इश्क की बात हुई तन्हा एक रात हुई
सनम साथ था प्यार कीबात हुई
जब से मुलाकात हुई चैन मेरा खो गया
प्यार में उसके मैं दीवाना हो गया
बहुत तेज बरसात थी वह मेरे साथ थे जंगल की रात थी एक झोपड़ी पास थी
उसमें हम आ गए पहली मुलाकात थी
जो ना होना था वह भी हो गया
तेजहवा चली फुस सारा उड़ गया
तन बरसात में पूरी तरह भीग गया
प्यार में उसके मैं दीवाना हो गया
इश्क की बात हुई तन्हा एक रात हुई
सनम साथ था प्यार कीबात हुई
बिजली की चमक ने धड़कन को बढ़ा दिया
उस एक पल ने सदियों का साथ बना दिया
न छत रही सर पर,
न दीवारों का पहरा था
वो इश्क का रंग ही था,
बारिश का पानी तो बे रंग था
न थमी वो बारिश, न रुकी वो गुफ्तगू,
हर बूँद में घुली थी बस तेरी ही जुस्तजू।
दुनिया से कट के हम एक दूजे में खो गए,
उस भीगी रात में हम मुकम्मल हो गए।"
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