[स्थायी / Chorus]
जहाँ से जाने वाले खामोशी से चले जाते हैं
उनकी यादों में हम क्यों अश्क बहाते हैं?
जहाँ से जाने वाले खामोशी से चले जाते हैं...
[अंतरा - 1 / Verse 1]
वो जिनकी बाहों में खेला मेरा बचपन अक्सर
हमारे सपनों में आकर, हमे रुलाते हैं
हकीकत है ज़माने की, सबको जाना है
तन्हा ये सफर,बस दो कदम साथ आते हैं
उनकी यादों में हम क्यों अश्क बहाते हैं?
[अंतरा - 2 / Verse 2]
सिरहाने बैठकर जो मेरे, कभी रोते थे अक्सर
अब उन्हें हम याद, क्योंकर नहीं आते हैं?
हमसे ही शायद हुई होगी कोई खता
ना समझ हैं हम, जो उनसे दामन चुराते हैं
उनकी यादों में हम क्यों अश्क बहाते हैं?
[अंतरा - 3 / Verse 3]
हकीकत में यह दुनिया, एक ख्वाब ही तो है
हसीन सपना है, लोग इसे हकीकत बताते हैं
दौलत और शोहरत की अजब है ये दुनिया
भूखे हैं मगर, दो निवाले मुश्किल से खाते हैं
उनकी यादों में हम क्यों अश्क बहाते हैं?
[अंतरा - 4 / Verse 4]
सच्चाई इस दुनिया की, इंसान पहचानता कब है?
कौन सी चाहत है मे, जो इंसानों का लहू बहाते हैं?
कारवां ज़िंदगी का, यूँ ही चलता जाता है
मंजिलें मिलती नहीं, रास्ते भी खो जाते हैं
उनकी यादों में हम क्यों अश्क बहाते हैं?
[मक्ता / Finale]
रास्ते ठहरते नहीं, मंजिल पास आती नहीं
जाने किन खयालों में हम तो चलते जाते हैं
दिल से निकली ये सदा 'प्रभात' बेवजह तो नहीं
वो गया, मैं भी चला, देख ले सब आते हैं...
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