है उसने
वो शैतान है रहबर, अपने को दुनिया का कहता है
लाशों के ढेर पर, अपना, तख्त बना लिया है उसने
उसकी चाहत है, दुनिया पर बादशाहत करने की 
इसलिए पूरी दुनिया को, अपना गुलाम बना लिया है उसने 
खून बगुनाहों का सिर पर चढ़कर उसके बोलेगा 
अभी तो हुकूमत को अपनी ढाल बना लिया है उसने 
जो इंसानियत और जम्हूरियत दम भरता था 
इस जमीन पर कहीं वो ताज गिरा दिया है उसने
वो अपना नाम शतानों का बादशाह 
बताता है 'प्रभात'
इतिहास में दर्ज वही होगा जो नाम दुनिया में कमा लिया है उसने







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