Saturday, 30 May 2026

कैसी है ये मजबूरी,पास होकर भी है दूरी

कैसी है ये मजबूरी,
पास होकर भी है दूरी 
जज्बात बिखर ना जाए, 
सुन ले एक बात जरूरी 

दिल के करीब रहने दे 
अपना बना ले हमें 
तेरे बिना हम अधूरे हैं 
सांसे भी रह गई अधूरी 

तड़पते ख्यालों में रहते हैं 
अपने ही उलझे सवालों में रहते हैं 
दिल यह मानता कहां है 
जब तुझे अपना हम कहते हैं 
दिल को मनाना है जरूरी

कैसी है ये मजबूरी,
पास होकर भी है दूरी 
जज्बात बिखर ना जाए, 
सुन ले एक बात जरूरी 

करते रहेंगे कब तक 
इंतजार हम तुझे पाने का 
कैसा यह इंतजार है 
मंजिलों के करीब आने का 
मंजिलें पाने के लिए 
रहना सफर में जरूरी है

कैसी है ये मजबूरी,
पास होकर भी है दूरी 
जज्बात बिखर ना जाए, 
सुन ले एक बात जरूरी 

देख बहारों का ये मौसम 
बनके आंधी उड़ जाएगा 
प्यासे हम रह जाएंगे 
प्यासा ही सावन बीत जाएगा 
भीग जाए यह सावन 
बादलों का बरसना जरूरी है

कैसी है ये मजबूरी,
पास होकर भी है दूरी 
जज्बात बिखर ना जाए, 
सुन ले एक बात जरूरी 


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