Sunday, 29 March 2026

​ओ मेरे मितवा रे...

​ओ मेरे मितवा रे...

दिल की पुकार... सुन ले,

मेरी आवाज़... सुन ले।

​तू है कहाँ?

मेरे मितवा, तू है कहाँ मेरे मितवा?

ढूँढूँ मैं तुझे कहाँ?

​मेरे मन का मीत तू है,

मेरे होठों का गीत तू है।

ज़िंदगी है मेरी तू, ओ मितवा,

मेरी चाहतों का संगीत तू है।

सपना है मेरी आँखों का...

कोई अपना हसीं सपना इन आँखों में दे,

ओ मेरे मितवा, ओ मेरे मितवा रे...

​मेरी आँखों को अपना

हसीन सपना सनम दे दे।

बड़ी लंबी होगी तन्हाई,

साथ में हैं मेरी परछाई।

जो महफ़िल सजाई  मैंने वो बेरंग है बिना तेरे,

कैसे सहूँ मैं तेरी जुदाई?

 यादों में भी तू ना आई

तुम ही तो मेहमान हो मेरे।

लंबी हो गई बड़ी तन्हाई,

नींद भी तुमने छुड़ाई।

तुम पर हक है मेरा

अपना दे दो सहारा

ओ मेरे मितवा रे, ओ मितवा, मेरे मितवा।

बड़ी धुंधली सी लगती है,

राहें इस दुनिया की।

मैं अकेला हूँ अपने प्यार की राहों... में,

देख ना तड़पा, अब तो आ भी जा,

अपने सनम की बाहों... में।

इस दुनिया ने ये ऐसी  क्यों रीत बनाई?

मिल ना पाए जहां अपनी परछाईं  परछाई 

मिल ना पाए जहां अपनी परछाई से परछाई

चाहत तेरी इस दिल में बसी है,

फिर क्यों... ये बेबसी है?

​देख अब आजा, आवाज़ इस दिल ने लगाई,

तू है मेरी परछाईं, तू है... मेरी परछाईं।

​ओ मितवा रे... मेरे मितवा, ओ मेरे मितवा।


तेरे बिना यह जीवन  

सूना है बड़ा 

मेरे सामने तेरे बिना 

अंधेरा है बड़ा 

हो रही जग हंसाई 

बात मेरे प्यार पर आई 

बिना मिले कैसे तुझसे रह पाऊं 

कोई गीत अकेले कैसे प्यार का मैं गाऊं 

आज अपना  साथ तू दे  दे

अपनी प्रीत मुझे दे दे

अब जब मैं तुझसे मिली,

कली जेसी मैं खिली।

मिल गई मुझे नई ज़िंदगी,

तुझसे मिलकर ऐसा लगा,

रास्ता ज़िंदगी का मिल गया।

जैसे मुझे मेरा संसार मिल गया

ओ मेरे मितवा मेरे मितवा ओ मेरे मितवा



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