Tuesday, 10 March 2026

इकरार-ए-मोहब्बत की इक मुस्कान तो दे दो,


इकरार-ए-मोहब्बत की इक मुस्कान तो दे दो,

मेरे दिल की सदा को ज़रा पहचान तो दे दो।

​तड़प रही हैं बाहें तुम्हें गले लगाने को,

ज़रा करीब आकर धड़कनों को जान तो दे दो।

​न कोई ख़्वाब हो तुम, न महज़ इक तसव्वुर,

हकीकत बन के आँखों को थोड़ा इत्मीनान तो दे दो।

दिल की एक चाहत छोटी सी है

कहो तो तुमसे हम कहे

खुशिया न सही दिल को गम अपना  इनाम में तो दे दो

नादान इश्क महफिल सजाकर बैठा है

आकर इस महफिल में   इश्क को पहचान तो दे दो 

गुस्ताख दिल से हुई है खता प्यार की 

जुबान से  ना सही नजरों से इल्जाम तो दे दो

मुश्किले इस कदर है मुश्किल पार पाना भी मुश्किल है

 इस दिल की मश्किलों को कुछ आसान तो कर दो











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