Saturday, 7 March 2026

आशिक पत्थर तो खाता है मोहब्बत को झुकने नहीं देता

ये जमाना इश्क वालों को मुस्कुराने भी नहीं देता 
ये हाल ए दिल किसी को भी सुनाने नहीं देता 
जख्म तो लाख देता है उन पर मरहम नही रखता 
कोई हमदर्द चाहे सहलाना जख्मों को सहलाने नहीं देता 
​अदावत इस क़दर पाली, ज़माने ने  इश्क वालों से
ये चाहने वाले को चाहे भी तो पास आने नहीं देता 
​सहर जो इश्क़ की थी, उसको काली रात कर डाला,
अंधेरे किस्मत में भर देता है उजाले आने नहीं देता 
इश्क वालों ने भी 'प्रभात'  जमाने को उसकी हस्ती बताई है
आशिक पत्थर तो खाता है मोहब्बत को  झुकने नहीं देता




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