तेरी ये मोहब्बत मेरी सांसों में बस गयी है,
खुद से अलग करके ज़िंदा कैसे रह पाएगा।
ये जहां भी रास ना आएगा, उस जहां में भी रह ना पाऊंगा,
तूने मोहब्बत को वो मुकाम दे दिया...
मिटा कर मेरी हस्ती को, तूने अपनी रूह में शामिल कर लिया,
अब धड़कन भी चलती है तो बस तेरा नाम लेकर।
जुदा होने का तसव्वुर भी एक मौत जैसा है,
तूने तो मुझे मेरी ही नज़रों में 'ख़ास' कर दिया।
मिट जाएँगे ज़माने से मगर तुम से जुदा न होंगे,
इस मोड़ पर लाकर खड़ा किया है तक़दीर ने।
अब तो बंद आँखों में भी बस तेरा ही अक्स रहता है,
तूने मेरी तन्हाई को भी एक हसीं ख़्वाब दे दिया।
ज़माने की बंदिशें भला क्या रोकेंगी इस इश्क़ को,
जो रूह का राब्ता है, वो सरहदों से परे है।
'प्रभात' अब इस जहाँ में रहे या न रहे क्या फ़र्क,
तूने अपनी चाहत का मुझे वो लाफ़ानी जहान दे दिया।
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