Thursday, 19 March 2026

भजन: माँ शेरावाली

भजन: माँ पहाड़ों वाली

(मुखड़ा)

माँ पहाड़ों वाली, माँ शेरावाली,

तेरे द्वारे आया हूँ, लेकर झोली खाली।

मेरी माँ पहाड़ों वाली, ओ माँ जगराते वाली,

ओ माँ पहाड़ों वाली!

(अंतरा 1)

माँ तुझसे ही आस मेरी, तू ही पास मेरे,

तू चाहे तो पल में हर ले, दुखों के अँधेरे।

तुझे अपना दर्द सुनाने, मैं आया तेरे द्वारे,

बनके सवाली माँ शेरावाली, खड़ी हूँ तेरे सहारे।

(अंतरा 2)

लंबी कतार में भक्त तेरे, लेकर आए दुखड़ा भारी,

तू दरस दिखा दे अम्बे माँ, मैं दर्शन का हूँ भिखारी।

तू ही माता, तू ही विधाता, तुझसे ही मेरा नाता है,

बिन तेरे ममता के आँचल, अब यह जग नहीं भाता है।

(अंतरा 3)

गली-गली में गूँजे मैया, रात-रात भर तेरा जगराता,

मैं भी अपनी झोली फैला, हर जगराते में आता।

मेरी समझ में कुछ नहीं आता, फिर भी महिमा सुनता हूँ,

बैठा-बैठा मन ही मन, बस तेरा नाम ही जपता हूँ।

(अंतरा 4)

भक्तों पर उपकार है तेरा, जो सुमिरन बार-बार करें,

तू सुनती सबकी अरज भवानी, सबकी नैया पार करे।

तेरे दर से कोई सवाली, कभी न जाता खाली हाथ,

सिर पर रख दे हाथ दया का, दे दे अपना साथ।

(समापन)

मैं आया हूँ तेरे द्वार, न जाऊँगा अब खाली,

सुन मेरी पुकार माँ, कर दे बेड़ा पार माँ शेरावाली।

माँ पहाड़ों वाली, माँ शेरावाली...

ज़ोर से बोलो - जय माता की!

प्रेम से बोलो - जय माता की!

सारे बोलो - जय माता की!

जयकारा शेरावाली का, बोल सांचे दरबार की जय!








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